उबलता भारत: यूपी का बांदा बना दुनिया का सबसे गर्म शहर, ऐप-आधारित परिवहन कर्मियों ने मांगी हीट राहत

भारत इस समय ‘दुनिया का हीट सेंटर’ बन गया है, जहां रियल-टाइम वैश्विक तापमान रैंकिंग के अनुसार दुनिया के 100 सबसे गर्म शहरों में से 95 भारत में स्थित हैं। मौसम विभाग के मुताबिक, उत्तर प्रदेश का बांदा 27 अप्रैल को देश का सबसे गर्म स्थान रहा, जहां अधिकतम तापमान 47.6°C दर्ज किया गया — जो सामान्य से 5.4 डिग्री अधिक है।

AQI.in के 24 अप्रैल शाम 5 बजे के आंकड़ों के अनुसार, मध्य भारत से लेकर इंडो-गंगा के मैदानों तक दर्जनों शहरों में तापमान 40°C के पार पहुंच गया, जबकि कई स्थान 45°C के करीब पहुंच गए।

इस भीषण गर्मी का सबसे ज्यादा असर ऐप-आधारित डिलीवरी कर्मियों पर पड़ा है। ऐप-आधारित परिवहन श्रमिकों ने ‘कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी, 2020’ के तहत अनिवार्य हीटवेव सुरक्षा की मांग की है, जिसमें भुगतान सहित ब्रेक और पानी की उपलब्धता शामिल है। इंडियन फेडरेशन ऑफ ऐप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स (IFAT) ने सरकार से इन उपायों को लागू करने की अपील की है और अन्य देशों में ऐसे प्रावधानों का हवाला दिया है। बढ़ती गर्मी के बीच कंपनियों को डिलीवरी कर्मियों की कमी का सामना करना पड़ सकता है।

जनवरी 2026 में, श्रमिक यूनियनों के विरोध के बाद ब्लिंकिट, जेप्टो और स्विगी इंस्टामार्ट को अपने ब्रांडिंग से 10 मिनट डिलीवरी के वादे हटाने पड़े थे।

सुपर एल नीनो: भारत में भीषण गर्मी और कमजोर मानसून की आशंका

इस साल ‘सुपर एल नीनो’ के असर की आशंका जताई जा रही है, जिसे भारत के लिए चिंताजनक माना जा रहा है। यह एक जलवायु घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर का पानी असामान्य रूप से ज्यादा गर्म हो जाता है, जिससे दुनिया भर के मौसम पैटर्न बदल जाते हैं।

भारत में इसके कारण भीषण गर्मी और लंबी हीटवेव देखने को मिल सकती है। तापमान बढ़ने से हीटस्ट्रोक, डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी) और सांस से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। विशेषज्ञों ने बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।

सुपर एल नीनो मानसून को भी कमजोर कर सकता है। कम बारिश से सूखे की स्थिति बन सकती है, जिससे खेती और पानी की उपलब्धता प्रभावित होगी। इससे खाद्य उत्पादन घट सकता है और महंगाई बढ़ने का खतरा है। कुल मिलाकर, इसका असर मौसम, स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था तीनों पर पड़ सकता है।

हिंदूकुश हिमालय में 24 साल में सबसे कम बर्फ, जल संकट का खतरा: आईसीआईएमओडी रिपोर्ट

अंतरराष्ट्रीय केंद्र आईसीआईएमओडी की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार हिंदूकुश हिमालय (एचकेएच) क्षेत्र में बर्फ का स्तर पिछले दो दशकों से अधिक समय में सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। 2026 में बर्फ की स्थिरता सामान्य से 27.8% कम दर्ज की गई, जो लगातार चौथा साल है जब क्षेत्र में औसत से कम बर्फबारी हुई है।

रिपोर्ट बताती है कि 2003 से 2026 के बीच 24 वर्षों में अधिकांश सर्दियों में बर्फ सामान्य से कम रही, जो एक स्थायी ट्रेंड बनता जा रहा है।

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह गिरावट गंगा, सिंधु और ब्रह्मपुत्र जैसी प्रमुख नदियों के जल प्रवाह को प्रभावित कर सकती है। हिमपात से मिलने वाला पानी क्षेत्रीय नदी प्रवाह का बड़ा हिस्सा बनाता है, जिससे लगभग दो अरब लोगों की जल, कृषि और ऊर्जा सुरक्षा जुड़ी है।

