उत्तर भारत में बेमौसम बारिश: तापमान गिरा, प्रदूषण से राहत; फसलों पर संकट
उत्तर भारत में पश्चिमी विक्षोभ और सक्रिय चक्रवाती परिसंचरण के कारण अक्टूबर में बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं का दौर जारी रहा। दिल्ली-एनसीआर में 13 अक्टूबर को सफदरजंग मौसम केंद्र पर 24 घंटे में 41.6 मिमी बारिश दर्ज हुई -- अक्टूबर में चार साल की सबसे अधिक दैनिक बारिश। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हिमालयी राज्यों में भी बारिश हुई; जम्मू-कश्मीर और हिमाचल के ऊंचे इलाकों में ताजा बर्फबारी दर्ज की गई।
पश्चिमी विक्षोभ, हरियाणा के ऊपर चक्रवाती हलचल और अरब सागर तथा बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी ने मिलकर बारिश के लिए अनुकूल स्थितियां बनाईं। इससे तापमान में गिरावट आई और दिल्ली की वायु गुणवत्ता में सुधार हुआ; 13 अक्टूबर को प्रदूषण स्तर ‘संतोषजनक’ श्रेणी में पहुंचा। हालांकि, जलभराव और यातायात बाधित होने की घटनाएं भी सामने आईं।
हरियाणा में बेमौसम बारिश ने धान और बाजरे की कटाई तथा मंडियों में खुले पड़े अनाज की खरीद को प्रभावित किया। भीगी फसल और बढ़ी नमी से किसानों को नुकसान की आशंका है।
मौसम का यह उतार-चढ़ाव ऐसे समय में आया है, जब दक्षिण-पश्चिम मानसून 15 अक्टूबर को पूरे देश से विदा हो गया। विशेषज्ञों के अनुसार, बारिश का बदलता समय और कम अवधि में तेज वर्षा कृषि तथा शहरी बुनियादी ढांचे के लिए बढ़ती चुनौती है।
इस साल अल नीनो के मजबूत होकर अक्टूबर-दिसंबर में बहुत मजबूत श्रेणी तक पहुंचने की आशंका है। इससे मौसम और वर्षा के पैटर्न पर असर पड़ सकता है, लेकिन उत्तर भारत की इस बारिश का सीधा कारण अल नीनो नहीं, बल्कि सक्रिय मौसम प्रणालियां हैं
नेपाल में फिर से अचानक आई बाढ़: घर और पुल बह गए, कम से कम 5 लोग लापता
नेपाल की बीते रविवार एक बड़ी नदी में बाढ़ से घर, पुल बह गए और हाइड्रोपावर स्टेशन का एक हिस्सा खराब हो गया है। अब तक बचाए गए 95 लोगों में नौ विदेशी शामिल हैं। ये बाढ़ नेपाल के गोरखा जिले में बूढ़ी गंडकी नदी में आई। बीबीसी ने बताया कि पांच लोग लापता हैं। नेपाल करीब दो महीने पहले तिब्बत से लगे अपने बॉर्डर वाले शहरों में आई बाढ़ से उबरने की कोशिश कर रहा है, जिसमें 1450 से ज़्यादा लोग मारे गए थे और हज़ारों लोग लापता हैं।
शुरुआती अनुमानों के मुताबिक लैंडस्लाइड ने नदी के ऊपर के हिस्से को रोक दिया था, जिससे एक टेम्पररी रुकावट बन गई थी जो बाद में टूट गई और नीचे के हिस्से में अचानक पानी का बहाव बढ़ गया। करीब 45 घर बह गए और तीन हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट और चार पुल डैमेज हो गए। अधिकारियों ने मोबाइल फ़ोन अलर्ट जारी किए और नीचे के इलाकों में रहने वाले लोगों, जिनमें त्रिशूली और नारायणी नदी सिस्टम के किनारे रहने वाले लोग भी शामिल हैं, से सुरक्षित इलाकों में जाने की अपील की।
