एल नीनो: 2027 के अंत तक भुखमरी की चपेट में आ सकते हैं 5 करोड़ लोग

Editorial Team17 अग॰. 2026
एल नीनो: 2027 के अंत तक भुखमरी की चपेट में आ सकते हैं 5 करोड़ लोग

संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक तेजी से बढ़ रहा एल नीनो मौसम तंत्र 2027 के अंत तक करीब पांच करोड़ लोगों को गंभीर खाद्य संकट में धकेल सकता है। गौरतलब है कि पहले ही 45 देशों में करीब 22.5 करोड़ लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं। विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) ने चेतावनी दी है कि एल नीनो अपेक्षाकृत कमजोर रहने पर भी कई देशों की स्थिति और बिगड़ सकती है।

मध्य और दक्षिण अमेरिका, कैरेबियाई क्षेत्र तथा दक्षिणी अफ्रीका के सबसे ज्यादा प्रभावित होने की आशंका है। दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में सामान्य से कम बारिश से कृषि और किसानों पर असर पड़ सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, अफ्रीका के कुछ हिस्सों में वर्षों से जारी सूखे और ईरान युद्ध के कारण खाद्य कीमतों पर बढ़ते दबाव ने पहले ही खाद्य संकट को गंभीर बना दिया है। एल नीनो इन समस्याओं को और बढ़ा सकता है।  वैज्ञानिकों के अनुसार, बारिश के पैटर्न में बदलाव और फसल उत्पादन में गिरावट से खाद्य कीमतों और भुखमरी का संकट गहरा सकता है।

 

भारत में 11% कम वर्षा, हाल की बारिश से महज 1% सुधार

देश में मानसूनी बारिश की कमी 9 अगस्त तक 11 प्रतिशत रही। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, 2 अगस्त को यह कमी 12 प्रतिशत थी और हाल की बारिश से इसमें सिर्फ एक प्रतिशत सुधार हुआ। दिल्ली, हरियाणा और पूर्वी राजस्थान में अगस्त की शुरुआत में अच्छी बारिश हुई, लेकिन इसका देश के कुल मानसून आंकड़े पर सीमित असर पड़ा। बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, पंजाब और आंध्र प्रदेश जैसे कृषि प्रधान राज्यों में बारिश की कमी चिंता का कारण बनी हुई है।

करीब 88 प्रतिशत खरीफ क्षेत्र में बुवाई पूरी हो चुकी है, लेकिन धान का रकबा पिछले साल की समान अवधि की तुलना में चार प्रतिशत कम है। 9 अगस्त तक 12 राज्यों में बारिश की कमी 20 प्रतिशत या उससे अधिक रही। पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में कमी सबसे ज्यादा 25 प्रतिशत रही, जबकि दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत में यह 17 प्रतिशत और उत्तर-पश्चिम भारत में 11 प्रतिशत रही। हालांकि, अगस्त की बारिश से जलाशयों में पानी का स्तर बढ़ने और पनबिजली उत्पादन को मदद मिलने की उम्मीद है।

 

मुंबई में भूस्खलन, 8 की मौत; असम की बाढ़ में मरने वालों की संख्या 100 के पार

भारी बारिश के बीच मुंबई में भूस्खलन से कम से कम आठ लोगों की मौत हो गई। अधिकारियों के मुताबिक घाटकोपर में पहाड़ी का एक हिस्सा घनी बस्ती के दो-तीन मकानों पर गिर गया। विशेषज्ञों ने अनियोजित शहरीकरण, पहाड़ी क्षेत्रों में निर्माण और जल निकासी की खराब व्यवस्था को मुंबई की बढ़ती मानसूनी आपदा जोखिम की वजह बताया है।

वहीं झारखंड में आकाशीय बिजली गिरने से कम से कम 14 लोगों की मौत हुई है, जिनमें ज्यादातर गिरिडीह जिले के खेतों में काम कर रहे लोग थे।

उधर असम में भारी बारिश और बाढ़ से मरने वालों की संख्या 104 पहुंच गई है। राज्य के सात जिलों में बाढ़ से प्रभावित लोगों की संख्या 78,000 से अधिक है, जबकि करीब 5,000 लोग राहत कैम्पों में रह रहे हैं। केरल में भी बारिश और बाढ़ के चलते 18 लोगों की जान गई और हजारों लोग विस्थापित हुए हैं।

 

