अप्रैल के अंत में दुनिया के 50 सबसे गर्म शहर भारत में स्थित थे। इसे ‘वैश्विक मौसम निगरानी में एक असामान्य स्थिति’ बताया गया है। यह खुलासा कंपनी एक्यूआई की रिपोर्ट में हुआ, जिसे इनसाइड क्लाइमेट न्यूज़ ने प्रकाशित किया। वहीं, हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के एक अन्य अध्ययन में पाया गया कि भारत में केवल 8 प्रतिशत घरों में एयर कंडीशनर (एसी) की सुविधा उपलब्ध है। बाकी लोग छाया, रिफ्लेक्टिव छतों और प्राकृतिक वेंटिलेशन जैसे ‘पैसिव कूलिंग’ उपायों पर निर्भर हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, देश की लगभग तीन-चौथाई कार्यशक्ति (वर्क फोर्स) कृषि और निर्माण क्षेत्र में लगी हुई है। इसके अलावा, अनौपचारिक और गिग वर्कर्स देश के कुल श्रमबल का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा हैं, जिनमें से अधिकांश के पास रोजगार सुरक्षा और श्रमिक संरक्षण उपलब्ध नहीं है। यह जानकारी सलाटा इंस्टिट्यूट्स क्लाइमेट अडॉप्टेशन इन साउथ एशिया रिसर्च क्लस्टर के शोधपत्र में दी गई है।
रिपोर्ट के सह-लेखक कार्तिकेय भाटोटिया ने इनसाइड क्लाइमेट न्यूज़ से कहा, ‘गर्मी केवल मौसम का मुद्दा नहीं है। यह स्वास्थ्य, आवास, श्रम, बुनियादी ढांचे और वित्त से भी जुड़ा हुआ है।’
नए अध्ययन में खुलासा: भारतीय घरों में रातभर बनी रहती है खतरनाक गर्मी
नई दिल्ली स्थित संस्था क्लाइमेट ट्रेंड (क्लाइमेट ट्रेंड्स) के एक नए अध्ययन में सामने आया है कि चेन्नई के निम्न और मध्यम आय वर्ग के घरों में रात के समय भी गर्मी खतरनाक स्तर पर बनी रहती है। अध्ययन के अनुसार, इन घरों का तापमान शायद ही कभी 31 डिग्री सेल्सियस से नीचे गया और कई बार सर्दियों में भी सूर्यास्त के घंटों बाद तक 34 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना रहा।
यह शोध अक्टूबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच सात महीनों तक 50 घरों में लगाए गए हाई-रिजॉल्यूशन सेंसर के आंकड़ों पर आधारित था। डाउन टू अर्थ की रिपोर्ट के मुताबिक, अध्ययन ने जलवायु परिवर्तन, तेज शहरीकरण और गर्मी को सोखकर रखने वाली निर्माण सामग्री से पैदा हो रहे ‘क्रॉनिक इंडोर हीट’ के खतरे को उजागर किया है।
रिपोर्ट में सबसे चिंताजनक पहलू रात की गर्मी को बताया गया। घरों में तापमान रात 8 से 9 बजे के बीच चरम पर पहुंचकर करीब 34.7 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज किया गया। विशेषज्ञों के अनुसार, कंक्रीट की दीवारें और फर्श दिनभर जमा हुई गर्मी को रात में धीरे-धीरे छोड़ते हैं, जिससे घरों के अंदर तापमान लंबे समय तक ऊंचा बना रहता है। यहां तक कि सुबह के शुरुआती घंटों में भी तापमान 33.8 से 34 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना रहा।
26 मई तक केरल के तट पर पहुंच सकता है मानसून: आईएमडी
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून इस साल 26 मई के आसपास केरल पहुंच सकता है। सामान्य तौर पर मानसून 1 जून के करीब केरल में दस्तक देता है। मौसम विभाग ने कहा कि इसमें चार दिन आगे-पीछे होने की संभावना है। मानसून केरल पहुंचने के बाद धीरे-धीरे देश के अन्य हिस्सों में फैलता है और गर्मी से राहत मिलती है।
जून से सितंबर तक मानसून के मौसम के दौरान देश में करीब 70 प्रतिशत सालाना बारिश होती है, जो खेती और जल भंडारण के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। हालांकि आईएमडी ने इस साल सामान्य से कम बारिश की आशंका जताई है। विभाग के मुताबिक एल नीनो परिस्थितियों के कारण बारिश प्रभावित हो सकती है।
हंटा वायरस को लेकर बढ़ी चिंता, क्रूज शिप से जुड़े 11 मामले; 3 लोगों की मौत
