ऊर्जा भंडारण क्षमता के लिए 4 लाख करोड़ रुपए के निवेश की जरूरत: रिपोर्ट

Editorial Team30 सित॰. 2026
ऊर्जा भंडारण क्षमता के लिए 4 लाख करोड़ रुपए के निवेश की जरूरत: रिपोर्ट

भारत में नवीकरणीय ऊर्जा के तेजी से विस्तार के कारण वित्त वर्ष 2031-32 तक ऊर्जा भंडारण पर 4 लाख करोड़ रुपए से अधिक निवेश की जरूरत पड़ सकती है। केयरएज रेटिंग्स की रिपोर्ट में यह अनुमान लगाया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, जून 2026 में देश की ऊर्जा भंडारण क्षमता करीब 54 गीगावाट-ऑवर थी। 2031-32 तक जरूरत बढ़कर करीब 411 गीगावाट-ऑवर हो सकती है। देश की कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता में गैर-जीवाश्म स्रोतों की हिस्सेदारी करीब 50 प्रतिशत है। हालांकि, वास्तविक बिजली उत्पादन में इनका योगदान करीब 29 प्रतिशत है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि नवीकरणीय ऊर्जा को बिजली व्यवस्था से जोड़ने के लिए बैटरी भंडारण, पंप स्टोरेज और मजबूत ट्रांसमिशन नेटवर्क जरूरी होंगे। 

वित्त वर्ष 2027 से 2031 के बीच ट्रांसमिशन क्षेत्र में भी करीब 5.19 लाख करोड़ रुपए के निवेश का अनुमान है। कोयला-आधारित बिजली संयंत्र भी बढ़ती मांग पूरी करने में अहम बने रहेंगे।

 

भारत की स्थापित बिजली क्षमता में गैर-जीवाश्म स्रोतों की हिस्सेदारी 54.18%: भूपेंद्र यादव

पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने शनिवार को कहा कि भारत की कुल स्थापित बिजली क्षमता में गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों की हिस्सेदारी बढ़कर 54.18 प्रतिशत हो गई है। इसके साथ ही भारत ने 2030 तक स्थापित बिजली क्षमता में 50 प्रतिशत गैर-जीवाश्म ऊर्जा का लक्ष्य पहले ही हासिल कर लिया है।

यादव ने कहा कि भारत नवीकरणीय ऊर्जा की स्थापित क्षमता के मामले में दुनिया में तीसरे स्थान पर है और सौर ऊर्जा क्षमता में वृद्धि के लिहाज से दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बाजार है। उन्होंने कहा कि इससे पता चलता है कि आर्थिक विकास और जलवायु कार्रवाई साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं।

यादव नई दिल्ली में राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) के दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन के अवसर पर बोल रहे थे। सम्मेलन का विषय “पर्यावरण और जलवायु गतिशीलता का भविष्य” है।

उन्होंने कहा कि पर्यावरणीय जिम्मेदारी के प्रति भारत का दृष्टिकोण उसकी सभ्यतागत सोच पर आधारित है, जिसमें पृथ्वी को साझा विरासत और पवित्र दायित्व माना जाता है। उन्होंने कहा कि दुनिया के सामने विकल्प विकास और पर्यावरण के बीच नहीं, बल्कि सतत विकास और ऐसे विकास के बीच है जिसे लंबे समय तक कायम नहीं रखा जा सकता।

सम्मेलन में 17 देशों के न्यायविद, शिक्षाविद, नीति-निर्माता, वैज्ञानिक और पर्यावरण विशेषज्ञ शामिल हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) और एशियाई विकास बैंक (एडीबी) भी इसमें भाग ले रहे हैं। सम्मेलन में पर्यावरण और जलवायु चुनौतियों से निपटने के लिए न्यायिक, वैज्ञानिक, नीतिगत और संस्थागत उपायों पर चर्चा होगी।

 

आंध्र प्रदेश में डेटा सेंटरो को करना होगा 70% हरित बिजली का प्रयोग

आंध्र प्रदेश में डेटा सेंटरों को कम से कम 70 प्रतिशत बिजली नवीकरणीय स्रोतों से लेनी होगी। राज्य के आईटी मंत्री नारा लोकेश ने यह जानकारी दी है। आंध्र प्रदेश विशाखापत्तनम को बड़े डेटा सेंटर केंद्र के रूप में विकसित कर रहा है। लोकेश ने कहा कि इन केंद्रों में सौर, पवन, पंप स्टोरेज और बैटरी जैसे स्रोतों से मिलने वाली बिजली के इस्तेमाल पर जोर दिया जाएगा।

डेटा सेंटरों में बिजली के साथ बड़ी मात्रा में पानी की भी जरूरत होती है। सरकार इनकी पानी की जरूरत पोलावरम लेफ्ट बैंक कैनाल से पूरी करने की योजना बना रही है। कंपनियों को समुद्री पानी को उपयोग लायक बनाने वाले डिसेलिनेशन प्लांट लगाने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। एक कंपनी ने ऐसा प्लांट लगाना शुरू कर दिया है।

 

सस्ती नवीकरणीय बिजली पर निर्भर ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन: एस&पी

भारत में ग्रीन हाइड्रोजन का विस्तार सस्ती नवीकरणीय बिजली, मजबूत बुनियादी ढांचे और उद्योगों की मांग पर निर्भर करेगा। एस&पी ग्लोबल एनर्जी ने अपनी एक रिपोर्ट में यह बात कही है।

रिपोर्ट के अनुसार, ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन के लिए भरोसेमंद और सस्ती नवीकरणीय बिजली के साथ मजबूत बिजली ग्रिड की जरूरत होगी। निर्यात बढ़ाने के लिए बंदरगाहों, जहाजरानी और हाइड्रोजन आधारित उत्पादों के लिए सुरक्षा व्यवस्था भी विकसित करनी होगी।

देश में उर्वरक, रिफाइनिंग और इस्पात उद्योग ग्रीन हाइड्रोजन के बड़े ग्राहक बन सकते हैं। हालांकि, पारंपरिक हाइड्रोजन की जगह इसके इस्तेमाल की लागत बड़ी चुनौती है। एस&पी के अनुसार, केवल उत्पादन क्षमता बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। बिजली, ट्रांसमिशन, बंदरगाह, नीतियों, कीमतों और उद्योगों की दीर्घकालिक मांग पर एक साथ काम करना होगा।

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