मेरकॉम इंडिया रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 2026 की पहली तिमाही (जनवरी-मार्च) के दौरान 2.7 गीगावाट रूफटॉप सोलर क्षमता जोड़ी गई। यह पिछली तिमाही की तुलना में 25 प्रतिशत और एक साल पहले की तुलना में 125 प्रतिशत अधिक है।
रिपोर्ट में कहा गया कि इस बढ़ोतरी में पीएम सूर्य घर योजना की बड़ी भूमिका रही, जिसके तहत सब्सिडी, आसान स्वीकृति प्रक्रिया और राज्यों के सहयोग से घरेलू उपभोक्ताओं को बढ़ावा मिला। कुल नई क्षमता में 82 प्रतिशत हिस्सा आवासीय क्षेत्र का रहा।
महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और गुजरात सबसे आगे रहे। रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2026 तक देश की कुल रूफटॉप सोलर क्षमता 23.5 गीगावाट पहुंच गई।
2035 तक ऊर्जा खपत में बिजली की हिस्सेदारी 35% करना आवश्यक: इरेना
अंतरराष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी (इरेना) ने कहा है कि दुनिया को जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए 2035 तक कुल ऊर्जा खपत में बिजली की हिस्सेदारी 35 प्रतिशत और 2050 तक 50 प्रतिशत से अधिक करनी होगी। एजेंसी के अनुसार, यदि ऐसा नहीं हुआ तो वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखना मुश्किल होगा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि सौर और पवन ऊर्जा जैसी नवीकरणीय ऊर्जा का तेजी से विस्तार जरूरी है। साथ ही बिजली ग्रिड और बैटरी भंडारण क्षमता को भी मजबूत करना होगा। इरेना ने चेतावनी दी कि वर्तमान प्रगति पर्याप्त नहीं है। दुनिया भर में कई सौर और पवन परियोजनाओं को बिजली ग्रिड से जोड़ा जाना बाकी है। रिपोर्ट के अनुसार, परिवहन, उद्योग और बिल्डिंग क्षेत्रों में बिजली-आधारित तकनीकों के इस्तेमाल से जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम की जा सकती है।
2026 में भारत का ऊर्जा निवेश 170 अरब डॉलर पहुंचने का अनुमान: आईईए
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) की रिपोर्ट के अनुसार भारत का ऊर्जा क्षेत्र में निवेश 2026 में रिकॉर्ड 170 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से सौर ऊर्जा, बिजली ग्रिड और तेल रिफाइनिंग क्षेत्र में तेज निवेश के कारण होगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले पांच वर्षों में भारत का ऊर्जा निवेश औसतन 11 प्रतिशत सालाना बढ़ा है।
सौर ऊर्जा निवेश में 25 प्रतिशत और रिफाइनिंग निवेश में 23 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई।
भारत ने 2025 में गैर-जीवाश्म स्रोतों से 50 प्रतिशत बिजली क्षमता हासिल करने का लक्ष्य समय से पांच साल पहले पूरा कर लिया। वहीं, ग्रिड आधुनिकीकरण, बैटरी स्टोरेज और परमाणु ऊर्जा में भी निवेश तेजी से बढ़ रहा है।
सभी परियोजनाओं के लिए नहीं बढ़ाई जाएगी एएलएमएम नियमों में छूट की समयसीमा
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई ) ने कहा है कि सोलर पीवी (फोटोवोल्टिक) सेल के लिए एएलएमएम (एप्रूव्ड लिस्ट ऑफ मॉडल्स एंड मैनुफैक्चरर्स) सूची-2 लागू करने की समयसीमा 1 जून 2026 के बाद सभी परियोजनाओं के लिए एक साथ नहीं बढ़ाई जाएगी। एएलएमएम ऐसी सरकारी सूची है जिसमें स्वीकृत सोलर उपकरण बनाने वाली कंपनियां शामिल होती हैं।
मंत्रालय ने कहा कि 1 जून 2026 से पहले शुरू होने वाली नेट-मीटरिंग और ओपन एक्सेस परियोजनाओं को छूट मिलती रहेगी, लेकिन इसके बाद शुरू होने वाली परियोजनाओं को एएलएमएम नियम मानने होंगे। हालांकि, जिन परियोजनाओं में भूमि क्रय, वित्तीय व्यवस्था या सोलर मॉड्यूल लगाने जैसे काम हो चुके हैं, उनके लिए विशेष आधार पर समय बढ़ाने पर विचार किया जाएगा।
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