दुनिया में हंटा वायरस संक्रमण को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। हाल ही में अंटार्कटिका यात्रा से लौटे क्रूज शिप MV Hondius से जुड़े 11 संदिग्ध मामलों की पहचान हुई है, जिनमें 3 लोगों की मौत हो चुकी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक, इनमें से 8 मामलों में एंडीज़ हंटा वायरस की पुष्टि हुई है। संक्रमित लोगों में अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, इजरायल, नीदरलैंड और ब्रिटेन के यात्री शामिल हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, हंटा वायरस मुख्य रूप से संक्रमित चूहों और कृन्तकों (रोडेंट प्रजातियों) के मूत्र, मल और लार के संपर्क से फैलता है। वायरस से संक्रमित धूल या हवा के जरिए भी संक्रमण हो सकता है। एंडीज़ स्ट्रेन में सीमित मानव-से-मानव संक्रमण की संभावना बताई गई है, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि यह कोविड-19 की तरह तेजी से फैलने वाला वायरस नहीं है।
यह संक्रमण इंसानों में गंभीर फेफड़ों और सांस संबंधी बीमारी पैदा कर सकता है, जिसे हंटावायरस पल्मोनरी सिंड्रोम (एचपीएस) कहा जाता है। गंभीर मामलों में मृत्यु का खतरा भी रहता है। डब्ल्यूएचओ, सीडीसी और संबंधित देशों की स्वास्थ्य एजेंसियां संपर्क ट्रेसिंग, निगरानी और संक्रमित लोगों को आइसोलेट करने की प्रक्रिया चला रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ लोगों को रोडेंट प्रजातियों से दूरी बनाए रखने और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने की सलाह दे रहे हैं।
हवा में मौजूद माइक्रोप्लास्टिक बढ़ा रहे हैं धरती की गर्मी: अध्ययन
वायुमंडल में मौजूद माइक्रोप्लास्टिक पृथ्वी को और अधिक गर्म बना रहे हैं तथा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को ‘और गंभीर’ कर रहे हैं। ब्लूमबर्ग ने नेचर क्लाइमेट चेंज में प्रकाशित नए शोध के हवाले से यह जानकारी दी। अध्ययन में चीन और अमेरिका के वैज्ञानिकों ने पाया कि हवा में तैरने वाले बेहद छोटे रंगीन प्लास्टिक कण सूर्य की रोशनी को अवशोषित कर लेते हैं। ये कण हवाओं के साथ दुनिया भर में फैलते हैं और वातावरण में गर्मी को फंसाकर तापमान बढ़ाने में योगदान देते हैं। अध्ययन के सह-लेखक होंगबो फू के अनुसार, वैश्विक तापमान वृद्धि में प्लास्टिक की भूमिका को ध्यान में रखते हुए अब जलवायु मॉडलों को अपडेट करने की जरूरत है।
यूपी में भीषण आंधी-तूफान का कहर, 100 से अधिक लोगों की मौत
उत्तर प्रदेश में तेज बारिश और ओलावृष्टि के साथ आए भीषण तूफान ने भारी तबाही मचाई है। रायटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस तूफान में 100 से अधिक लोगों की मौत हो गई। राहत अधिकारियों ने बताया कि बुधवार को आए इस तूफान में 59 लोग घायल हुए, 87 घर क्षतिग्रस्त हो गए और 114 पशुओं की भी मौत हुई।
रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च से जून के बीच उत्तर भारत में इस तरह के तूफान आम होते हैं, लेकिन इस बार का तूफान बेहद विनाशकारी साबित हुआ। राज्य के राहत आयुक्त हृषिकेश भास्कर ने बताया कि करीब एक दर्जन जिलों में कम से कम 104 लोगों की मौत हुई, जिनमें प्रयागराज क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित रहा।
वैज्ञानिकों की चेतावनी: 2026 में एल नीनो बढ़ा सकता है चरम मौसम की घटनाएं
वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि 2026 में एल नीनो के कारण दुनिया भर में हीटवेव, जंगलों में आग, बाढ़ और सूखे जैसी चरम मौसम घटनाएं और गंभीर हो सकती हैं। क्लाइमेट होम की रिपोर्ट के अनुसार, प्रशांत महासागर के सतही तापमान में असामान्य वृद्धि से बनने वाली यह प्राकृतिक जलवायु घटना वैश्विक मौसम पैटर्न को प्रभावित कर सकती है।
द टाइम्स के मुताबिक, यूरोपीय संघ की कॉपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस समेत चार मौसम एजेंसियों के औसत अनुमान के अनुसार, 2026 में ‘बहुत शक्तिशाली’ एल नीनो बनने की 82 प्रतिशत संभावना है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके प्रभाव से 2027 में ब्रिटेन में गर्मियों का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जा सकता है और वैश्विक सूखे की स्थिति पैदा हो सकती है, जिससे खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है।गैबी हेगरल ने द इंडिपेंडेंट से कहा कि सकारात्मक हिंद महासागर द्विध्रुव (पॉजिटिव इंडियन ओशन डाइपोल) के साथ मिलकर एल नीनो का असर ‘और अधिक शक्तिशाली’ हो सकता है। इससे जंगलों में आग, सूखा और अन्य चरम मौसम घटनाओं का खतरा बढ़ने की आशंका है।
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