चमोली सुरंग हादसा: 8 मजदूरों की मौत, 2 अब भी लापता

उत्तराखंड के चमोली जिले में निर्माणाधीन सुरंग में भूस्खलन के बाद मलबा और पानी भरने से हुए हादसे में आठ मजदूरों की मौत हो गई, जबकि दो अब भी लापता हैं। अधिकारियों के मुताबिक, रविवार को हादसे के चौथे दिन भी झारखंड के लुकास टोपनो और छत्तीसगढ़ के चेतन पोयाम की तलाश जारी रही। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), आईटीबीपी और पुलिस की टीमें बचाव अभियान में जुटी हैं। सुरंग में भरा पानी लगातार बाहर निकाला जा रहा है और मलबे तथा भारी मशीनों को हटाया जा रहा है। बचाव दल मलबे के बीच छोटी-छोटी जगहों की भी जांच कर रहे हैं। चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार ने हादसे के कारणों की जांच के लिए मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए हैं। हादसे में घायल 12 मजदूरों को बचाया गया था।

 

नागालैंड में खनन को असम की बाढ़ की एक वजह मानने पर वैज्ञानिक अध्ययन की मांग

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने कहा है कि नागालैंड में खुले तौर पर हो रहे कोयला, पत्थर और रेत के खनन मुद्दे को वह केंद्र सरकार के सामने उठायेंगे। सरमा ने कहा कि इस खनन को राज्य में आई भीषण बाढ़ की संभावित वजहों में शामिल कर केंद्र के सामने उठाया जाएगा। महत्वपूर्ण है इस साल बाढ़ में करीब 100 लोगों की मौत हो चुकी है। मृतकों में बड़ी संख्या नागालैंड से सटे शिवसागर, चराइदेव और जोरहाट जिलों की है, जहां आम तौर पर बड़े पैमाने की बाढ़ का इतिहास नहीं रहा है।

बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा करने के बाद सरमा ने कहा कि नागालैंड में खनन रोकने का अधिकार असम सरकार के पास नहीं है। उन्होंने कहा कि वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए वैज्ञानिक अध्ययन जरूरी है। शिवसागर के विधायक अखिल गोगोई समेत कई स्थानीय लोगों ने नागालैंड की तलहटी में कथित अवैध रेत, पत्थर और कोयला खनन तथा बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई को बाढ़ से जोड़ा है। उनका कहना है कि इससे पहाड़ियों की प्राकृतिक जल-रोधक क्षमता कम हुई और भारी बारिश के बाद पानी तेजी से असम की ओर आया। हालांकि, नागालैंड के संगठनों ने इन दावों को खारिज किया है।

सरमा ने यह भी कहा कि कुछ स्थानों पर राजमार्गों ने बाढ़ के पानी के प्राकृतिक बहाव को बाधित किया। उन्होंने अतिरिक्त क्रॉस-ड्रेनेज संरचनाएं बनाने और संवेदनशील इलाकों में तटबंध विकसित करने की बात कही। प्रभावित परिवारों के लिए मकानों के नुकसान का आकलन 9 अगस्त से शुरू करने और राहत-पुनर्वास में तेजी लाने का भी ऐलान किया गया है।

इस बीच बाढ़ प्रभावितों की मदद के लिए आम लोगों और विभिन्न संगठनों ने बड़े पैमाने पर सहयोग किया है। स्वयंसेवकों ने पूजा स्थलों की सफाई, खेतों और घरों से गाद हटाने तथा पशुओं के शवों को हटाने का काम किया। नाई संघ ने मुफ्त बाल काटे, जबकि मैकेनिकों ने बाढ़ में क्षतिग्रस्त वाहनों की बिना मजदूरी मरम्मत शुरू की है।

 

जुलाई में वैश्विक समुद्री तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा

कोपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस के अनुसार, जुलाई 2026 में वैश्विक औसत समुद्री सतह का तापमान अब तक किसी भी साल की जुलाई की तुलना में सबसे अधिक रहा। गैर-ध्रुवीय समुद्री क्षेत्रों का औसत तापमान 20.96 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो 2023 के जुलाई के 20.89 डिग्री के पिछले रिकॉर्ड से अधिक है। रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिमी यूरोप में भीषण गर्मी और भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में विकसित हो रहा अल नीनो इसके प्रमुख कारण रहे। समुद्र के बढ़ते तापमान से समुद्री जीवों पर गंभीर असर पड़ सकता है और लॉब्स्टर, केकड़े, सीप तथा अन्य जीवों की बड़े पैमाने पर मौत का खतरा बढ़ सकता है।

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