राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने दिल्ली में अवैध रूप से पेड़ काटे जाने के मामलों पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। अदालत ने दिल्ली के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) को निर्देश दिया है कि पिछले पांच साल में पेड़ कटाई की शिकायतों और उन पर हुई कार्रवाई का ब्यौरा जुटाया जाए। साथ ही यह भी बताया जाए कि नियमों के तहत बदले में कितने पेड़ लगाए गए। इस पूरी जानकारी को तीन महीने के भीतर सरकारी वेबसाइट पर डालने को कहा गया है। एनजीटी ने अधिकारियों को दिल्ली वृक्ष संरक्षण अधिनियम, 1994 के तहत शिकायतों का जल्द निपटारा करने का निर्देश भी दिया। अदालत ने कहा कि आने वाले मानसून में नियमों के अनुसार क्षतिपूरक वनीकरण सुनिश्चित किया जाए।
दिल्ली-एनसीआर में पराली जलाने के बढ़ते मामलों पर सीएक्यूएम सख्त
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताई है। आयोग की बैठक में बताया गया कि 1 अप्रैल से 15 मई 2026 के बीच पंजाब में 8,986 और हरियाणा में 3,290 मामले दर्ज हुए, जो पिछले साल से काफी ज्यादा हैं।
आयोग ने राज्यों को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। साथ ही दिल्ली-एनसीआर में 46 नए वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्र लगाने की योजना पर भी चर्चा हुई। 2026-27 के लिए क्षेत्र में 4.60 करोड़ पेड़, झाड़ियां और बांस लगाने का लक्ष्य तय किया गया है।
लकड़ी जलाने से हवा में बढ़ रहा सीसा, नई रिसर्च में चेतावनी
अमेरिका के वैज्ञानिकों की एक नई रिसर्च में पाया गया है कि लकड़ी जलाने से हवा में सीसा (लेड) जैसे जहरीले तत्व बढ़ रहे हैं। सीसा एक जहरीली धातु है, जो दिमाग और तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुंचा सकती है। शोधकर्ताओं ने अमेरिका के कई इलाकों में सर्दियों के दौरान हवा के नमूनों की जांच की। इसमें पाया गया कि जहां लकड़ी ज्यादा जलाई गई, वहां हवा में सीसे के कण भी ज्यादा थे।
वैज्ञानिकों का कहना है कि पेड़ मिट्टी से पानी और पोषक तत्वों के साथ सीसा भी सोख लेते हैं, जो लकड़ी जलाने पर हवा में फैल जाता है। हालांकि इसकी मात्रा कानूनी सीमा से कम थी, लेकिन विशेषज्ञों ने कहा कि सीसे का कोई भी स्तर स्वास्थ्य के लिए पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जाता।
चीन में इलेक्ट्रिक वाहनों से प्रदूषण घटा, लाखों मौतें टलीं: अध्ययन
एक नए अध्ययन के अनुसार चीन में 2023 तक इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के बढ़ते इस्तेमाल से वायु प्रदूषण में कमी आई और लाखों लोगों की जान बची। रिसर्च में कहा गया कि हवा में बेहद छोटे प्रदूषक कण पीएम2.5 में करीब 24 प्रतिशत और कार्बन मोनोऑक्साइड गैस में 30 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज हुई। PM2.5 ऐसे बेहद छोटे कण होते हैं, जो फेफड़ों के जरिए शरीर में पहुंचकर गंभीर बीमारियां पैदा कर सकते हैं।
अध्ययन के मुताबिक इससे करीब 2.62 लाख गैर-दुर्घटनाजनित मौतें टाली जा सकीं। शोधकर्ताओं ने उपग्रह आंकड़ों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की मदद से यह विश्लेषण किया। हालांकि लाभ मुख्य रूप से आर्थिक रूप से विकसित शहरों में ज्यादा देखने को मिला।
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