‘ब्लैक हरेला’: ऋषिकेश-भानियावाला फोरलेन परियोजना में पेड़ों की कटाई फिर शुरू, दो प्रदर्शनकारी गिरफ्तार
उत्तराखंड में ऋषिकेश-भानियावाला फोरलेन सड़क परियोजना के लिए शिवारिक एलीफेंट रिजर्व क्षेत्र में पेड़ों की कटाई के विरोध में देहरादून के नागरिकों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने 'ब्लैक हरेला' सोशल मीडिया अभियान चलाया। हरेला उत्तराखंड में हरियाली से जुड़ा त्यौहार है लेकिन इन लोगों ने पेड़ों के कटाई के खिलाफ इसके काले रूप में प्रतीकात्मक विरोध किया। इससे पहले सोमवार को पुलिस और वन विभाग की मौजूदगी में दोबारा शुरू हो गई। स्थानीय लोग और पर्यावरण कार्यकर्ता पिछले एक सप्ताह से 'चिपको' शैली में पेड़ों से लिपटकर कटाई का विरोध कर रहे थे। इससे पहले भी करीब 170 पेड़ काटे जा चुके हैं।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने दो प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया, जबकि लगभग दो दर्जन अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। यह कार्रवाई राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की शिकायत के बाद की गई। प्रदर्शनकारियों ने सुप्रीम कोर्ट में 15 जुलाई को प्रस्तावित सुनवाई तक पेड़ों की कटाई रोकने की मांग की है। हाल ही में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने परियोजना पर रोक लगाने से इनकार करते हुए कहा था कि पेड़ों की कटाई पर कोई अंतरिम रोक प्रभावी नहीं है। परियोजना के तहत कुल 4,639 पेड़ों को हटाने की योजना है, जिनमें से 754 पेड़ों के प्रतिरोपण का दावा NHAI ने किया है।
जलवायु परिवर्तन से बढ़ेगा शहरी जल संकट, सदी के मध्य तक कई शहरों में दोगुना हो सकता है पानी का बिल
जलवायु परिवर्तन का असर अब केवल मौसम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह लोगों की जेब पर भी भारी पड़ सकता है। नेचर वाटर जर्नल में प्रकाशित एक नए अध्ययन के अनुसार, यदि ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन मौजूदा गति से जारी रहा, तो सदी के मध्य तक दुनिया के कई शहरी क्षेत्रों में घरेलू जल आपूर्ति की लागत में भारी वृद्धि होगी। कुछ शहरों में पानी के बिल दोगुने तक हो सकते हैं।
अध्ययन के मुताबिक, बढ़ते तापमान, अनियमित वर्षा, लंबे सूखे और घटते जल स्रोतों के कारण नगरों को दूर-दराज के इलाकों से पानी लाना पड़ेगा। इसके लिए नई पाइपलाइन, पंपिंग सिस्टम, जलाशयों और शोधन संयंत्रों पर अधिक निवेश करना होगा, जिसका सीधा बोझ उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।
शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि जलवायु परिवर्तन का सबसे अधिक असर उन शहरों पर होगा, जो पहले से ही जल संकट का सामना कर रहे हैं। विकासशील देशों के शहरों में स्थिति और गंभीर हो सकती है, क्योंकि यहां तेजी से बढ़ती आबादी और सीमित जल अवसंरचना चुनौती को और बढ़ा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वर्षा जल संचयन, जल संरक्षण, सीवेज की रिसायकिलिंग और रिसाव रोकने जैसे उपायों को प्राथमिकता नहीं दी गई, तो भविष्य में सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना और किफायती बनाए रखना बड़ी चुनौती बन जाएगा। अध्ययन इस बात पर भी जोर देता है कि जलवायु परिवर्तन से निपटने की रणनीतियों में शहरी जल प्रबंधन को प्रमुख स्थान देना अब बेहद जरूरी है।
अमेरिका-ईरान संघर्ष फिर भड़का, हमलों में एक भारतीय नाविक की मौत, 10 घायल, एक लापता
अमेरिका और ईरान के बीच हुआ अंतरिम शांति समझौता टूटने के बाद पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिका ने ईरान पर नए हवाई हमले किए, जिसके जवाब में ईरान ने अमेरिका के सहयोगी देशों और होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे जहाजों को निशाना बनाया। अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के अनुसार, 'अल बहियाह' और 'मोम्बासा' नामक तेल टैंकरों पर हुए हमलों में दो नाविकों की मौत हुई और 14 अन्य घायल हो गए।
हमलों का असर भारतीय नाविकों पर भी पड़ा है। 'अल बहियाह' पर हुए हमले में एक भारतीय नाविक की मौत हो गई और एक अन्य घायल हुआ, जबकि 'मोम्बासा' पर हमले में नौ भारतीय घायल हुए हैं, जिनमें दो की हालत गंभीर बताई जा रही है। इससे पहले ओमान तट के पास 'जीएफएस गैलेक्सी' नामक वाणिज्यिक जहाज पर ईरानी हमले के बाद एक भारतीय नाविक लापता हो गया था। भारत सरकार ने इस घटना पर कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास के उप प्रमुख को तलब किया है।
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर 20 प्रतिशत शुल्क लगाने के अपने प्रस्ताव से पीछे हटते हुए कहा कि खाड़ी देश अमेरिका में बड़े पैमाने पर नए निवेश करेंगे। इससे पहले सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन अमेरिका में दो ट्रिलियन डॉलर से अधिक निवेश की घोषणा कर चुके हैं। वहीं, मीडिया रिपोर्टों के अनुसार ट्रंप ने इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से सीरिया और लेबनान से सैन्य बलों की चरणबद्ध वापसी पर भी चर्चा की है।
वायनाड भूस्खलन के बाद सुरंग परियोजना की मंजूरियों पर सवाल, CJI को खुला पत्र
केरल के वायनाड में कल्लाडी सुरंग निर्माण स्थल पर हुए भूस्खलन में सात लोगों की मौत के बाद अनक्कमपोयिल-कल्लाडी-मेप्पाडी सुरंग परियोजना को मिली पर्यावरण और वन मंजूरियों पर सवाल उठने लगे हैं। सेव वेटलैंड्स इंटरनेशनल मूवमेंट (SWIM) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी थॉमस लॉरेंस ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को खुला पत्र लिखकर परियोजना को दी गई मंजूरियों की स्वतंत्र जांच और जिम्मेदार अधिकारियों व विशेषज्ञों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
पत्र में आरोप लगाया गया है कि परियोजना की पर्यावरणीय मंजूरी बिना पर्याप्त जमीनी अध्ययन के दी गई और पश्चिमी घाट के भूस्खलन जोखिम को नजरअंदाज किया गया। यह भी दावा किया गया है कि पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) रिपोर्ट उसी संस्था ने तैयार की, जो परियोजना का क्रियान्वयन भी कर रही है, जिससे हितों का टकराव पैदा हुआ। पत्र में सुप्रीम कोर्ट से परियोजना का निर्माण तत्काल रोकने, पर्यावरणीय मंजूरियों की निष्पक्ष जांच कराने और पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में निर्माण कार्यों के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की गई है।