भारत ने सौर ऊर्जा के सहारे पूरी की रिकॉर्ड बिजली मांग

भारत ने 25 अप्रैल को 256 गीगावॉट (GW) की रिकॉर्ड बिजली मांग को सौर ऊर्जा की सहयता से पूरा किया। यह एक दिन में अब तक का सबसे अधिक बिजली उपयोग था। इस दौरान सौर ऊर्जा का बड़ा योगदान रहा। दोपहर 3:38 बजे जब मांग सबसे ज्यादा थी, तब सौर ऊर्जा ने 57 GW यानी करीब 22% बिजली दी। दोपहर 12,30 बजे सौर उत्पादन 81 GW तक पहुंच गया, जो कुल बिजली उत्पादन का लगभग एक-तिहाई था। विशेषज्ञों का कहना है कि सौर ऊर्जा के बढ़ते इस्तेमाल से बिजली आपूर्ति मजबूत हुई है, खासकर गर्मियों में जब एसी और कूलर के कारण मांग तेजी से बढ़ती है। इससे कोयले पर निर्भरता भी धीरे-धीरे कम हो सकती है।

स्वच्छ ऊर्जा बढ़ी, फिर भी कोयला हावी

एक नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 2025 में स्वच्छ ऊर्जा (सौर, पवन, जल और बायोएनर्जी) से बिजली उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि हुई। यह बढ़ोतरी 98 टेरावॉट-घंटे (TWh) रही, जो 2022 के पिछले रिकॉर्ड से दोगुनी है। सौर और पवन ऊर्जा में सबसे ज्यादा बढ़त दर्ज की गई। सौर ऊर्जा 37% और पवन ऊर्जा 28% बढ़ी। इसके कारण कोयले से बनने वाली बिजली में थोड़ी कमी भी आई।

फिर भी कोयला अब भी भारत की बिजली का मुख्य स्रोत बना हुआ है और 71% बिजली इसी से बनती है। विशेषज्ञों का कहना है कि सौर ऊर्जा और बैटरी स्टोरेज भविष्य में 24 घंटे स्वच्छ बिजली देने में मदद कर सकते हैं, लेकिन अभी कोयले की भूमिका बड़ी बनी हुई है।

चीनी सोलर निर्यात में रिकॉर्ड उछाल

चीन ने मार्च 2026 में सोलर पैनल का रिकॉर्ड 68 गीगावॉट निर्यात किया, जो फरवरी के मुकाबले दोगुना है। यह अब तक का सबसे बड़ा मासिक निर्यात है। इस बढ़ोतरी के पीछे वैश्विक ऊर्जा संकट और चीन में टैक्स नियमों में बदलाव को कारण माना गया है। 1 अप्रैल से निर्यात पर लागत बढ़ने वाली थी, इसलिए पहले ही ज्यादा खरीद हुई।

एशिया और अफ्रीका में सोलर की मांग सबसे ज्यादा बढ़ी। भारत, मलेशिया और लाओस में तेजी से आयात बढ़ा, जबकि अफ्रीका में नाइजीरिया, केन्या और इथियोपिया ने पहली बार एक महीने में 1 गीगावाट से ज्यादा सोलर उपकरण खरीदे। विशेषज्ञों का कहना है कि महंगी ऊर्जा के बीच देश तेजी से सौर ऊर्जा की ओर बढ़ रहे हैं।

पवन ऊर्जा में चीन-भारत की बढ़त

दुनिया में 2025 में पवन ऊर्जा की क्षमता में तेज बढ़ोतरी हुई। कुल क्षमता बढ़कर 1,299 गीगावॉट हो गई। इसमें चीन और भारत की बड़ी भूमिका रही। चीन ने अकेले 120 गीगावाट नई क्षमता जोड़ी, जो दुनिया के कुल नए जोड़ के बराबर है। वहीं भारत ने 6.3 गीगावाट नई पवन क्षमता जोड़ी, जो पिछले साल से 85% ज्यादा है। एशिया में दुनिया की 80% नई पवन परियोजनाएं शुरू हुईं। भारत सरकार ने 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा का लक्ष्य रखा है, जिसमें 100 गीगावाट पवन ऊर्जा से आने की योजना है। रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले वर्षों में भारत में पवन ऊर्जा तेजी से बढ़ेगी, खासकर तटीय राज्यों में।

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