जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में पहली बार मीथेन उत्सर्जन को रोकने के लिये गंभीरता दिखी है। सम्मेलन के दूसरे ही दिन अमेरिका और यूरोपियन यूनियन समेत कुल 105 देशों ने इस समझौते पर दस्तखत किये कि वो अपने मीथेन इमीशन में 2030 तक 30% की कमी करेंगे। मीथेन कम समय तक वातावरण में मौजूद रहने वाली ग्रीन हाउस गैस है लेकिन वह कार्बन डाइ ऑक्साइड के मुकाबले कई गुना अधिक ग्लोबल वॉर्मिंग करती है। इस समझौते पर सही तरीके से अमल किया गया तो मीथेन के उत्सर्जन में 40% तक कमी हो सकती है। भारत ने कृषि और पशुपालन क्षेत्र देश के हितों को देखते हुये इस संधि पर दस्तखत नहीं किये।
दो साल पहले, हमने अंग्रेजी में एक डिजिटल समाचार पत्र शुरू किया जो पर्यावरण से जुड़े हर पहलू पर रिपोर्ट करता है। लोगों ने हमारे काम की सराहना की और हमें प्रोत्साहित किया। इस प्रोत्साहन ने हमें एक नए समाचार पत्र को शुरू करने के लिए प्रेरित किया है जो हिंदी भाषा पर केंद्रित है। हम अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद नहीं करते हैं, हम अपनी कहानियां हिंदी में लिखते हैं।
कार्बनकॉपी हिंदी में आपका स्वागत है।
आपको यह भी पसंद आ सकता हैं
-
भारत ने कॉप33 की मेज़बानी का प्रस्ताव वापस लिया
-
भारत ने संशोधित किए एनडीसी, 2035 तक उत्सर्जन 47% तक घटाने का लक्ष्य
-
पेरिस समझौते के तहत नए एनडीसी जमा नहीं करने वाले देशों पर होगी चर्चा, भारत भी सूची में
-
कूनो नेशनल पार्क में 5 शावकों का जन्म, भारत में चीतों की संख्या हुई 53
-
एनजीटी ने ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को दी हरी झंडी, कहा पर्याप्त सुरक्षा उपाय मौजूद
