दुनिया अभी कोविड-19 महामारी की यादों से पूरी तरह उबर भी नहीं पाई है कि अब ‘हंटावायरस’ को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हाल के दिनों में एक क्रूज़ जहाज़ MV Hondius पर हंटावायरस संक्रमण के कई मामले सामने आए हैं, जिनमें कुछ मौतें भी हुई हैं। इसी जहाज़ पर दो भारतीय नागरिक भी मौजूद थे। इसके बाद भारत सरकार और स्वास्थ्य एजेंसियां सतर्क हो गई हैं।
हालांकि विशेषज्ञ साफ कह रहे हैं कि फिलहाल भारत में घबराने जैसी स्थिति नहीं है और यह वायरस कोविड की तरह तेजी से फैलने वाला नहीं माना जाता।
क्या है हंटावायरस?
हंटावायरस एक वायरस समूह है जो मुख्य रूप से चूहों और दूसरे रोडेंट प्रजातियों में पाया जाता है। यह वायरस आमतौर पर संक्रमित चूहों के मूत्र, लार या मल के संपर्क में आने से इंसानों तक पहुंचता है। विशेषज्ञों के मुताबिक बंद और कम हवादार जगहों — जैसे गोदाम, जहाज़, खलिहान या स्टोर रूम — में संक्रमित कण हवा में मिल सकते हैं और सांस के जरिए शरीर में पहुंच सकते हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार MV Hondius नामक डच क्रूज़ जहाज़ पर अब तक आठ मामले सामने आए हैं, जिनमें छह लैब से पुष्टि किए गए केस हैं और तीन लोगों की मौत हुई है। इन मामलों में ‘एंडीज वायरस’ (Andes virus) स्ट्रेन मिला है।
यह स्ट्रेन इसलिए चर्चा में है क्योंकि हंटावायरस के अधिकांश प्रकार इंसान से इंसान में नहीं फैलते, लेकिन एंडीज वायरस में सीमित मानव-से-मानव संक्रमण की क्षमता देखी गई है। हालांकि इसके लिए बहुत करीबी और लंबे समय तक संपर्क जरूरी माना जाता है।
अर्जेंटीना के लैंडफिल से जुड़ी हालिया मामलों की कड़ी
हंटावायरस के हालिया मामलों की कड़ी दक्षिण अमेरिका की यात्रा पर निकले डच पक्षी-विज्ञानी (ऑर्निथोलॉजिस्ट) लियो शिलपेरूर्ड और उनकी पत्नी मिरजाम से जुड़ी बताई जा रही है। रिपोर्टों के मुताबिक दोनों अर्जेंटीना के उशुआइया शहर के बाहर एक बड़े लैंडफिल (कचरा-स्थल) पर दुर्लभ पक्षी डार्विन्स काराकारा को देखने गए थे। माना जा रहा है कि वहीं उन्होंने संक्रमित चूहों के मल से निकले सूक्ष्म कण सांस के जरिए भीतर ले लिए, जिससे एंडीज स्ट्रेन का संक्रमण हुआ। बाद में दोनों की मौत हो गई।
विशेषज्ञ लंबे समय से चेतावनी देते रहे हैं कि जलवायु परिवर्तन, बढ़ता कचरा, जंगलों में मानवीय दखल और बदलते मौसम चूहों जैसे वायरस वाहक जीवों की संख्या और उनके फैलाव को प्रभावित कर सकते हैं। इससे इंसानों और वन्यजीवों के बीच संपर्क बढ़ता है और ऐसे संक्रमणों का खतरा भी बढ़ सकता है।
क्या कर रही है भारत सरकार?
भारत के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एहतियाती निगरानी (precautionary surveillance) शुरू कर दी है। सरकार इस मामले पर WHO, नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC) और इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम (IDSP) के साथ मिलकर नजर रख रही है। सरकार ने उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक भी की है ताकि देश की तैयारी और निगरानी व्यवस्था की जांच की जा सके।
आईसीएमआर के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) के निदेशक डॉ नवीन कुमार ने कहा है कि अभी भारत के लिए कोई ‘तत्कालिक पब्लिक हेल्थ रिस्क’ नहीं है। उन्होंने कहा कि फिलहाल सामुदायिक संक्रमण (community spread) का कोई संकेत नहीं मिला है।
क्या यह कोविड जैसी महामारी बन सकता है?
फिलहाल वैज्ञानिक और डब्ल्यूएचओ दोनों मान रहे हैं कि इसकी संभावना बहुत कम है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि हंटावायरस कोविड-19 की तरह आसानी से हवा में फैलने वाला वायरस नहीं माना जाता।
डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि वैश्विक स्तर पर खतरा ‘कम’ है।
विशेषज्ञों के अनुसार:
- यह वायरस मुख्य रूप से चूहों से फैलता है।
- इंसान से इंसान में संक्रमण बेहद सीमित है।
- संक्रमण के लिए करीबी और लंबे संपर्क की जरूरत होती है।
- अभी तक व्यापक सामुदायिक फैलाव नहीं देखा गया है।
यही कारण है कि इसे अभी ‘अगला कोविड’ मानना जल्दबाजी होगी।
हंटावायरस के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे हो सकते हैं:
- तेज बुखार
- बदन दर्द
- थकान
- सिरदर्द
- मांसपेशियों में दर्द
गंभीर मामलों में सांस लेने में दिक्कत, फेफड़ों में संक्रमण और किडनी संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
अभी हंटावायरस के लिए कोई स्वीकृत वैक्सीन या विशेष दवा उपलब्ध नहीं है। डॉक्टर मुख्य रूप से मरीज को सहायक उपचार (supportive care) देते हैं, जैसे ऑक्सीजन, आईसीयू देखभाल और सांस संबंधी सहायता।
आम लोगों को क्या सावधानी रखनी चाहिए?
विशेषज्ञों के मुताबिक सामान्य लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सफाई और चूहों से बचाव जरूरी है।
- घर और गोदाम साफ रखें
- चूहों की संख्या नियंत्रित रखें
- बंद जगहों को हवादार बनाएं
- चूहों के मल-मूत्र को बिना सुरक्षा सीधे हाथ न लगाएं
- सफाई करते समय मास्क और दस्ताने इस्तेमाल करें
फिलहाल हंटावायरस को लेकर दुनिया में सतर्कता जरूर बढ़ी है, लेकिन इसे कोविड जैसी वैश्विक महामारी मानना अभी सही नहीं होगा। स्वास्थ्य एजेंसियां लगातार हालात पर नजर रखे हुए हैं।
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