कमजोर मानसून से बढ़ी महंगाई, बिगड़ा रसोई का बजट
सितंबर में खुदरा महंगाई बढ़कर 5.5 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो करीब दो साल का उच्चतम स्तर है। जानकारों के अनुसार खाने-पीने की चीजों और ईंधन की बढ़ती कीमतों से महंगाई बढ़ी है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, रसोई की 41 जरूरी वस्तुओं की कीमतों में भारी वृद्धि हुई। प्याज के दाम करीब 113 प्रतिशत, चीनी के 22 प्रतिशत और सूरजमुखी तेल के 18 प्रतिशत तक बढ़े।
विशेषज्ञों ने कमजोर मानसून और जलाशयों में पर्याप्त पानी नहीं भरने से रबी फसलों की बुवाई पर असर पड़ने की आशंका जताई। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भी चिंता बढ़ा रही हैं। आईसीआरए की अदिति नायर के मुताबिक, दिसंबर में रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना है।
पश्चिमी घाट को इको-सेंसिटिव क्षेत्र घोषित करने के प्रस्ताव का 6 राज्यों में विरोध
केंद्र सरकार के पश्चिमी घाट के 56,825.7 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र (ईएसए) घोषित करने के सातवें मसौदे का छह राज्यों में विरोध हो रहा है। गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु में फैले इस क्षेत्र के संरक्षण को लेकर भूमि उपयोग और स्थानीय आजीविका से जुड़े विवाद फिर तेज हो गए हैं।
जुलाई में पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत जारी मसौदे में खनन, पत्थर खदानों, रेत खनन, नए थर्मल बिजली संयंत्रों, अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों और कुछ बड़ी निर्माण परियोजनाओं पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है। राज्यों के विरोध के बीच पश्चिमी घाट के संरक्षण और विकास के बीच संतुलन बनाने की चुनौती बनी हुई है।
महाराष्ट्र का 85% से अधिक हिस्सा सूखाग्रस्त घोषित
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को बताया कि 40 और तालुकाओं को सूखाग्रस्त घोषित किए जाने के बाद राज्य में प्रभावित तालुकाओं की संख्या बढ़कर 305 हो गई है। राज्य के कुल 358 तालुकाओं में से 85 प्रतिशत से अधिक अब सूखे की चपेट में हैं।
राज्य सरकार ने सूखे से प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए दिवाली से पहले उनके बैंक खातों में 5,000 रुपए की शुरुआती सहायता सीधे जमा करने की घोषणा की है। प्रभावित क्षेत्रों में फसल ऋण के पुनर्गठन, भूमि राजस्व में छूट और बिजली बिलों में राहत सहित 12 उपाय लागू होंगे। सरकार ने कहा कि केंद्र से मिलने वाली सहायता में समय लगने के कारण 5,000 रुपए अग्रिम राहत के तौर पर दिए जा रहे हैं। प्रभावित किसानों पर कर्ज वसूली का दबाव रोकने के निर्देश भी दिए गए हैं।
2030 तक प्रकृति संरक्षण का लक्ष्य हासिल करने में अधिकतर देश पीछे
दुनिया के देश 2030 तक पृथ्वी की 30 प्रतिशत जमीन और जल क्षेत्रों को संरक्षित करने के लक्ष्य से काफी पीछे हैं। आर्मेनिया में अगले सप्ताह होने वाले सीओपी17 जैव विविधता सम्मेलन से पहले आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा सरकारी प्रतिबद्धताओं के आधार पर इस दशक के अंत तक संरक्षित भूमि और अंतर्देशीय जल क्षेत्र का हिस्सा केवल 27 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। फिलहाल यह करीब 20 प्रतिशत है।
रॉयटर्स के मुताबिक, अब तक 50 देश 30 प्रतिशत संरक्षण का लक्ष्य हासिल कर चुके हैं। समुद्रों की स्थिति भी चिंताजनक है। एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के केवल 10 प्रतिशत महासागरीय क्षेत्र संरक्षित हैं। मौजूदा प्रतिबद्धताओं के बावजूद 2030 तक यह आंकड़ा करीब 12 प्रतिशत तक ही पहुंच पाएगा। सम्मेलन में प्रकृति संरक्षण के लिए वित्तीय संसाधनों की कमी प्रमुख मुद्दा होगी।
प्री-कॉप: भारत ने की ठोस क्लाइमेट एक्शन की अपील
भारत ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए वैश्विक प्रतिबद्धताओं को पूरा करने और पेरिस समझौते को प्रभावी ढंग से लागू करने की जरूरत पर जोर दिया है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने फिजी में कॉप31 से पहले आयोजित बैठक में कहा कि जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने के लिए संसाधनों और वैज्ञानिक जानकारी से जुड़ी कमियों को दूर करना जरूरी है।
उन्होंने देशों से अपने वादों को पूरी तरह निभाने और उत्सर्जन में कटौती, जलवायु अनुकूलन तथा वित्तीय सहायता के क्षेत्र में ठोस परिणाम दिखाने की अपील की। यादव ने संयुक्त राष्ट्र की उप महासचिव अमीना जे मोहम्मद और जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र के कार्यकारी सचिव साइमन स्टील से भी मुलाकात की। नवंबर में तुर्किये में सीओपी31 सम्मेलन होना है।