भारत का कोयला उत्पादन दिसंबर में करीब 11% बढ़ा, अप्रैल से दिसंबर के बीच कुल उत्पादन 680 मिलियन टन से अधिक

Admin 13 जन॰. 2024
अप्रैल-दिसंबर के बीच कोयला उत्पादन 76 मिलियन टन बढ़ा।

अप्रैल-दिसंबर के बीच कोयला उत्पादन 76 मिलियन टन बढ़ा।


दिसंबर 2023 में भारत में कोयला उत्पादन 92.87 मिलिटन टन हुआ जो एक साल पहले दिसंबर 2022 के उत्पादन से 10.75 प्रतिशत अधिक है। दिसंबर 2022 में देश में कुल 83.86 मिलियन टन कोयले का खनन किया गया।  

कोयला मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, “कोयला क्षेत्र में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई है। उत्पादन, ढुलाई और स्टॉक का स्तर में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।” सरकारी कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड ने इस एक महीने में अपना प्रोडक्शन 8.27 प्रतिशत बढ़ाया। अप्रैल से दिसंबर के बीच उत्पादन में पिछले साल के मुकाबले अब तक करीब 76 मिलियन टन की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जहां 2022 में इन 9 महीनों का कुल उत्पादन 608.34 मिलियन टन था वहीं 2023 में यह 684.31 मिलियन टन हो गया। 

बढ़ती कीमतों के कारण रूस से भारत के तेल आयात घटा 

यूक्रेन-रूस युद्ध के कारण पश्चिमी देशों के दबाव की अवहेलना करते हुए भारत ने रूस से सस्ते कच्चे तेल का आयात जारी रखा। लेकिन आंकड़े बताते हैं कि अब इस रियायती कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ने से रूस से भारत का आयात पिछले 11 महीने के निम्नतम स्तर पर आ गया है। रूस यूक्रेन युद्ध के बाद भारत ने  रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीद कर कई बिलियन डॉलर की विदेशी मुद्रा बचाई और साफ कर दिया था वह रूस पर लगे अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों के बजाय अपने राष्ट्रीय हित को तरजीह देगा। इस दौरान भारत चीन के बाद रूस से कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बन गया।

लेकिन अब ओपेक+ देशों द्वारा तेल उत्पादन में कटौती पर सहमति बन जाने और चीन से तेल की मांग बढ़ने के बाद रूसी कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बाद भारत के लिए यह फायदे का सौदा नहीं रह गया है। 

‘ट्रांज़िशन अवे’ का समझौता वैकल्पिक: सऊदी मंत्री

सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअज़ीज़ बिन सलमान ने बीते हफ्ते एक कार्यक्रम में कहा कि उनका देश जलवायु परिवर्तन से होने वाली समस्याओं को गंभीरता से ले रहा है, और उसने केवल तेल ही नहीं, बल्कि सभी प्रकार की ऊर्जा पर अपना ध्यान केंद्रित किया है।

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि कॉप28 में हुआ जीवाश्म ईंधन से दूर जाने (ट्रांज़िशन अवे) का समझौता कई “विकल्पों” में से एक है। 

पिछले साल दुबई में हुए महासम्मेलन में विभिन्न देश आठ “वैश्विक प्रयासों” में “योगदान करने” के लिए एक-दूसरे का “आह्वान” करने पर सहमत हुए — जिनमें से एक विकल्प “ट्रांज़िशन अवे” का भी था। हालांकि अब्दुलअज़ीज़ बिन सलमान ने दावा किया कि “यह सभी आठ प्रयास वैकल्पिक हैं”।

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