भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) का अनुमान है कि इस वर्ष देश में मानसून के दौरान सामान्य से कम बारिश हो सकती है। जून से सितंबर के बीच लगभग 80 सेमी वर्षा होने की संभावना है, जो 87 सेमी के दीर्घकालिक औसत से कम है। आईएमडी के महानिदेशक एम मोहोपात्रा के अनुसार, इस बार कुल वर्षा का औसत मानसून के दौरान होनेवाली दीर्घकालिक औसत वर्षा का 92 प्रतिशत तक रहने की संभावना है।
जून में एल नीनो की स्थिति बनने की संभावना भी है, जो मानसून को कमजोर कर सकती है। हालांकि, वेदर मॉडल संकेत दे रहे हैं कि मानसून के दूसरे हिस्से में पॉजिटिव इंडियन ओशन डाइपोल का प्रभाव बढ़ेगा, जिससे कुछ राहत मिल सकती है। पॉजिटिव इंडियन ओशन डाइपोल के दौरान हिंद महासागर के पश्चिमी हिस्से का पानी पूर्वी हिस्से की तुलना में ज्यादा गर्म हो जाता है, जिससे भारत में बारिश बढ़ने की संभावना बनती है।
देश के अधिकांश हिस्सों में कम बारिश का अनुमान है, जबकि पूर्वोत्तर, उत्तर-पश्चिम और दक्षिणी प्रायद्वीप के कुछ क्षेत्रों में सामान्य या अधिक वर्षा हो सकती है। मानसून देश की कृषि, जल आपूर्ति और बिजली उत्पादन के लिए बेहद अहम माना जाता है।
दो साल पहले, हमने अंग्रेजी में एक डिजिटल समाचार पत्र शुरू किया जो पर्यावरण से जुड़े हर पहलू पर रिपोर्ट करता है। लोगों ने हमारे काम की सराहना की और हमें प्रोत्साहित किया। इस प्रोत्साहन ने हमें एक नए समाचार पत्र को शुरू करने के लिए प्रेरित किया है जो हिंदी भाषा पर केंद्रित है। हम अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद नहीं करते हैं, हम अपनी कहानियां हिंदी में लिखते हैं।
कार्बनकॉपी हिंदी में आपका स्वागत है।
आपको यह भी पसंद आ सकता हैं
-
बैटरी रीसाइक्लिंग इकाइयों के पास ज़हर बनी मिट्टी, कई राज्यों में मिला सीसे का खतरनाक स्तर
-
ईरान युद्ध से वैश्विक ऊर्जा संकट गहराया, भारत पर भी बढ़ा दबाव
-
जलवायु आपदाएं और मानसिक स्वास्थ्य: भारत में बढ़ता एक ‘मौन संकट’
-
ट्रेड डील पर अनिश्चितता के बीच क्या किसानों की आय बढ़ा सकता है हाइब्रिड मॉडल?
-
हिमालय में सूखता ‘एशियन वॉटर टॉवर’, हर साल अरबों टन भूजल गायब