जलवायु परिवर्तन को इस गिरावट का प्रमुख कारण बताया गया है, जिससे भविष्य में गंभीर जल संकट की आशंका बढ़ गई है।

अत्यधिक गर्मी से भारत के धान उत्पादन और किसानों पर खतरा: संयुक्त राष्ट्र रिपोर्ट

संयुक्त राष्ट्र की खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) और विश्व मौसम विज्ञान संगठन की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, हीटवेव भारत के किसानों और धान की फसल के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भविष्य में अत्यधिक गर्मी का सबसे ज्यादा असर गंगा और सिंधु नदी बेसिन के घनी आबादी वाले कृषि क्षेत्रों पर पड़ेगा।

संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि अत्यधिक गर्मी से प्रभावित क्षेत्रों में कृषि श्रम उत्पादकता 40% से नीचे गिर सकती है, जिससे भारत के धान उत्पादन और खाद्य सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है।

अगले 20 वर्षों में हर साल अतिरिक्त हीटवेव और भारी बारिश की 40 घटनाएं : सीईईडब्ल्यू का एआई अध्ययन

क्लाइमेट थिंक टैंक काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर (सीईईडब्ल्यू) के एआई-आधारित अध्ययन के अनुसार, अगले दो दशकों में भारत में हर साल 15 से 40 अतिरिक्त असामान्य रूप से गर्म दिन देखने को मिल सकते हैं। क्राविस (क्लाइमेट रेजिलिएंस एनालिटिक्स एंड विज़ुअलाइजेशन इंटेलिजेंस सिस्टम) नामक इस प्लेटफॉर्म के मुताबिक, देश के कई हिस्सों में हर साल 20 से 40 गर्म रातों की बढ़ोतरी हो सकती है।

एआई विश्लेषण के अनुसार, अगले 20 वर्षों में भारी बारिश की घटनाओं में भी लगातार वृद्धि होगी, जहां कई जिलों में हर साल 10 से 30 अतिरिक्त भारी बारिश के दिन दर्ज हो सकते हैं।

अध्ययन में पाया गया है कि महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु में गर्म दिनों और भारी वर्षा दोनों में अधिक वृद्धि देखने को मिलेगी।

क्राविस ने इन अनुमान को 40 वर्षों के जलवायु डेटा के आधार पर तैयार किया है और यह 2030-50 तथा 2051-70 तक के पूर्वानुमान उपलब्ध कराता है।

कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघिन और चार शावकों की मौत, वायरल संक्रमण की आशंका

मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में एक बाघिन और उसके चार शावकों की 10 दिनों के भीतर मौत से वन विभाग में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों को संदेह है कि इसके पीछे कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी) का प्रकोप हो सकता है।

वन विभाग के अनुसार, बाघिन और शावकों में श्वसन संबंधी समस्या और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल संक्रमण के लक्षण पाए गए, जो CDV से जुड़े हो सकते हैं। हालांकि, अंतिम पुष्टि के लिए नमूनों को जांच के लिए भेजा गया है।

घटनाओं के बाद रिजर्व में अन्य बाघों की निगरानी बढ़ा दी गई है और प्रभावित क्षेत्र में विशेष टीमों को तैनात किया गया है।

कान्हा, जो देश के प्रमुख और घनी आबादी वाले टाइगर आवासों में से एक है, वहां इस तरह की संभावित संक्रामक बीमारी ने वन्यजीव संरक्षण को लेकर चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों ने जंगलों के आसपास आवारा कुत्तों की आवाजाही पर रोक और निगरानी सख्त करने की मांग की है।

Website |  + posts

दो साल पहले, हमने अंग्रेजी में एक डिजिटल समाचार पत्र शुरू किया जो पर्यावरण से जुड़े हर पहलू पर रिपोर्ट करता है। लोगों ने हमारे काम की सराहना की और हमें प्रोत्साहित किया। इस प्रोत्साहन ने हमें एक नए समाचार पत्र को शुरू करने के लिए प्रेरित किया है जो हिंदी भाषा पर केंद्रित है। हम अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद नहीं करते हैं, हम अपनी कहानियां हिंदी में लिखते हैं।
कार्बनकॉपी हिंदी में आपका स्वागत है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

कार्बन कॉपी
Privacy Overview

This website uses cookies so that we can provide you with the best user experience possible. Cookie information is stored in your browser and performs functions such as recognising you when you return to our website and helping our team to understand which sections of the website you find most interesting and useful.