एक बिलियन टन: भारत का ‘ऐतिहासिक’ कोयला और लिग्नाइट उत्पादन

मीडिया में प्रकाशित ख़बरों के मुताबिक भारत ने एक अरब टन (एक बिलियन) कोयला और लिग्नाइट उत्पादन के लक्ष्य को पार कर लिया है। बीती 22 मार्च को भारत इस लक्ष्य के पार पहुंचा। पिछले साल के मुकाबले इस साल यह उत्पादन 6.7% अधिक है। इसके अतिरिक्त भारत ने कोयला उत्पादन में पिछले वित्त वर्ष 2022-23 के प्रोडक्शन 937.22 मिलयन को भी इस साल तय समय से 25 दिन पहले ही पार कर लिया। कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि एक बिलियन टन कोयला और लिग्नाइट उत्पादन एक “एतिहासिक उपलब्धि” है। 

पिछले साल मार्च में कोयले का मासिक उत्पादन पहली बार 100 मिलियन टन पार कर गया था और दिसंबर में सरकार ने उम्मीद जताई थी कि देश में कोयले का कुल उत्पादन एक बिलियन टन पार कर जायेगा और वित्त वर्ष 2025 तक बिजली उत्पादन के लिये  आयात होने वाले कोयले की मात्रा 2 प्रतिशत कम हो जायेगी।

बंद हो गई खदानें रेवेन्यू शेयरिंग मोड के तहत निजी क्षेत्र को देने का प्रस्ताव: कोयला सचिव 

कोयला सचिव अमृत लाल मीणा के मुताबिक सरकार राजस्व साझाकरण व्यवस्था (रेवेन्यू शेयरिंग अरेंजमेंट) के तहत ऐसी खदानों को निजी कंपनियों को देने की इच्छुक है जो या तो बंद हो गई हैं, या उनसे कोयला उत्पादन नहीं किया जा रहा।  सरकार ने ऐसी खदानों का आकलन किया है और देश में लगभग ऐसी 225 माइंस हैं। 

कोयला सचिव ने कहा, “हमारा प्रयास है कि जहां कहीं भी (कोयला) भंडार हैं, भले ही कोल इंडिया के लिये कोयला निकलना व्यवहारिक न हो, उसे राजस्व साझाकरण मोड के तहत निजी क्षेत्र को प्रस्तावित किया जाये। निजी क्षेत्र की इसमें रुचि है। इसलिये हम उन बन्द या परित्यक्त खदानों को निजी क्षेत्र को देने के लिये तैयार हैं, जो उन्हें लेने, कोयला उत्पादन के लिये खदानों का संचालन करने और राजस्व को साझा करने के लिये लिये तैयार हो।”

सरकार का कहना है कि जिन बंद खदानों का कोई खरीदान नहीं मिलेगा, उन्हें समयबद्ध तरीके से अंतिम रूप से बंद करने की योजना बनाई जायेगी। अभी 225 खदानों में से कोल इंडिया ने 69 की पूरी तरह से बंद करने के लिये पहचान की है।  

जीवाश्म ईंधन सब्सिडी पर अमेरिका और यूरोप में मतभेद 

दुनिया के सबसे अमीर देशों में तेल और गैस उत्पादन क्षेत्र में सब्सिडी को लेकर गहरा मतभेद है। अंग्रेज़ी अख़बार फाइनेंसियल टाइम्स के मुताबिक ओईसीडी सदस्य देशों ने पेरिस में दूसरे दौर की वार्ता आयोजित की जिसमें यूके और यूरोपियन यूनियन द्वारा तेल, गैस और कोयला खनन प्रोजेक्ट्स – जो उद्योगों के लिये विदेशी मुद्रा का सबसे बड़ा स्रोत हैं –   को मिलने वाले क्रेडिट एजेंसी ऋण और गारंटी को रोकने की बात कही गई है। 

इस रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका अब भी यूरोपीय यूनियन के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है और  इस साल जून और नवंबर में इस बारे में बैठकें होंगी। यूरोपीय यूनियन का प्रस्ताव है कि विदेशी क्रेडिट एजेंसियां तभी किसी जीवाश्म ईंधन प्रोजेक्ट का समर्थन करें जब ओईसीडी ग्रुप का हर सदस्य देश आश्वस्त हों कि वह प्रोजेक्ट तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री से कम रखने की शर्तों को पूरा करता है। 

इसके अलावा यूरोपीय यूनियन एक नया पारदर्शिता नियम लागू कर रहा है जिसके तहत देशों को जीवाश्म ईंधन प्रोजेक्ट में निवेश की सारी सूचना देनी होगी।

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