हरित ऊर्जा कंपनियों को जीआईबी हैबिटैट के आसपास मिली अतिरिक्त भूमि

Admin 31 मार्च. 2024
हरित ऊर्जा कंपनियों को जीआईबी हैबिटैट के आसपास मिली अतिरिक्त भूमि

राजस्थान और गुजरात में स्थित लुप्तप्राय ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (जीआईबी) के हैबिटैट में नवीकरणीय परियोजनाएं लगाने की योजना बना रही सौर और पवन ऊर्जा कंपनियों के लिए सुप्रीम कोर्ट से अच्छी खबर है। कोर्ट ने अपने 2021 के आदेश को संशोधित कर, लगभग 80,000 वर्ग किमी अतिरिक्त भूमि नवीकरणीय ऊर्जा उद्योग द्वारा उपयोग के लिए उपलब्ध करा दी है

इस आदेश से एनटीपीसी, अडानी ग्रीन, एसीएमई, रीन्यू और अन्य कंपनियों द्वारा लगभग 60 गीगावॉट नवीकरणीय क्षमता की परियोजनाओं को लाभ होगा। 

कोर्ट ने अपने अप्रैल 2021 के आदेश को संशोधित किया जिसमें सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए भूमिगत केबलिंग अनिवार्य की गई थी। इस आदेश में कहा गया था कि जीआईबी का प्राथमिक हैबिटैट नवीकरणीय निर्माण सीमा से बाहर है और यह प्रतिबंध जारी रहेगा। जीआईबी के लिए प्राथमिकता क्षेत्र राजस्थान में 13,000 वर्ग किमी और गुजरात में 477 वर्ग किमी है। हरित ऊर्जा के उपयोग का संभावित क्षेत्र राजस्थान में 78,500 वर्ग किमी और गुजरात में 2,108 वर्ग किमी है।

शुरुआती दिक्कतों के बाद नवीकरणीय क्षमता में देखी गई वृद्धि

पिछले वित्तीय वर्ष की पहली छमाही में नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र को चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इस दौरान 20 गीगावॉट के लक्ष्य के मुकाबले अक्षय ऊर्जा क्षमता में वृद्धि केवल 6.6 गीगावॉट की वृद्धि दर्ज की गई।

सोलर मॉड्यूल की ऊंची कीमतों से निवेश पर भी असर पड़ा है। पिछले साल की पहली तिमाही में जोड़ी गई कुल सौर क्षमता में, वाणिज्यिक और औद्योगिक प्रतिष्ठानों की तुलना में आवासीय क्षेत्र की हिस्सेदारी फिर कम रही।

हालांकि, दूसरी छमाही में सोलर इंस्टालेशन में वृद्धि देखी गई क्योंकि सौर मॉड्यूल की कम कीमतों ने डेवलपर्स को अपनी लंबित परियोजनाओं को पूरा करने में मदद की। परिणामस्वरूप, देश की कुल स्थापित क्षमता फरवरी तक 183.5 गीगावॉट तक पहुंच गई, जो पिछले वर्ष इसी अवधि में 122.1 गीगावॉट थी।

स्थापित क्षमता में वृद्धि के बावजूद, इस वित्तीय वर्ष में फरवरी तक ऊर्जा उत्पादन कम रहा है, जो 2.1% की गिरावट के साथ 333.6 बिलियन यूनिट (बीयू) दर्ज किया गया है। 

टैरिफ में कटौती से 2030 तक घटेगी हरित हाइड्रोजन की लागत: रिपोर्ट

अगले सात सालों में इलेक्ट्रोलाइज़र सिस्टम की कीमतें आधे से भी कम होने की उम्मीद है, जिससे ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन की लागत कम होगी और इस हरित ईंधन की कीमतें गिरेंगी, मैनेजमेंट कंसल्टेंसी फर्म अल्वारेज़ एंड मार्सल ने एक रिपोर्ट में कहा है।

हाइड्रोजन उत्पादन लागत का 65-85 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा संसाधनों पर खर्च होता है। भारत समेत कई देशों में 2030 तक सोलर टैरिफ भी 20 डॉलर प्रति मेगावॉट ऑवर से भी कम हो जाएगी, जिससे ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन की लागत और कम होगी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि 2030 तक इलेक्ट्रोलाइज़र सिस्टम की लागत में उल्लेखनीय कमी, और वर्तमान में 1 गीगावॉट के इंस्टालेशन से बढ़कर यह दुनियाभर में लगभग 400 गीगावॉट तक पहुंचने का अनुमान है। वर्तमान में, इलेक्ट्रोलाइज़र की लागत $735-945/किलोवाट है, लेकिन अगले सात वर्षों में यह कम होकर $310-440/किलोवाट होने की उम्मीद है।

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