सेंट्रल रिज में ‘थीम पार्क’ योजना पर विवाद, दिल्ली के ‘ग्रीन लंग्स’ पर खतरे की चेतावनी
दिल्ली के सेंट्रल रिज क्षेत्र में ‘थीम-आधारित स्पेशल फॉरेस्ट’ विकसित करने की योजना के तहत
दिल्ली के सेंट्रल रिज क्षेत्र में ‘थीम-आधारित स्पेशल फॉरेस्ट’ विकसित करने की योजना के तहत
कत्था व्यापार से होने वाले भारी मुनाफे और भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से उत्तर प्रदेश के सुहेलवा वन्यजीव अभयारण्य में बड़े पैमाने पर खैर पेड़ों की अवैध कटाई जारी है, जिससे इस अभयारण्य समेत कई अन्य वन धीरे-धीरे विनाश की कगार पर हैं।
भारत में वनों की कटाई अब छुपी नहीं बल्कि सार्वजनिक दृष्टि में हो रही है।
सुप्रीम कोर्ट में 2 अप्रैल, 2025 को एक याचिका पर सुनवाई होनी है जिसमें वन
सरकार की नई रिपोर्ट में फॉरेस्ट और ट्री कवर बढ़ा है लेकिन जैव विविधता को लेकर जानकारों की चिन्ता बरकरार है क्योंकि वह स्वस्थ और विविधतापूर्ण जंगल और पारिस्थितिकी का सूचक है।
वन क्षेत्रों में हाइड्रोपावर परियोजनाओं के प्रोजेक्ट सर्वे के लिए ड्रिलिंग और 100 पेड़ों तक
उत्तराखंड में अनियंत्रित जंगलों की आग के लिए अक्सर चीड़ को जिम्मेदार ठहराया जाता है। लेकिन फायर लाइनों का अभाव, वन कर्मचारियों और आग से लड़ने के लिए संसाधनों की कमी, और क्लाइमेट चेंज के कारण बढ़ता तापमान और शुष्क मौसम भी इसके लिए जिम्मेदार है। इस समस्या के स्थाई समाधान के लिए यह स्वीकार करना जरूरी है।
मध्य भारत के छत्तीसगढ़ में हसदेव अरण्य के जंगलों को बचाने के लिये चल रहे
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क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने घोषणा की है कि लद्दाख को राज्य का दर्जा देने