भारत ने 2026 की पहली तिमाही यानी जनवरी-मार्च के दौरान 15.3 गीगावॉट (GW) सौर ऊर्जा क्षमता जोड़ी, जो अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है। ऊर्जा शोध संस्था मेरकॉम इंडिया के अनुसार, यह पिछले साल की तुलना में 143 प्रतिशत ज्यादा है। जबकि पिछली तिमाही की तुलना में यह 49 प्रतिशत अधिक है। इसमें बड़े सौर पार्कों और ओपन एक्सेस परियोजनाओं का सबसे बड़ा योगदान रहा।
कुल नई क्षमता में 82 प्रतिशत हिस्सा बड़े प्रोजेक्ट्स का था। रिपोर्ट के मुताबिक जून 2026 से नए नियम लागू होने से पहले कंपनियों ने तेजी से परियोजनाएं पूरी कीं, जिससे स्थापना में उछाल आया।
परमाणु ऊर्जा लक्ष्य पूरा करने के लिए 2047 तक चाहिए 25 लाख करोड़ रुपए: टेरी
ऊर्जा शोध संस्था टेरी की रिपोर्ट के अनुसार भारत को 2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने के लिए 23 से 25 लाख करोड़ रुपए निवेश करने होंगे। रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके लिए नियमों में बड़े बदलाव, तेज परियोजना निर्माण और छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (एसएमआर) जैसी नई तकनीक जरूरी होगी।
एसएमआर छोटे आकार के परमाणु रिएक्टर होते हैं, जिन्हें फैक्टरी में तैयार कर आसानी से लगाया जा सकता है। फिलहाल भारत में 25 परमाणु रिएक्टर हैं, जिनकी कुल क्षमता करीब 8.8 गीगावॉट है। रिपोर्ट के मुताबिक, बढ़ती सौर और पवन ऊर्जा के बीच रात या कम धूप के समय लगातार बिजली देने में परमाणु ऊर्जा अहम भूमिका निभा सकती है।
गुजरात के मोढेरा में शुरू हुआ देश का पहला बैटरी-इंटीग्रेटेड सौर ऊर्जा संयंत्र
गुजरात के मोढेरा गांव में भारत का पहला ऐसा सौर ऊर्जा संयंत्र शुरू हुआ है, जिसमें बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (बीईएसएस) भी जोड़ी गई है। बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली में बड़ी बैटरियां होती हैं, जिनमें दिन में बनी अतिरिक्त सौर बिजली स्टोर की जा सकती है और जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल किया जा सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार गुजरात ने पांच जगहों पर कुल 870 मेगावॉट क्षमता की बैटरी परियोजनाएं शुरू की हैं। अहमदाबाद, गांधीनगर, बनासकांठा, पाटन और कच्छ में नई परियोजनाएं भी पंजीकृत की गई हैं। राज्य सरकार ने 2025 की नई नवीकरणीय ऊर्जा नीति में ऊर्जा भंडारण को अहम हिस्सा बनाया है। इससे भारत को 2030 तक गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित 500 गीगावॉट क्षमता के लक्ष्य में मदद मिलेगी।
बैटरी वाली सौर-पवन बिजली कई जगहों पर कोयले से सस्ती: रिपोर्ट
अंतरराष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी (इरेना) की नई रिपोर्ट में कहा गया है कि कई क्षेत्रों में सौर और पवन ऊर्जा को बैटरी भंडारण के साथ जोड़कर चौबीसों घंटे बिजली देना अब कोयला और गैस आधारित बिजली से सस्ता पड़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार जहां धूप और हवा अच्छी मात्रा में उपलब्ध है, वहां यह मॉडल लगातार और सस्ती बिजली देने में सफल हो रहा है।
शोध में बताया गया कि सौर ऊर्जा और बैटरी वाले प्रोजेक्ट्स से बिजली की लागत कई जगह नई कोयला परियोजनाओं से कम है। बैटरी प्रणाली अतिरिक्त बिजली को जमा करती है, जिससे रात या कम उत्पादन के समय भी बिजली मिलती रहती है। विशेषज्ञ इसे स्वच्छ और दीर्घकालिक ऊर्जा समाधान मान रहे हैं।
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