ब्रिक्स देशों ने मांगा अधिक फाइनेंस, किया कार्बन टैक्स का विरोध
ब्रिक्स देशों ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए पेरिस समझौते को पूरी तरह लागू करने का संकल्प लेते हुए विकसित देशों से विकासशील देशों को पर्याप्त और भरोसेमंद क्लाइमेट फाइनेंस, तकनीक और क्षमता निर्माण सहायता देने की मांग की है। नई दिल्ली में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में जारी घोषणापत्र में क्लाइमेट एक्शन को विकास, कर्ज और आपदा-रोधक क्षमता से भी जोड़ा गया।
नई दिल्ली घोषणा में कहा गया कि जलवायु परिवर्तन का सबसे अधिक बोझ उभरती अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों पर पड़ रहा है, जबकि खासकर अडॉप्टेशन के लिए वित्त की भारी कमी बनी हुई है।
ब्रिक्स नेताओं ने विकसित देशों से विकासशील देशों को अतिरिक्त, पर्याप्त, पूर्वानुमान योग्य और आसानी से उपलब्ध वित्तीय संसाधन मुहैया कराने की मांग की। घोषणा में क्षमता निर्माण और तकनीक के विकास तथा हस्तांतरण में भी अधिक सहयोग की जरूरत बताई गई।
नेताओं ने कहा कि क्लाइमेट एक्शन में समानता और 'समान परंतु विभेदित उत्तरदायित्व और संबंधित क्षमताएं (कॉमन बट डिफ्रेंशिएटेड रिस्पॉन्सिबिलिटीज़ एंड रिस्पेक्टिव कैपेबिलिटीज़, यानि सीबीडीआर-आरसी) के सिद्धांत को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
ब्रिक्स देशों ने पेरिस समझौते के तहत उत्सर्जन में कमी, जलवायु अनुकूलन, जलवायु आपदाओं से होने वाले नुकसान और विकासशील देशों को साधन उपलब्ध कराने संबंधी प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू करने का आह्वान किया।
ब्रिक्स देशों ने 'एकतरफा, दंडात्मक, भेदभावपूर्ण और संरक्षणवादी जलवायु उपायों' का विरोध किया और कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप नहीं हैं। इनमें कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (सीबीएएम) जैसे उपाय भी शामिल हैं।
लद्दाख में नौतोड़ भूमि के मालिकाना हक का मुद्दा सुलझा
लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने नौतोड़ भूमि के नियमितीकरण से जुड़े नियमों को मंजूरी दे दी है। इससे पात्र लोगों को सरकारी बंजर या बेकार जमीन पर मालिकाना हक मिलने का रास्ता साफ हो गया है। नौतोड़ भूमि से आशय सरकार की ऐसी बंजर या बेकार जमीन से है, जिसे खेती या अन्य उपयोगी काम के लिए लोगों को आवंटित किया गया था। लद्दाख में राजस्व रिकॉर्ड में 60,000 एकड़ से अधिक जमीन नौतोड़ भूमि के रूप में दर्ज है।
लद्दाख ऑटोनॉमस हिल डेवलपमेंट काउंसिल्स (नौतोड़ रेगुलराइजेशन) रूल्स, 2026 के तहत पात्र धारकों को अधिकतम 10 एकड़ नौतोड़ भूमि पर मालिकाना हक दिया जा सकेगा। 10 एकड़ से अधिक जमीन को लीज के आधार पर आवंटित किया जा सकता है। नियमों में 27 अक्टूबर, 2020 से पहले के कब्जे को एकमुश्त नियमित करने का प्रावधान है। इसके बाद किए गए कब्जे इसके दायरे में नहीं आएंगे। भूमि का नियमितीकरण होने के बाद उसे बैंकों और वित्तीय संस्थानों के पास गिरवी रखकर कर्ज भी लिया जा सकेगा।
ग्लोबल वार्मिंग सीमित रखने के लिए यूएन ने बनाई योजना
संयुक्त राष्ट्र ने चेताया है कि दुनिया अगले कुछ वर्षों में 1.5 डिग्री सेल्सियस तापमान वृद्धि की सीमा पार कर सकती है। यूएनईपी की लिमिटिंग ओवरशूट रिपोर्ट में पहली बार तापमान सीमा पार होने के बाद उसे कम करने के लिए विस्तृत रास्ता सुझाया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, सभी देश अपनी मौजूदा जलवायु योजनाओं और नेट-जीरो लक्ष्यों को पूरा करें, तब भी वैश्विक तापमान वृद्धि 1.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकती है। मौजूदा नीतियों के तहत 2100 तक तापमान में करीब 2.6 डिग्री वृद्धि का अनुमान है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 1.5 डिग्री से अधिक तापमान से कुछ नुकसान स्थायी होंगे, जिन्हें अनुकूलन उपायों से भी पूरी तरह नहीं रोका जा सकेगा।
अरावली पर रिपोर्ट के लिए पैनल ने मांगा 6 महीने का समय
सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित अरावली हाई-पावर्ड कमेटी ने अरावली पर्वतमाला पर अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने के लिए छह महीने का अतिरिक्त समय मांगा है। समिति ने शीर्ष अदालत से समयसीमा बढ़ाकर 28 फरवरी, 2027 करने का अनुरोध किया है।
समिति ने कहा कि अरावली का व्यापक और वैज्ञानिक आकलन पूरा करने के लिए अधिक समय जरूरी है। इसके लिए भू-स्थानिक, पारिस्थितिक, भूवैज्ञानिक, जलविज्ञान, जैव विविधता और सामाजिक-आर्थिक पहलुओं के साथ हितधारकों की राय को शामिल किया जाएगा।
समिति ने अरावली इकोसिस्टम लैंडस्केप (एईएल) ढांचे का प्रस्ताव दिया है, जिससे अलग-अलग क्षेत्रों की सामाजिक और पारिस्थितिक संवेदनशीलता पहचानकर संरक्षण की रणनीति तय की जा सके। समिति ने अगस्त में क्षेत्र का दौरा किया और जनसुनवाई की। उसे करीब 680 सुझाव और आपत्तियां भी मिली हैं।