चुनौती बरकरार: ई मोबिलिटी की मुहिम में सबसे बड़ी अड़चन महंगी बैटरियां और व्यापक चार्जिंग नेटवर्क का उपलब्ध न होना हैं फोटो: IndianExpress

आर्थिक सर्वे ने गिनाईं EV की अड़चनें, नीति आयोग का कड़ा रुख बरकरार

ताज़ा आर्थिक सर्वे ने उन कारणों को गिनाया जो बैटरी वाहनों की राह में अड़चन हैं। पिछली 4 जुलाई को संसद में पेश किये गये सर्वे में चार्जिंग स्टेशनों की कमी, बैटरियों के ऊंचे दाम और वाहनों की चार्जिंग में लगने वाला समय 3 प्रमुख कारण गिनाये गये हैं। सर्वे में कहा गया है कि देश भर में फास्ट चार्जिंग नेटवर्क फैलाने के लिये निवेश किया जाना चाहिये। सरकार ने बजट में निजी इस्तेमाल के लिये बैटरी कारों की खरीद पर डेढ़ लाख रुपये तक रकम को टैक्स फ्री करने का फैसला किया है। 

उधर नीति आयोग ने ऑटो निर्माताओं की उस मांग को नहीं माना जिसमें ई-मोबिलिटी के लिये बाज़ार की मांग का खयाल रखते हुये व्यवहारिक रास्ता अख्तियार करने की अपील की गई थी। आयोग ने पिछली महीने दुपहिया ऑटो निर्माताओं को दो हफ्ते के भीतर 100% बैटरी वाहन उत्पादन का रोडमैप पेश करने का वक्त दिया। 

दिल्ली में आयेंगी 1000 बैटरी बसें, केरल में 10 लाख EV  

दिल्ली परिवहन निगम (DTC) राजधानी में 1000 इलैक्ट्रिक बसें उतारेगा। दिल्ली की सड़कों पर बैटरी बसों की यह सप्लाई केजरीवाल सरकार के 1000 बैटरी बसें खरीदने की योजना के अलावा है।

उधर केरल सरकार ने फैसला किया है कि वह 2022 तक राज्य में कुल 10 लाख बैटरी वाहन सड़कों पर उतारेगी। इनमें 3000 बैटरी बसें और 2 लाख दुपहिया वाहन होंगे। इसके अलावा 1000 मालवाहक बैटरी वाहन भी खरीदे जायेंगे। राज्य सरकार ने राजधानी त्रिवेंद्रम में साल भर के भीतर 100% बैटरी चालित पब्लिक ट्रांसपोर्ट का लक्ष्य रखा है। उधर आंध्र प्रदेश करीब 770 करोड़ की लागत से अपने 5 शहरों में कोई 350 बैटरी बस लाने की सोच रहा है।

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