… सवा सौ साल में फूल खिला है, फूल खिला है

क्लाइमेट साइंस

Newsletter - September 17, 2020

अनमोल खोज: दुर्लभ ऑर्किड की प्रजाति लिपरिस पाइग्मिया 124 साल बाद उत्तराखंड के चमोली में दिखी है। Photo: मनोज सिंह

… सवा सौ साल में फूल खिला है, फूल खिला है।

उत्तराखंड के चमोली ज़िले में ऑर्किड की वह दुर्लभ प्रजाति पाई गई है जो 124 साल पहले सिक्किम में दिखी थी। इस प्रजाति की पहचान “लिपरिस पाइग्मिया के नाम से की गई है। बताया जा रहा है कि इससे पहले यह प्रजाति 1896 में देखी गई थी। ऑर्किड पहाड़ी इलाकों में जून-जुलाई के वक्त खिलाने वाला दुर्लभ फूल है जिसके वजूद पर संकट को देखते हुये इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजरवेशन ऑफ नेचर (आईयूसीएन) ने अपनी रेड लिस्ट यानी विलुप्ति के संकट से घिरी प्रजाति  में रखा है। हिमालय जैव विविधता का अनमोल खज़ाना है और इस पर छाये संकट की वजह से ऑर्किड जैसी प्रजाति का महत्व अधिक बढ़ जाता है।  उत्तराखंड वन विभाग के फॉरेस्ट रेंजर हरीश नेगी और जूनियर रिसर्च फेलो मनोज सिंह का कहना है उन्होंने यह पुष्प चमोली ज़िले में सप्तकुंड के रास्ते में 3800 मीटर दिखा और वहां भेजे गये सेंपल की पुष्टि पुणे स्थित बॉटिनिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने कर दी है।  प्रतिष्ठित फ्रेंच साइंस जर्नल रिचर्डियाना में इसे प्रकाशित किया गया है।  

पिछले 50 साल में 60% जन्तुओं का खात्मा: रिपोर्ट  

इंसान ने पिछले 50 साल में धरती की कुल 60% जन्तु आबादी को मिटा दिया है। इस विनाश लीला का शिकार पक्षियों के साथ-साथ मछलियां, सरीसृप और स्तनधारी सभी हुए हैं। दुनिया के 59 जीव विज्ञानियों की मदद से तैयार की गई WWF की ताज़ा रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। रिपोर्ट बताती है कि 1970 से अब तक वर्टीब्रेट (यानी रीढ़ की हड्डी वाले) जीवों की संख्या में 60% से अधिक कमी आ गई है। यह जानना महत्वपूर्ण है कि धरती पर जितने भी जीव हैं उनमें कशेरुकी जीव 98% हैं।  खत्म हो चुके है। मछली, मेढक, हाथी, शेर, चीता और सांप जैसे जन्तु वर्टीब्रेट जीवों में आते हैं।  

अमेरिका: पश्चिमी तट पर विनाशकारी आग धधकना जारी 

अमेरिका के पश्चिमी तट पर करीब 32 लाख एकड़ में फैली आग लगातार धधक रही है। इसने पिछले महीने 19 लोगों की जान ले ली थी। यह आग भारत के तटीय राज्य गोवा के मुकाबले तीन गुना बड़े क्षेत्रफल में फैली है। कैलिफोर्निया के गर्वनर इसे “क्लाइमेट-इमरजेंसी” बताया है और कहा है कि जलवायु परिवर्तन हो रहा है या नहीं इस पर कोई दो राय नहीं होनी चाहिये।  उधर जलवायु परिवर्तन की दलीलों का मज़ाक उड़ाते रहे अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने ख़राब अग्नि प्रबंधन को इस हालात के लिये ज़िम्मेदार बताया है। 

जलवायु परिवर्तन: अगले 30 साल में 120 करोड़ होंगे विस्थापित 

क्लाइमेट चेंज के बढ़ते असर के साथ अगले 30 सालों में 120 करोड़ लोगों को अपना वर्तमान बसेरा छोड़कर पलायन करना होगा। यह बात एक थिंक टैंक इकॉनोमिक्स एंड पीस (IEP) के शोध में कही गई है। यह शोध बताता है कि कुल 31 देशों में जहां क्लाइमेट क्राइसिस से निबटने का सामर्थ्य नहीं है वहां यह समस्या विकराल रूप में दिखेगा। नाइजीरिया, अंगोल और यूगांडा जैसे देशों के नाम इसमें शामिल है। शोध बताता है कि भारत और चीन जैसे देशों को सबसे अधिक जल संकट का सामना करना पड़ेगा।  

