भारत में डेटा सेंटर बढ़ने से अक्षय ऊर्जा की मांग में तेजी अपेक्षित
भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डेटा सेंटर का विस्तार होने से अक्षय ऊर्जा की मांग तेजी से बढ़ने की संभावना है। विशेषज्ञों के मुताबिक, डेटा सेंटरों को बिजली उपलब्ध कराने के लिए सौर और पवन ऊर्जा के साथ ऊर्जा भंडारण क्षमता में भी बड़े निवेश की जरूरत होगी। भारत सरकार डेटा सेंटर कंपनियों को आकर्षित करने के लिए कर छूट, बिजली शुल्क में राहत और जमीन संबंधी मंजूरियों में आसानी जैसे प्रोत्साहन दे रही है।
अमेरिका में डेटा सेंटरों के संसाधनों की अधिक खपत को लेकर बढ़ते विरोध और पश्चिम एशिया में संघर्ष के जोखिम से भी कंपनियां दूसरे बाजारों की ओर रुख कर रही हैं। ऊर्जा क्षेत्र के अनुमानों के अनुसार, भारत में डेटा सेंटरों की क्षमता 2030 तक बढ़कर 12 गीगावाट हो सकती है। इनमें एआई आधारित डेटा सेंटरों की क्षमता 6.5 गीगावाट तक पहुंचने की उम्मीद है। इससे अक्षय ऊर्जा और बैटरी भंडारण परियोजनाओं में अरबों डॉलर के निवेश की जरूरत होगी।
इलेक्ट्रिफिकेशन, ग्रिड विस्तार की गति में कमी से अक्षय ऊर्जा लक्ष्य से पिछड़ी दुनिया: इरेना
दुनिया स्वच्छ ऊर्जा बदलाव के अपने लक्ष्यों को हासिल करने की राह से पीछे चल रही है। अंतरराष्ट्रीय अक्षय ऊर्जा एजेंसी (इरेना) की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, रिकॉर्ड स्तर पर अक्षय ऊर्जा क्षमता बढ़ने के बावजूद पेरिस समझौते के तहत वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने का लक्ष्य हासिल करना मुश्किल हो रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 2025 में अक्षय ऊर्जा क्षमता में रिकॉर्ड वृद्धि हुई, लेकिन बिजली ग्रिड का विस्तार इस गति के अनुरूप नहीं हुआ। ऊर्जा की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। इसके अलावा, ऊर्जा दक्षता में सुधार की रफ्तार जरूरत से काफी कम है। इससे बिजली की बढ़ती मांग की भरपाई नहीं हो पा रही है। रिपोर्ट ने बिजली व्यवस्था और ऊर्जा दक्षता में तेजी से सुधार की जरूरत बताई है।
बिजली की कमी के बीच जुलाई-अगस्त में 4% सौर ऊर्जा बर्बाद
भारत में जुलाई और अगस्त के दौरान करीब 180 करोड़ यूनिट अक्षय ऊर्जा का इस्तेमाल नहीं हो सका। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, इन दो महीनों में कुल सौर बिजली उत्पादन का लगभग चार प्रतिशत हिस्सा ग्रिड में समाहित नहीं हो पाया। इससे देश में बिजली ट्रांसमिशन ढांचे की कमियां सामने आई हैं। ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों के अनुसार, अक्षय ऊर्जा क्षमता तेजी से बढ़ने के बावजूद बिजली ग्रिड का पर्याप्त विस्तार नहीं होने से उत्पादित बिजली का पूरा इस्तेमाल करना मुश्किल हो रहा है।
यह स्थिति ऐसे समय सामने आई है, जब भारत स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को हासिल करने के लिए अक्षय ऊर्जा उत्पादन बढ़ा रहा है। देश का लक्ष्य 2030 तक 500 गीगावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता हासिल करना है। फिलहाल यह क्षमता करीब 304 गीगावाट है।
भारत में बैटरी ऊर्जा भंडारण की जरूरत 2032 तक सात गुना बढ़ने का अनुमान
भारत में अक्षय ऊर्जा उत्पादन बढ़ने के साथ बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (बीईएसएस) की जरूरत वित्त वर्ष 2031-32 तक करीब सात गुना बढ़कर 236.22 गीगावाट-ऑवर होने का अनुमान है। रुबिक्स डेटा साइंसेज की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 में यह जरूरत 34.72 गीगावाट-ऑवर रहने का अनुमान है। बढ़ती मांग पूरी करने के लिए 2032 तक करीब 3.49 लाख करोड़ रुपए के निवेश की जरूरत पड़ सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 2026 तक देश में 9.08 गीगावाट-ऑवर की भंडारण क्षमता चालू थी, जबकि 79.92 गीगावाट-ऑवर की क्षमता निर्माणाधीन थी। गुजरात और राजस्थान देश की स्थापित बड़े स्तर की बैटरी भंडारण क्षमता में लगभग 88 प्रतिशत हिस्सेदारी रखते हैं। बैटरी भंडारण से सौर और पवन ऊर्जा की अनियमित आपूर्ति को संभालने में मदद मिलेगी।