क्लाइमेट नीति icon

क्लाइमेट नीति

नीतियां हमारे ग्रह के भविष्य की रूपरेखा तय करती हैं। प्रस्तावित, स्वीकृत और प्रगति पर मौजूद नीतियों का अन्वेषण करें।

नवीनतम

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के 75% हिस्से में सूखा घोषित किया, राहत उपायों का ऐलान

Editorial Team | 30 सित॰. 2026

महाराष्ट्र में कम बारिश के चलते लगभग 75% राज्य में सूखा घोषित कर दिया गया है। राज्य सरकार ने प्रभावित किसानों के लिए राहत उपायों का ऐलान किया है। उधर नेपाल ने जलवायु परिवर्तन और हिमालयी आपदाओं से निपटने के लिए भारत और चीन के साथ क्षेत्रीय सहयोग तंत्र बनाने का प्रस्ताव रखा है। इसी बीच जलवायु जोखिमों के कारण भारत में दूध उत्पादन की वृद्धि धीमी पड़ रही है और मांग-आपूर्ति का अंतर बढ़ने की आशंका है। वहीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए मजबूत नीतियों और प्रभावित समुदायों की भागीदारी पर जोर दिया है।

और कहानियाँ

कमजोर मानसून से पड़ेगी मंहगाई की मार, अनाज के अलावा बढ़ सकते हैं दूध के दाम

Editorial Team| 31 जुल॰. 2026

जलवायु परिवर्तन का असर अब केवल मौसम और खेती तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था, महंगाई और खाद्य सुरक्षा के लिए भी बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। कमजोर और असमान मानसून से फसलों के साथ-साथ पशुओं के चारे और दूध उत्पादन पर भी असर पड़ने की आशंका है। इसी बीच सरकार के एक आकलन में देश के 310 कृषि जिलों को जलवायु परिवर्तन के लिहाज से संवेदनशील बताया गया है। दूसरी ओर, पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने अरावली संरक्षण पर जनता से सुझाव मांगे हैं और पर्यावरण राहत कोष के उपयोग का ब्योरा भी केंद्र सरकार से तलब किया है।

सरकार ने डीजल-पेट्रोल बिक्री पर लगी अस्थायी पाबंदियां हटाईं

Editorial Team| 1 जुल॰. 2026

पश्चिम एशिया में युद्धविराम के बाद कच्चे तेल की आपूर्ति सामान्य होने के बाद भारत सरकार ने पेट्रोल-डीजल की बिक्री पर लगी पाबंदियां हटा ली हैं। उधर बॉन जलवायु सम्मेलन में प्रमुख मुद्दों पर विकसित और विकासशील देशों के बीच आम सहमति नहीं बन सकी। वहीं एक नई रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में वैश्विक जलवायु वित्त पहली बार 2 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंचा, लेकिन निवेश की रफ्तार धीमी पड़ने से जलवायु लक्ष्यों को लेकर चिंता बढ़ गई है। उधर अरावली पर्वतमाला की सीमा तय करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की उच्चाधिकार प्राप्त समिति की निष्पक्षता पर विशेषज्ञों ने सवाल उठाते हुए इसकी संरचना में बदलाव की मांग की है।