लॉकडाउन के बावजूद ग्रीन हाउस इमीशन रिकॉर्ड स्तर पर 

दुनिया के तमाम देशों में कोरोना महामारी के कारण लगाये गये लॉकडाउन के बावजूद इस साल ग्रीनहाउस गैसों का इमीशन रिकॉर्ड स्तर पर रहा है। यह बात संयुक्त राष्ट्र संघ की एक रिपोर्ट में कही गई है।  रिपोर्ट कहती है कि CO2 के ग्राफ में एक जगह गिरावट ज़रूर दिखी पर यह गिरावट कार्बन डाई ऑक्साइड को नियंत्रित करने के लिये काफी नहीं हैं। आज CO2 इमीशन दुनिया के 30 लाख सालों के सर्वाधिक स्तर पर है।  यूएन की यह रिपोर्ट बताती है कि इस साल जुलाई में CO2 का स्तर 414.38 पार्ट प्रति मिलियन रहा जबकि पिछले साल यह नंबर 411.74 पीपीएम था।


क्लाइमेट नीति

निजात में मुनाफा: पुराने कोयला बिजलीघरों में प्रदूषक नियंत्रक टेक्नोलॉजी लगाने से बेहतर विकल्प उन्हें बन्द करना है| Photo: Econews

कोयला बिजलीघरों को बन्द कर बचा सकते हैं 1.1 लाख करोड़

पर्यावरण संरक्षण पर सलाह देने वाली क्लाइमेट रिस्क हॉराइज़न (CRH) की ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में निर्माणाधीन और पुराने कोयला पावर प्लांट को बन्द करने से न केवल इमीशन में भारी कटौती होगी बल्कि बिजली वितरण कंपनियों और उपभोक्ताओं के कुल 1.1 लाख करोड़ रूपये की बचत भी होगी। रिपोर्ट कहती है कि 53,000 करोड़ की बचत तो अगले 5 सालों में 11 राज्यों के  20 साल से अधिक पुराने कोयला घरों को बन्द करने से ही हो जायेगी। रिपोर्ट कहती है कि पुराने बिजलीघरों में प्रदूषक नियंत्रक टेक्नोलॉजी लगाने के बजाय उन्हें बन्द करना आर्थिक रूप से अधिक मुफीद होगा। 

महाराष्ट्र: आरे का 600 एकड़ घोषित होगा ‘रिज़र्व फॉरेस्ट’ 

महाराष्ट्र सरकार ने आरे के 600 एकड़ इलाके को ‘रिज़र्व फॉरेस्ट’ घोषित करने का फैसला किया है। इस इलाके में कोई सड़क या अन्य निर्माण कार्य नहीं होगा। इसे या तो इको टूरिज्म स्पॉट बनाया जायेगा या फिर इसे यूं ही छोड़ दिया जायेगा। कुछ वक्त पहले ही मेट्रो कार पार्किंग के लिये यहां पेड़ काटे जाने की वजह से बवाल हुआ। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने अब अधिकारियों से कहा है वह कार पार्किंग बनाने के लिये दूसरी जगह ढूंढें। एक नई रिपोर्ट से मिली जानकारी दुनिया भर में कोयले का प्रयोग कम करने की दिशा में उत्साहवर्धक हो सकती है। 

यूरोपीय संसद में 2030 तक 60% इमीशन कट के लिये वोट 

यूरोपीय संसद ने इमीशन घटाने के लक्ष्य को और महत्वाकांक्षी बनाने के लिये पहल की है। इसकी पर्यावरण कमेटी ने इस बात के पक्ष में मतदान किया है कि अगले 10 सालों में इमीशन (1990 के स्तर पर ) 60% कम किये जायें और इसे लक्ष्य को हासिल करना कानूनी रूप से अनिवार्य बनाया जाये। यूरोपीय यूनियन 2050 तक अपनी अर्थव्यवस्था को क्लाइमेट न्यूट्रल (कुल कार्बन इमीशन शून्य) करना चाहती है। अक्टूबर में इस क़ानून पर वोटिंग होगी। 

