प्रदूषण के लिए राजस्थान के छबड़ा थर्मल पावर स्टेशन को मिला नोटिस

राजस्थान में एक और सरकारी थर्मल पावर प्लांट को पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हुए पाया गया है और कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। झालावाड़ जिले में कालीसिंध थर्मल पावर प्लांट पर जुर्माना लगाए जाने के लगभग एक महीने बाद, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (आरएसपीसीबी) ने बारां जिले में छबड़ा थर्मल पावर स्टेशन  के खिलाफ का यह कदम उठाया है।

‘पॉल्यूटर पे प्रिंसिपल’ (यह सिद्धांत कि प्रदूषण नियंत्रित करने का खर्च प्रदूषक को वहन करना चाहिए) के अनुसार, आरएसपीसीबी ने अनुमान लगाया है कि सीटीपीएस पर 2.01 करोड़ रुपए का पर्यावरणीय मुआवजा लगाया जाना है। पावर स्टेशन के निरीक्षण के बाद, आरएसपीसीबी टीम ने बताया कि इकाई जल अधिनियम, 1974 के प्रावधानों का पालन करने में गंभीर रूप से विफल रही।  साथ ही वायु अधिनियम, 1981; पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986; और 2006 की ईआईए अधिसूचना, जिसे बोर्ड द्वारा अत्यंत गंभीरता से देखा जाता है, का पालन करने में भी विफल रही।  

देश के कई शहरों में हवा दमघोंटू

हमारे देश के कुछ शहरों की हवा बहुत प्रदूषित है और सांस लेना मुश्किल है। अगरतला, चंद्रपुर, गुरुग्राम, गुवाहाटी, नलबाड़ी और रूपनगर में वायु प्रदूषण गंभीर है। इन शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 200 से ऊपर है और 251 एक्यूआई के साथ चंद्रपुर की स्थिति सबसे खराब है।

इसी तरह देश के 119 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है। 13 शहर ऐसे हैं जहां हवा साफ है और प्रदूषण का स्तर 50 या उससे नीचे है। वाराणसी में 24 अंक के साथ भारत में सबसे स्वच्छ हवा है। संतोषजनक वायु गुणवत्ता वाले शहरों का आंकड़ा 115 दर्ज किया गया था। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 08 मार्च 2024 को जारी रिपोर्ट के मुताबिक, देश के 251 में से 13 शहरों में हवा ‘बेहतर’ (0-50 के बीच) रही। वहीं 113 शहरों में वायु गुणवत्ता ‘संतोषजनक’ (51-100 के बीच) है, गौरतलब है कि 07 मार्च 2024 यह आंकड़ा 115 दर्ज किया गया था। 119 शहरों में वायु गुणवत्ता ‘मध्यम’ (101-200 के बीच) रही।

हाइकोर्ट ने कहा की झारखंड में ध्वनि प्रदूषण की शिकायत के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी करे सरकार

रांची शहर में ध्वनि प्रदूषण की बढ़ती समस्या के बीच, झारखंड उच्च न्यायालय ने हाल ही में एक जनहित याचिका की अध्यक्षता की। मामले की सुनवाईं के बाद, न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय और न्यायमूर्ति दीपक रोशन की खंडपीठ ने राज्य सरकार को ध्वनि प्रदूषण से प्रभावित व्यक्तियों के लिए 24 घंटे की हेल्पलाइन स्थापित करने का निर्देश दिया। विशेष रूप से रात्रि 10:30 बजे के बाद लोग हेल्पलाइन नंबर पर अपनी शिकायत कर सके तथा ध्वनि प्रदूषण से मुक्ति पा सकें।  इसके अलावा, सरकार को ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिए जनता को शिक्षित करने और जागरूकता फैलाने में सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता अभियान शुरू करने का काम सौंपा गया था।

याचिका दायर कर कहा गया है कि रात 10.30 बजे के बाद बैंक्वेट हॉल, धर्मशाला और मैरिज हॉल में लाउडस्पीकर और डीजे के साथ जुलूस निकालने से ध्वनि प्रदूषण हो रहा है और इसे रोका जाना चाहिए। कोर्ट ने पहले एक आदेश जारी कर रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर या डीजे के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी और इस नियम का उल्लंघन करने वालों को परिणाम भुगतना होगा। हालाँकि, धार्मिक त्योहारों के दौरान आधी रात तक लाउडस्पीकर बजाने की अनुमति तभी दी जा सकती है, जब जिला प्रशासन से अनुमति ली गई हो।

बेहतर वायु गुणवत्ता आत्महत्या दर में कमी से जुड़ी है: अध्ययन

चीन में किए गए एक अध्ययन के अनुसार, वायु प्रदूषण का स्तर कम होने से आत्महत्या की दर कम हो सकती है। कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय, सांता बारबरा के शोधकर्ताओं का अनुमान है कि वायु प्रदूषण को कम करने के चीन के प्रयासों ने केवल पाँच वर्षों में देश में 46,000 आत्महत्या से होने वाली मौतों को रोका है। टीम ने प्रदूषण और आत्महत्या दर को प्रभावित करने वाले जटिल कारकों को अलग करने के लिए मौसम की स्थिति का उपयोग किया, और इस निष्कर्ष  पर पहुंचे की यह वास्तव में कारण संबंध हैं।

 शोध दल ने पहले भारत में आत्महत्या की दर पर तापमान के प्रभाव का अध्ययन किया था, जिसमें पाया गया कि अत्यधिक गर्मी उन दरों को बढ़ाती है। टीम यह जानने के लिए उत्सुक थी कि चीन में आत्महत्या की दर दुनिया के बाकी हिस्सों की तुलना में कहीं अधिक तेजी से गिरी है। शोधकर्ताओं ने कहा कि 2000 में, देश की प्रति व्यक्ति आत्महत्या दर वैश्विक औसत से अधिक थी, लेकिन दो दशक बाद यह उस औसत से नीचे आ गई है, जिसमें गिरावट आ रही है। उन्होंने कहा कि साथ ही, वायु प्रदूषण का स्तर भी कम हो रहा था।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.