नेपाल में बाढ़ से 1,400 से ज्यादा मौतें, पुनर्निर्माण के लिए 5 अरब डॉलर की मांग
हिमालयी ग्लेशियर ढहने के बाद आई भीषण बाढ़ से नेपाल में मरने वालों की संख्या 1,429 पहुंच गई है और नेपाल तथा तिब्बत में 5,649 से अधिक लोग अब भी लापता हैं। नेपाल ने शुरुआती पुनर्निर्माण के लिए करीब 5 अरब डॉलर की अंतरराष्ट्रीय मदद मांगी है और इसे ‘क्लाइमेट जस्टिस’ का मुद्दा बताया है। नेपाल का तर्क है कि उसका कार्बन इमीशन बहुत कम है, फिर भी उसे जलवायु परिवर्तन के गंभीर प्रभावों का सामना करना पड़ रहा है।
संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने हिमालयी क्षेत्र में भविष्य में हिमनद बाढ़ के गंभीर जोखिम की चेतावनी दी है। 2020 के एक अध्ययन में नेपाल, चीन और भारत में 47 संभावित खतरनाक ग्लेशियल झीलों की पहचान की गई थी। बाढ़ से संपत्ति, घरों और बुनियादी ढांचे को कम से कम 2.56 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है। नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले बाढ़ के बाद पुनर्निर्माण और सहायता पर भारत से बातचीत के लिए नई दिल्ली पहुंचेंगे।
हिमालय ‘टिपिंग पॉइंट’ के करीब, करोड़ों लोगों की आजीविका और जल सुरक्षा पर खतरा
हिमालय के ग्लेशियर एक दशक पहले की तुलना में तेजी से पिघल रहे हैं और यह क्षेत्र जल सुरक्षा के लिहाज से एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच रहा है। एक नए अध्ययन के मुताबिक, सदी के मध्य तक हिमालय ‘पीक वाटर’ की स्थिति में पहुंच सकता है – यानी वह समय जब नदियों का बहाव बढ़ने के बजाय घटने लगेगा। हिंदू कुश-हिमालय क्षेत्र में करीब 40,000 ग्लेशियर हैं और भारत में लगभग 200 ग्लेशियल झीलों को उच्च जोखिम वाली श्रेणी में रखा गया है, जिनमें 56 को ‘बहुत अधिक जोखिम’ वाला माना गया है।
ग्लेशियरों के पीछे हटने से अस्थिर झीलें बन रही हैं, जो ढीली चट्टानों और बर्फ से घिरी हैं और नीचे बसे लाखों लोगों के लिए खतरा पैदा करती हैं। अध्ययन के मुताबिक, हिमालय भारत के GDP में 20% से अधिक योगदान देने वाली आर्थिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण है। देश की करीब 18% भूमि में फैला यह क्षेत्र लगभग 35% प्राकृतिक आपदाओं का सामना करता है।
गर्मी और कमजोर मानसून से सितंबर में बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर के करीब
लगातार गर्मी और कमजोर मानसून के कारण सितंबर में भारत की बिजली मांग असामान्य रूप से बढ़ गई है। 10 सितंबर को देश की उच्चतम बिजली मांग (पीक पावर डिमांड) 269 गीगावॉट तक पहुंच गई, जो सितंबर में अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है और मई की गर्मियों में दर्ज 270 गीगावॉट के वार्षिक रिकॉर्ड के करीब है। बढ़ते तापमान के कारण एयर कंडीशनर और कूलिंग की मांग बनी हुई है।
वहीं, कम बारिश से सिंचाई की जरूरत बढ़ने के कारण कृषि क्षेत्र में पंपिंग के लिए बिजली की मांग भी बढ़ रही है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने सितंबर में देश के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से ऊपर रहने का अनुमान जताया था। 1 जून से 9 सितंबर के बीच देश में 648 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्य बारिश 760.6 मिमी होती है – यानी करीब 15% की कमी। रिपोर्ट के मुताबिक, अल नीनो से जुड़े मौसम का असर भी बिजली मांग बढ़ने की एक वजह है।
अल नीनो के बीच इंडोनेशिया में जंगलों की आग, सदी के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है उत्सर्जन
इंडोनेशिया में बड़े पैमाने पर लगी जंगलों की आग ने 2026 में अब तक करीब 76 मिलियन टन कार्बन (MtC) उत्सर्जित किया है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, अगर मौजूदा रुझान जारी रहा तो इस साल आग से होने वाला उत्सर्जन इस सदी के रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच सकता है। 2015 और 1997 की तरह इस बार भी आग का प्रकोप अल नीनो वर्ष के दौरान बढ़ा है।
प्रशांत महासागर के तापमान से जुड़ी यह प्राकृतिक जलवायु घटना इंडोनेशिया में तापमान बढ़ाने और जमीन को अधिक शुष्क बनाने में भूमिका निभाती है, जिससे बड़े पैमाने पर जंगलों में आग के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनती हैं। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि जून 2026 में शुरू हुआ मौजूदा अल नीनो 2027 तक जारी रह सकता है और यह रिकॉर्ड पर दर्ज सबसे मजबूत घटनाओं में शामिल हो सकता है। शोध के मुताबिक, प्राकृतिक स्रोतों -- जैसे पर्माफ्रॉस्ट, आर्द्रभूमि और जंगलों की आग -- से गर्मी के कारण बढ़ने वाला ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन वैश्विक तापमान वृद्धि को 20-30% तक बढ़ा सकता है।
बिहार में करीब 50 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित, कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर
बिहार के 15 जिलों में करीब 50 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। हाल की भारी बारिश के कारण पहले से खतरे के निशान से ऊपर बह रहीं नदियों का जलस्तर और बढ़ गया है। प्रभावित जिलों में पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा और अररिया शामिल हैं। भागलपुर के सुल्तानगंज में सोमवार शाम गंगा का जलस्तर 36.19 मीटर था, जो खतरे के निशान से 1.69 मीटर ऊपर है।
कोसी, बूढ़ी गंडक, बागमती और घाघरा समेत कई नदियां भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। राज्य में इस महीने अब तक 112.7 मिमी बारिश हुई है, जो सामान्य से करीब 6% अधिक है। इस बीच गुजरात में भी भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। अहमदाबाद में जलभराव के कारण कम से कम तीन अंडरपास बंद करने पड़े।