गूगल ने ज़ीरो कार्बन फुट प्रिंट का दावा किया 

दुनिया के जाने माने सर्च इंजन को बनाने वाली कंपनी गूगल ने घोषणा की है कि उसका कार्बन फुट प्रिंट ज़ीरो है क्योंकि उसे ‘उम्दा क्वॉलिटी के ऑफसेट’ में निवेश किया है। गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने कहा है कंपनी का अगला उद्देश्य अपने सभी दफ्तरों और डाटा सेंटर को कार्बन फ्री  ऊर्जा पर चलाना है।


वायु प्रदुषण

बर्बादी की भरपाई: सीपीसीबी और आईआईटी के विशेषज्ञ पैनल ने सिंगरौली में एनटीपीसी और एस्सार पावर कंपनियों प्रदूषित राख फैलाने के लिये कुल 100 करोड़ से अधिक जुर्माने की सिफारिश की है। Photo: Iamrenew.com

सिंगरौली राखड़ बांध रिसाव: एनटीपीसी, एस्सार पर जुर्माना

मध्य प्रदेश के सिंगरौली क्षेत्र में दो कोयला बिजली घरों के राखड़ बांध (एश डेम) से हुए हानिकारक रिसाव के लिये कंपनियों पर कुल 111.35 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है। सरकारी कंपनी एनटीपीसी को कुल 104 करोड़ रुपये और निजी कंपनी एस्सार को 7.35 करोड़ रुपये भरने होंगे। इस जुर्माने को तय करने के लिये केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और आईआईटी (रुड़की) के संयुक्त पैनल ने नुकसान का आंकलन किया और पिछले हफ्ते एक रिपोर्ट राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) में जमा की। इस दो कंपनियों ने कुल 10 रुपये अंतरिम राशि के तौर पर जमा किये हैं। 

पिछले साल एनटीपीसी के विन्ध्याचल पावर प्लांट और एस्सार के महान बिजलीघर से रिसाव हुआ था। मुआवजे की राशि तय करने के लिये ग्रीन हाउस गैसों के इमीशन और रिसाव के कारण उस क्षेत्र में हुये जल-प्रदूषण को आधार बनाया गया है।  

तेलंगाना: सिंगारेनी कोयला खदान पर अदालत ने मांगी रिपोर्ट 

तेलंगाना के खम्मम ज़िले में चल रही सिंगारेनी कोयला खदान पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इस खदान की वजह से वायु प्रदूषण और मिट्टी के खराब होने की शिकायत की गई है जिससे आसपास के क्षेत्र में रह रहे लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। अदालत ने खम्मम के ज़िलाधिकारी समेत चार लोगों की एक टीम से 9 नवंबर तक इस बारे में रिपोर्ट जमा करने को कहा है। इस टीम में पर्यावरण मंत्रालय के अधिकारी और राज्य प्रदूषण बोर्ड के अफसर के अलावा माइनिंग और जियोलोजी विभाग के वरिष्ठ अफसर को रखा गया है। 

कोरोना संकट: दफ्तरों के एसी में लगेंगे विशेष फिल्टर 

कोरोना महामारी के खतरे को कम करने के लिये सरकार दफ्तरों में चल रहे एसी में विशेष फिल्टर लगाने की मुहिम चला रही है। सरकार का कहना है कि इससे इनडोर एयर क्वालिटी बेहतर होगी और बिजली की बचत होगी। राज्य की एजेंसी एनर्जी एफिशेंसी सर्विसेस लिमिटेड (EESL) ने करीब 37 लाख फिल्टर यूनिट लगाने के लिये निविदायें मांगी हैं। सरकार ने छोटे और मझौले उद्योगों को निविदा (बोली) के लिये प्रोसेसिंग फी माफ कर दी है। मरकॉम के मुताबिक यह विशेष फिल्टर लगावे के लिये जून में एक पायलट प्रोजेक्ट किया गया था जिसमें पाया गया कि इनडोर एयर क्वॉलिटी में 90-95% का सुधार हुआ।


रिन्यूएबिल

रोज़गार के लिये साफ ऊर्जा: नई रिसर्च कहती है कि तेल और गैस को छोड़कर साफ ऊर्जा अपनाने से उत्तर भारत में 50 लाख नौकरियां मिल सकती है। Photo: Council on Foreign Relations

