क्लाइमेट फाइनेंस को कॉप31 एजेंडे में शामिल करने की मांग तेज
बॉन में चल रही जलवायु वार्ता के दौरान विकासशील देशों ने कॉप31 सम्मेलन के एजेंडे में क्लाइमेट फाइनेंस (जलवायु वित्त) पर विशेष वर्क प्रोग्राम शामिल करने की मांग की है। 130 से अधिक देशों का प्रतिनिधित्व करने वाले जी-77 समूह और चीन ने मसौदे के एजेंडे में इस मुद्दे को जगह नहीं मिलने पर निराशा जताई। विकासशील देशों का कहना है कि विकसित देशों को पेरिस समझौते के तहत क्लाइमेट एक्शन के लिए वित्तीय सहायता देने की अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
बैठक में यह भी चिंता जताई गई कि जलवायु वित्त उपलब्ध कराने की रफ्तार घट रही है। 'लॉस एंड डैमेज फंड', 'ग्रीन क्लाइमेट फंड' और 'एडाप्टेशन फंड' जैसे प्रमुख कोषों में अपेक्षित धनराशि नहीं आ रही है। विकसित देशों ने कहा कि जलवायु वित्त जुटाने के लिए सरकारों के साथ-साथ निवेशकों, डेवलपमेंट बैंकों और निजी क्षेत्र की भी बड़ी भूमिका होगी।
अगले चार सालों में 1.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा पार हो सकती है: रिपोर्ट
बॉन जलवायु सम्मेलन में जारी एक नई रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि ग्लोबल वार्मिंग अगले लगभग चार सालों में 1.5 डिग्री सेल्सियस की महत्वपूर्ण सीमा को पार कर सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, मानव गतिविधियों के कारण 2025 तक वैश्विक तापमान में 1.37 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हो चुकी है। वैज्ञानिकों ने बताया कि 2024 में ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन रिकॉर्ड 56.8 अरब टन तक पहुंच गया। इसका मुख्य कारण कोयला, तेल और गैस जैसे जीवाश्म ईंधनों का उपयोग है।
रिपोर्ट में पृथ्वी के 'ऊर्जा असंतुलन' पर भी चिंता जताई गई है। इसका मतलब है कि पृथ्वी अंतरिक्ष में जितनी ऊर्जा वापस भेजती है, उससे अधिक ऊर्जा अवशोषित कर रही है। इससे महासागरों, धरती और ध्रुवीय क्षेत्रों में तेजी से गर्मी बढ़ रही है।
जलवायु संकट से निपटना मानवता की सबसे कठिन चुनौती: साइमन स्टील
बॉन में चल रही संयुक्त राष्ट्र की मध्य-वर्षीय जलवायु वार्ता के उद्घाटन पर संयुक्त राष्ट्र के जलवायु प्रमुख साइमन स्टील ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से निपटना मानवता के सामने अब तक की सबसे कठिन, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण चुनौती है। उन्होंने देशों से अपील की कि वे पहले से किए गए वादों और समझौतों पर दोबारा बहस करने में समय बर्बाद न करें। स्टील ने कहा कि जलवायु संकट तेजी से बढ़ रहा है और कार्रवाई में देरी की गुंजाइश नहीं है।
इस बीच, ऑस्ट्रेलिया के जलवायु और ऊर्जा मंत्री क्रिस बोवेन ने कहा कि देशों को कोयला, तेल और गैस जैसे जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करनी होगी। वहीं, यूरोपीय संघ नवंबर में होने वाले कॉप 31 सम्मेलन के लिए अधिक केंद्रित और रणनीतिक वार्ता की तैयारी कर रहा है।
भारत के 82% असंगठित श्रमिक खतरनाक गर्मी की चपेट में: यूएनईपी
यूनाइटेड नेशंस एनवायरमेंट प्रोग्राम (यूएनईपी) की कार्यकारी निदेशक इंगेर एंडरसन ने कहा है कि बढ़ती गर्मी से भारत के शहरों में रहना कठिन होता जा रहा है और इसका सबसे बड़ा असर असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं तथा बच्चों पर पड़ रहा है। विश्व पर्यावरण दिवस पर पीटीआई को दिए एक साक्षात्कार में एंडरसन ने कहा कि कंस्ट्रक्शन लेबर, रेहड़ी-पटरी विक्रेता और खेतिहर मजदूर अत्यधिक गर्मी के कारण स्वास्थ्य और आजीविका, दोनों स्तरों पर खतरे का सामना कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि भारत के असंगठित क्षेत्र के लगभग 82 प्रतिशत श्रमिक खतरनाक गर्मी में काम करते हैं। एंडरसन के अनुसार, गर्मी से होने वाली मौतें बाढ़, तूफान और जंगल की आग से होने वाली कुल मौतों से भी अधिक हैं। उन्होंने हीट एक्शन प्लान, कूल रूफ, हरित क्षेत्र, पेयजल, छायादार विश्राम स्थल और समयबद्ध कार्य व्यवस्था जैसे उपायों को बढ़ावा देने पर जोर दिया।