साफ़ ऊर्जा पर मिली सब्सिडी कुल सब्सिडी का 10% से भी कम: रिपोर्ट

इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट (आईआईएसडी) ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि भारत ने पिछले साल ऊर्जा सब्सिडी पर 3.2 लाख करोड़ रुपए खर्च किए। लेकिन नवीकरणीय ऊर्जा के लिए सब्सिडी इस राशि का केवल 10 प्रतिशत थी। कुल मिलाकर, जीवाश्म ईंधन पर दी गई सब्सिडी, स्वच्छ ऊर्जा पर दी गई सब्सिडी से पांच गुना अधिक थी।

12 मार्च को जारी इस रिपोर्ट में कहा गया है कि ऊर्जा सब्सिडी नौ साल के उच्चतम स्तर पर रही। हालांकि इसमें कहा गया है कि पिछले एक दशक में जीवाश्म ईंधन पर दी जाने वाली सब्सिडी 59% घटी है, लेकिन रूस-यूक्रेन युद्ध से उत्पन्न ऊर्जा संकट के कारण भारत सभी ऊर्जा स्रोतों के उपयोग को बढ़ावा दे रहा है। 

साल 2023 में स्वच्छ ऊर्जा और जीवाश्म ईंधन दोनों पर दी जाने वाली सब्सिडी में लगभग 40% की वृद्धि हुई, हालांकि नवीकरणीय ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहनों पर सब्सिडी में बढ़ोत्तरी थोड़ी तेज थी। पिछले साल भारत की नवीकरणीय ऊर्जा सब्सिडी बढ़कर 14,843 करोड़ रुपए हो गई, जो वित्त वर्ष 2022 की तुलना में 8% अधिक है। हालांकि, इस दौरान जीवाश्म ईंधन पर जो सब्सिडी दी गई, उसकी तुलना में ये इज़ाफ़ा भी काफी कम था।

कुल ऊर्जा सब्सिडी में स्वच्छ ऊर्जा सब्सिडी की हिस्सेदारी 10% से भी कम रही, जबकि कोयला, तेल और गैस पर दी गई सब्सिडी की हिस्सेदारी लगभग 40% थी। शेष सब्सिडी का अधिकांश हिस्सा बिजली की खपत के लिए था, खासकर कृषि में।

3.2 गीगावॉट के साथ ओपन एक्सेस सौर क्षमता में रिकॉर्ड वृद्धि

एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने 2023 के दौरान रिकॉर्ड 3.2 गीगावाट ओपन एक्सेस सौर क्षमता जोड़ी, जो पिछले साल के मुकाबले 6.66 प्रतिशत अधिक है। इसके पीछे मॉड्यूल की कीमतों में कमी जैसे कई कारण बताए जा रहे हैं।

ओपन एक्सेस सौर ऊर्जा एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें उत्पादक उपभोक्ताओं को हरित ऊर्जा की आपूर्ति करने के लिए सोलर प्लांट स्थापित करते हैं।

मेरकॉम की रिपोर्ट में कहा गया है कि एक साल में ओपन एक्सेस सौर क्षमता यह रिकॉर्ड वृद्धि है, और दिसंबर 2023 तक कुल क्षमता 12.2 गीगावॉट तक पहुंच गई।

इसमें 33.1% के साथ पहला स्थान पर कर्नाटक है, दूसरे पर महाराष्ट्र (13.5%) और तीसरे पर तमिल नाडु (11.4%)। 

देश की आधे से अधिक नवीकरणीय क्षमता 4 राज्यों तक सीमित: केंद्र

केंद्र सरकार द्वारा 14 मार्च को जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, देश की आधे से अधिक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता चार राज्यों में सीमित है। इसमें राजस्थान की हिस्सेदारी सबसे अधिक है, इसके बाद महाराष्ट्र, गुजरात और कर्नाटक का नंबर आता है।

‘एनर्जी स्टेटिस्टिक्स 2024’ में सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने कहा है कि “नवीकरणीय ऊर्जा की अनुमानित क्षमता के भौगोलिक वितरण से पता चलता है कि राजस्थान की हिस्सेदारी सबसे अधिक लगभग 20.3% है।” महाराष्ट्र, गुजरात और कर्नाटक की हिस्सेदारी 32% है।

वित्त वर्ष 2023 में भारत ने 2,109.7 गीगावाट की कुल अनुमानित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का केवल 8% उपयोग किया था। 2030 तक भारत स्थापित नवीकरणीय क्षमता को बढ़ाकर 500 गीगावाट करना चाहता है। उस समय तक देश अपनी सौर ऊर्जा क्षमता का लगभग 40% और पवन ऊर्जा क्षमता का 10% उपयोग करेगा।

भारत की स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता 56% बढ़ी

भारत ने 2023 में 2.8 गीगावाट अतिरिक्त पवन ऊर्जा क्षमता स्थापित की, जो 2022 में की गई 1.8 गीगावाट से लगभग 56% अधिक है। दिसंबर 2023 तक संचयी पवन क्षमता 44.7 गीगावाट रही, जबकि 2022 के अंत में यह 41.9 गीगावाट थी।

मेरकॉम इंडिया रिसर्च के अनुसार, 2023 की चौथी तिमाही (Q4) में भारत ने 552 मेगावाट की पवन ऊर्जा क्षमता जोड़ी, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 141% अधिक है।

वहीं पिछली तिमाही, यानि Q3 के मुकाबले Q4 में इंस्टॉलेशन में 34% की वृद्धि हुई।

नवीकरणीय ऊर्जा की बढ़ती मांग के कारण देश भर में पवन-सौर हाइब्रिड परियोजनाओं में भी वृद्धि हुई है।

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