पांच साल में पहली बार धीमी पड़ सकती है स्वच्छ ऊर्जा क्षमता वृद्धि
दुनियाभर में 2026 के दौरान स्वच्छ ऊर्जा क्षमता में वृद्धि की रफ्तार पांच साल में पहली बार धीमी पड़ने का अनुमान है। अंतरराष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी (इरेना) के प्रमुख फ्रांसेस्को ला कैमेरा ने इसके लिए कमजोर बिजली ट्रांसमिशन नेटवर्क और व्यापारिक बाधाओं को जिम्मेदार बताया है। उन्होंने कहा कि बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ रही है, लेकिन उसे वितरित करने और ट्रांसमिट करने वाले नेटवर्क का विस्तार उसी गति से नहीं हो रहा। चीन में भी ग्रिड की सीमाओं के कारण उत्पादित नवीकरणीय बिजली का इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है।
2025 में वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा क्षमता रिकॉर्ड 692 गीगावाट बढ़कर 5,149 गीगावाट हो गई थी। इसमें हाइड्रोपॉवर भी शामिल है। ला कैमेरा के मुताबिक, इस साल अन्य देशों में क्षमता वृद्धि चीन की सुस्ती की भरपाई नहीं कर पाएगी।
भारत को 500 गीगावाट नवीकरणीय लक्ष्य के लिए चाहिए 220 अरब डॉलर
भारत को 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य हासिल करने के लिए अगले चार से साढ़े चार वर्षों में करीब 220 अरब डॉलर के निवेश की जरूरत होगी। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव संतोष कुमार सारंगी ने बुधवार को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस निवेश में ऊर्जा उत्पादन, विनिर्माण, बिजली ट्रांसमिशन और हरित हाइड्रोजन क्षेत्र शामिल हैं।
कुल निवेश में करीब 70 अरब डॉलर सौर ऊर्जा और 40-45 अरब डॉलर पारेषण बुनियादी ढांचे पर खर्च होने का अनुमान है। पवन ऊर्जा के लिए 25-30 अरब डॉलर और हरित हाइड्रोजन के लिए 20-25 अरब डॉलर की जरूरत होगी। ऊर्जा भंडारण में भी 20 अरब डॉलर निवेश का अनुमान है। दो से पांच नवंबर तक दिल्ली में आयोजित होने वाले भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन में इस निवेश के लिए रोडमैप तैयार करने पर चर्चा होगी।
स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्य के लिए ग्रिड और बैटरी भंडारण पर निवेश बढ़ाना जरूरी: एसोचैम
उद्योग संगठन एसोचैम ने कहा है कि भारत को अपने स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने के लिए बिजली ग्रिड के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और बैटरी भंडारण क्षमता बढ़ाने की जरूरत है। कॉप31 जलवायु सम्मेलन से पहले जारी बयान में संगठन ने कहा कि केवल नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन क्षमता बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उत्पादित बिजली को ग्रिड से जोड़ना और उसकी उपलब्धता सुनिश्चित करना भी जरूरी है।
भारत की गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली क्षमता जुलाई 2026 में बढ़कर 300.5 गीगावाट हो गई थी, जो कुल स्थापित क्षमता का 54 प्रतिशत से अधिक है। एसोचैम के मुताबिक, 2030 के जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने के लिए भारत को करीब 2.5 लाख करोड़ डॉलर की जरूरत होगी। संगठन ने बैटरी भंडारण क्षमता बढ़ाने और उद्योगों के उत्सर्जन में कटौती के लिए निवेश जुटाने पर भी जोर दिया।
स्वच्छ ऊर्जा आपूर्ति शृंखला पर कुछ देशों का दबदबा दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए चुनौती: आईईए
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के प्रमुख फातिह बिरोल ने कहा है कि स्वच्छ ऊर्जा उपकरणों की वैश्विक आपूर्ति शृंखला पर कुछ देशों का बढ़ता दबदबा दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के लिए एक उभरती चुनौती है। सिंगापुर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा सप्ताह सम्मेलन में उन्होंने कहा कि क्षेत्र में बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है, लेकिन ऊर्जा उपकरणों की आपूर्ति कुछ देशों पर अत्यधिक निर्भर है।
चीन सौर पैनल, पवन ऊर्जा उपकरण, इलेक्ट्रिक वाहन और बैटरी का दुनिया का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है। बिरोल के मुताबिक, आसियान देशों में बिजली की खपत समग्र ऊर्जा खपत की तुलना में दोगुनी रफ्तार से बढ़ रही है। उन्होंने भू-राजनीतिक तनावों को भी वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए बड़ी चुनौती बताया। उनके अनुसार, पश्चिम एशिया युद्ध के बाद इलेक्ट्रिक वाहनों और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की मांग बढ़ी है तथा ऊर्जा सुरक्षा का महत्व और बढ़ गया है।