साफ ऊर्जा क्षेत्र उत्तर भारत में दे सकता है 50 लाख नौकरियां

दिल्ली स्थित क्लाइमेट ट्रेंडस और फिनलेंड की एलयूटी यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के शोध में यह बात सामने आयी है दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र 2050 तक साफ ऊर्जा के इस्तेमाल के इंटीग्रेटेड सिस्टम द्वारा कार्बन न्यूट्रल हो सकता है। यह दुनिया के सबसे बड़े मेट्रो शहरी इलाकों में है और साफ ऊर्जा का इस्तेमाल पावर, हीटिंग, परिवहन और उद्योगों में किया जा सकता है।  इस शोध में पता चला है कि उत्तर भारत में  अभी 825 मीट्रिक टन CO2 के बराबर प्रति वर्ष इमीशन को घटाकर 2050 में शून्य किया जा सकता है। तेल, गैस और कोयला आधारित बिजली के मुकाबले क्लीन एनर्जी सेक्टर में बदलाव के कारण 2050 तक कुल 50 लाख नौकरियां मिलेंगी। 

अगस्त में साफ ऊर्जा का हिस्सा 34% पहुंचा 

 जून में कोरोना लॉकडाउन में ढील के बाद बिजली की मांग बढ़ना शुरू हुई। इस साल अगस्त हुई कुल बिजली खपत में साफ ऊर्जा का हिस्सा 34% जबकि पिछले साल अगस्त 2019 में यह आंकड़ा 32% था। डाउन टु अर्थ मैग्ज़ीन के मुताबिक हालांकि इस साल कुल पावर जेनरेशन 13% घटा है। गर्मियों में बिजली की मांग बढ़ जाती है जिसकी आपूर्ति हाइड्रो पावर और रिन्यूएबिल से होती है। 

साल 2022 का नया लक्ष्य – 220 GW? 

भारत की क्लीन एनर्जी उत्पादन क्षमता अभी 134 GW है और वह 2022 तक इसे 220 GW करेगा। अंतर्राष्ट्रीय सोलर अलायंस द्वारा आयोजित विश्व सौर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह संदेश दिया। हालांकि सवाल है कि बिजली क्षेत्र में मंदी और सोलर पैनल के बाज़ार की दिक्कतों को देखते हुए यह लक्ष्य पाना क्या मुमकिन हो पायेगा। 

उधर पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि 2025 तक देश की सरकारी पेट्रोलियम कंपनियां अपने 50% पेट्रोल पम्प साफ ऊर्जा से चलायेंगी। प्रधान के मुताबिक देश की 3 बड़ी सरकारी कंपनियों के कुल 63,150 फ्यूल स्टेशन हैं और इन्होंने सोलर पैनल लगाने शुरू कर दिये हैं। उनके मुताबिक अभी इन सोलर पैनलों की कुल क्षमता 270 मेगावॉट है और अगले साल 60 मेगावॉट क्षमता के पैनल और लगेंगे। 

अगले 10 साल में यूरोप की 80% पावर सप्लाई साफ ऊर्जा  

यूरोप के उद्योग संगठन यूरोइलेक्ट्रिक के द्वारा किये एक अध्ययन में कहा गया है कि साल 2030 तक यूरोप की 80% बिजली साफ ऊर्जा स्रोतों से बनेगी। इस साल जून में कुल बिजली का 40% साफ ऊर्जा के स्रोतों से था और कोयले, गैसे से बनने वाली बिजली में पिछले साल के मुकाबले 18% गिरावट आई। साल 2010 में यूरोप में कुल बिजली का केवल 20% साफ ऊर्जा थी।


इलेक्ट्रिक मोबिलिटी

चार्ज़िंग प्वाइंट केंद्र: अगर ऊर्जा मंत्री के इरादे कामयाब रहे तो हर पेट्रोल पंप पर तेल मिले न मिले कार चार्जिंग प्वाइंट ज़रूर होगा। Photo: The Statesman

भारत के 69,000 पेट्रोल पंपों पर होंगे कार चार्जिंग प्वाइंट

भारत के ऊर्जा मंत्री ने ऑयल कंपनियों को सलाह दी है कि देश के सभी पेट्रोल पंपों में बैटरी कारों के चार्जिंग प्वाइंट लगाये जायें। देश में अभी करीब 69,000 पेट्रोल पम्प हैं। अगर यह हो पाता है तो बैटरी कारों की मुहिम को इससे काफी प्रोत्साहन मिलेगा। हालांकि अभी इस बारे में कोई विस्तृत जानकारी नहीं है कि इन चार्जिंग प्वाइंट्स को कब तक लगाया जा सकेगा। उधर जेएमके एनालिटिक्स की रिसर्च कहती है कि भारत 2022 तक 6,490 नई इलेक्ट्रिक बसें अपने ट्रांसपोर्ट में जोड़ सकता है। साल 2020-21 तक 1850 ई-बसें और उसके अगले साल 21-22 में 4,640 बसें। अभी फेम-1 के मुताबिक देश में कुल 1.031 ई-बसें हैं। इसमें पश्चिम बंगाल में 80, हिमाचल में 75 और महाराष्ट्र में 70 बसें शामिल हैं। 