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक सैटेलाइट ऑब्ज़र्वेशन झीलों को मैप करने, ग्लेशियर के पीछे हटने को ट्रैक करने में मदद कर सकते हैं, लेकिन यह तेज़ी से बढ़ती झील या किसी नेचुरल डैम के टूटने का पता लगाने के लिए ज़रूरी रियल-टाइम जानकारी नहीं दे सकता है, जहाँ ज़मीन पर बने सेंसर मदद कर सकते हैं। एक्सपर्ट्स ने अखबार को बताया कि सेंसर, जहाँ हालात इजाज़त दें, घंटों पहले चेतावनी दे सकते हैं, जिससे अधिकारियों को कमज़ोर बस्तियों को खाली करने का समय मिल सके।
सुपर एल-नीनो: भारत में 2027 में सर्दियां ज़्यादा सूखी और गर्म और गर्मियां ज़्यादा गर्म होंगी
भारत में 2027 में सर्दियों की शुरुआत ज़्यादा गर्म और सूखे मौसम के साथ होगी। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक गर्मियों में तापमान सामान्य से अधिक होगा और सुपर एल नीनो बनने से पानी, फसलों, बिजली और सेहत पर नया दबाव पड़ेगा।
मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक लगभग 100% संभावना है कि एल नीनो फरवरी 2027 तक बना रहेगा, जिससे हिमालय में बेमौसम गर्म तापमान और संभावित ‘बर्फ़ का सूखा’ आएगा। आर्टिकल में बताया गया है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून के बाद, जो लगभग 13% बारिश की कमी के साथ खत्म हुआ, मिट्टी में नमी कम होने और जलाशयों के घटते लेवल से गेहूं जैसी रबी की फसलों (जिन्हें ठंडे तापमान की ज़रूरत होती है) को खतरा है और पीने के पानी और हाइड्रोपावर के लिए खतरा बढ़ गया है।
सितंबर में बना सुपर एल नीनो इवेंट, चीनी क्लाइमेट सेंटर ने दी जानकारी
सीजीटीएन की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के नेशनल क्लाइमेट सेंटर (एनसीसी) ने कहा कि सितंबर में इक्वेटोरियल सेंट्रल और ईस्टर्न पैसिफिक में एक सुपर एल नीनो इवेंट बना है एनसीसी के अनुसार, समुद्र की सतह का तापमान सुपर एल नीनो इवेंट के लिए तय सीमा तक पहुँच गया था।
शिन्हुआ में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक इस इवेंट से 2027 में यांग्त्ज़ी नदी बेसिन में 'बहुत ज़्यादा बाढ़' का खतरा बढ़ जाएगा। अख़बार ने लिखा कि बाढ़ कंट्रोल के लिए चीन के तरीके में ‘बड़ा बदलाव’ हो रहा है, क्योंकि रोज़ाना बहुत ज़्यादा बारिश की घटनायें औसतन 31% ज़्यादा बार हुई हैं। ‘सूखे और बाढ़ के बीच तेज़ी से बदलाव’ भी ज़्यादा बार होने लगे हैं, जिससे उत्तरी चीन में बाढ़ कंट्रोल एक 'लगातार टेस्ट' बन गया है।
ग्लोबल नॉर्थ की तुलना में ग्लोबल साउथ में अर्बन हीट का खतरा पांच गुना तेज़ी से बढ़ रहा है
ग्लोबल नॉर्थ की तुलना में ग्लोबल साउथ के देशों में शहरी हीटवेव का असर पांच गुना ज़्यादा है। कम्युनिकेशंस अर्थ एंड एनवायरनमेंट ने नई स्टडी में मौजूदा ग्लोबल हीट रिस्क असेसमेंट में सिस्टमैटिक बायस का पता लगाया गया, जिससे तेज़ी से गर्म होती दुनिया में क्लाइमेट जस्टिस को आगे बढ़ाने का आधार मिला।
इस स्टडी में 2000-2019 के दौरान एक मल्टीडाइमेंशनल सोशल वल्नरेबिलिटी इंडेक्स पेश करके 1,029 ग्लोबल शहरों में रिस्क असेसमेंट किया गया। नतीजों से पता चला कि दुनिया भर में शहरी हीट रिस्क बढ़ रहा है, ग्लोबल साउथ में यह ट्रेंड ग्लोबल नॉर्थ की तुलना में लगभग पाँच गुना ज़्यादा है।