ऊबर की सारी गाड़ियां 2040 तक होंगी इलैक्ट्रिक 

टैक्सी कंपनी ऊबर ने कहा है कि साल 2040 तक उसके नेटवर्क की सारी गाड़ियां इलेक्ट्रिक हो जायेंगी। इस समय पूरी दुनिया में 50 लाख ऊबर ड्राइवर हैं। इस योजना के लिये वह खुद करीब 5600 करोड़ का फंड लगायेगी। इलैक्ट्रिक कार चार्जिंग में आर्थिक मदद के लिये इस फंड का इस्तेमाल होगा। इस साल 8 सितंबर से कंपनी अपने ई-कार ड्राइवरों को प्रोत्साहन के तौर पर हर ट्रिप के लिये 1 डॉलर अतिरिक्त भुगतान कर रही है। 

टेस्ला पहुंच गई एवरेस्ट बेसकैंप तक 

चीन का एक टेस्ला मॉडल – 3 कार मालिक इसे दौड़ाता हुआ 16,900 फीट की ऊंचाई पर एवरेस्ट बेसकैंप तक जा पहुंचा। एक्सपर्ट कहते हैं कि इससे परम्परागत डीज़ल और पेट्रोल कारों के मुकाबले बैटरी कार की अच्छी गुणवत्ता साबित होती है। इस कार मालिक ने दक्षिण चीन के शेंजन से चलना शुरू किया जो बेस कैंप से 5,500 किमी दूर है। रास्ते में जिस होटल में भी वह रुका वहां उसे कार चार्जिंग सुविधा मिल गई। यह पता नहीं कि इस रूट में कार चार्जिंग प्वाइंट्स का नेटवर्क इतना बेहतर है या कंपनी ने इस उत्साही के लिये यह खास व्यवस्था करवाई। आखिर उनकी कार का ज़बरदस्त प्रचार भी तो हुआ है।


जीवाश्म ईंधन

डिब्बा बन्द: शेल गैस की औंधे मुंह गिरी कीमतों और अंधकारमय भविष्य के कारण कई बड़ी कंपनियां फ्रेकिंग के कारोबार से निकल रही हैं। Photo: Taz.de

कोल इंडिया भूमिगत खदानों में फिर शुरू करेगी माइनिंग

ख़बर है कि कोल इंडिया उन अंडरग्राउंड खदानों में फिर से काम शुरू कर रहा है जहां माइनिंग रोक दी गई थी। उसका मकसद अपना कोयला उत्पादन बढ़ाना है ताकि 2023-24 तक सालाना 100 करोड़ टन कोयला निकालने का लक्ष्य पूरा हो सके। इस उद्देश्य के लिये ऐसे 12 ब्लॉक्स को चुना गया है जिनमें कुल करीब 1,060 मिलियन टन का भंडार है। इनमें से कुछ ब्लॉक्स तो ऐसे हैं जहां काम 20 साल पहले बन्द कर दिया गया था क्योंकि या तो उस वक्त इन खदानों से कोयला निकालना बहुत खर्चीला हो गया था या तकनीक उपलब्ध नहीं थी।  कहा जा रहा है कि गहरी खदानों में बेहतर क्वॉलिटी का कोयला है और कम से कम 4 खदानों में तो कोकिंग कोल भी है जो भारत में बहुत कम पाया जाता है। 

श्लुमबर्गर ने फ्रेकिंग से खींचा हाथ 

ऑयल फील्ड क्षेत्र के उपकरण सप्लाई करने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में एक श्लुमबर्गर लिमिटेड ने अमेरिका और कनाडा में फैला अपना ये बिजनेस बेच दिया है। कोरोना महामारी के बाद तेल और गैस के दामों में भारी गिरावट के कारण कंपनी को यह कदम उठाना पड़ा है। श्लुमबर्गर के फैसले के बाद दो अन्य कंपनियों ने भी ऐसा ही कदम उठाया है। साफ है कि शेल गैस का कारोबार शायद अब अमेरिका में उस स्तर पर कभी न आ पाये जैसा कोरोना विस्फोट से पहले चल रहा था।