जुलाई में सामान्य से कम बारिश का अनुमान, आईएमडी ने एल नीनो समेत पांच कारण गिनाए
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने जुलाई में देशभर में सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान जताया है। विभाग के अनुसार, इस महीने दीर्घकालिक औसत (एलपीए) का 94 प्रतिशत वर्षा होने की संभावना है। एलपीए किसी क्षेत्र में पिछले कई दशकों (आमतौर पर 30-50 वर्षों) की औसत वर्षा को कहा जाता है। हालांकि, उत्तर-पश्चिम, पूर्वोत्तर, पूर्व-मध्य और पूर्वी प्रायद्वीपीय भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य या उससे अधिक बारिश हो सकती है।
आईएमडी ने जून में कम वर्षा के लिए पांच प्रमुख कारण बताए हैं। इनमें मैडन-जूलियन ऑसिलेशन (एमजेओ) यानी भूमध्य रेखा के आसपास बनने वाली बादलों और हवाओं की चलती प्रणाली का प्रतिकूल चरण, कम दबाव वाले क्षेत्रों का नहीं बनना, चक्रवाती प्रणालियों की बदली दिशा और एल नीनो का असर शामिल हैं। एल नीनो प्रशांत महासागर के तापमान में बदलाव से जुड़ी जलवायु घटना है, जो भारत में मानसून की बारिश को कमजोर कर सकती है।
आईएमडी ने अगले दो-तीन दिनों में मानसून के उत्तर भारत के शेष हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए अनुकूल परिस्थितियां भी बताई हैं।
मॉनसून: यूपी में हीटवेव लेकिन उत्तर-पूर्व में भारी बारिश
देश में इस साल मानसून देर से आया लेकिन उसके आगे बढ़ने के साथ साथ मौसम के दो बिल्कुल अलग-अलग रूप देखने को मिल रहे हैं। एक ओर पूर्वी उत्तर प्रदेश भीषण लू की चपेट में है, वहीं पूर्वोत्तर भारत में अत्यधिक से लेकर बेहद भारी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 27 से 29 जून के बीच कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी वर्षा हो सकती है। अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में भी भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। असम के कुछ जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है और स्थानीय प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
दूसरी ओर, पूर्वी उत्तर प्रदेश में मानसून की प्रगति धीमी रहने के कारण लू का प्रकोप जारी है। वहीं दिल्ली-एनसीआर में गरज-चमक, तेज हवाओं और हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों में मानसून उत्तर भारत के और हिस्सों में आगे बढ़ेगा, जिससे उत्तर प्रदेश सहित कई क्षेत्रों को गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है।
दिल्ली में मॉनसून में देरी, जून में 55.6% कम बारिश कम, हीटवेव जारी
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के आंकड़ों के मुताबिक, जून में दिल्ली में बारिश की कमी 50% से ज़्यादा रही। सोमवार को शहर में लगातार दूसरे दिन हीटवेव की स्थिति रही और अधिकतम तापमान 42.4°C तक पहुंच गया। हालांकि, हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, दिन के आखिर में शहर के कुछ हिस्सों में छिटपुट बारिश और तेज़ हवाओं से थोड़ी राहत मिली।
द टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) की रिपोर्ट के अनुसार, जून में पूरे देश में बारिश की कमी 43% थी, जिसके जुलाई में 10% तक कम होने की उम्मीद है, क्योंकि तब तक मॉनसून पूरे देश में फैल जाएगा।
भीषण गर्मी से महिला असंगठित श्रमिकों को हर साल 57 अरब डॉलर का नुकसान: रिपोर्ट
भीषण गर्मी का सबसे अधिक आर्थिक असर असंगठित क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं पर पड़ रहा है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, यूरोप और अमेरिका को छोड़कर दुनिया भर में महिला असंगठित श्रमिकों को हर साल लगभग 57 अरब डॉलर (करीब 4.9 लाख करोड़ रुपये) की आय का नुकसान हो रहा है। यदि प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो वर्ष 2050 तक यह नुकसान 44 प्रतिशत बढ़ सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, गर्मी के कारण महिलाओं की कार्यक्षमता घटती है, स्वास्थ्य जोखिम बढ़ते हैं और उनकी आमदनी पर सीधा असर पड़ता है। भारत के अहमदाबाद जैसे शहरों में असंगठित क्षेत्र की महिला श्रमिक अपनी वार्षिक आय का करीब 7 प्रतिशत केवल भीषण गर्मी की वजह से गंवा देती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन, तेज़ी से बढ़ते शहरीकरण और सामाजिक असमानताओं के कारण यह संकट और गहरा सकता है। इसलिए हीट एक्शन प्लान, सुरक्षित कार्यस्थल और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करना जरूरी है।
यूरोप में हीटवेव, जलवायु परिवर्तन का स्पष्ट प्रभाव
यूरोप में भारी हीटवेव का संकट छाया है। पश्चिमी यूरोप के जर्मनी और इटली में दर्जनों मौतों से जुड़ी हीटवेव पूरब की ओर फैल गई और तापमान 40C से ज़्यादा रिकॉर्ड किया गया।
डेनमार्क के मौसम विज्ञान संस्थान के मुताबिक, शनिवार को डेनमार्क में अब तक का सबसे ज़्यादा तापमान रिकॉर्ड किया गया। माइक्रो ब्लॉगिंग साइट X पर एक पोस्ट में कहा गया, "ओडेंस के उत्तर में 36.6C के साथ, 1874 में मेज़रमेंट शुरू होने के बाद से यह अब तक का सबसे गर्म दिन है।"
अंग्रेज़ी वेबसाइट द गार्डियन के मुताबिक स्लोवाकिया में शुक्रवार की रात रिकॉर्ड पर सबसे गर्म थी, और तापमान 26.3C से नीचे नहीं गया। ब्रिटेन, फ्रांस, स्विट्जरलैंड और जर्मनी में जून में रिकॉर्ड गर्मी पड़ी है, और पोलैंड की ओर बढ़ते हुए यह वेदर सिस्टम और भी रिकॉर्ड बना सकता है।
यूके में, शनिवार को खुले पानी में तैरने में दिक्कत होने के बाद एक किशोर, दो पुरुषों और एक महिला की मौत हो गई। शुक्रवार को एक और पिछले हफ्ते बुधवार को एक और मौत के साथ, हाल ही में हीटवेव के दौरान डूबने वालों की कुल संख्या छह हो गई है। UK में मई में हीटवेव के दौरान पानी से जुड़ी घटनाओं में कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई।
वैज्ञानिकों ने कहा कि इंसानों के बनाए क्लाइमेट क्राइसिस के बिना हीटवेव लगभग नामुमकिन होती, जिसकी वजह से इस हफ़्ते रात का तापमान दो दशक पहले के मुकाबले 100 गुना ज़्यादा हो गया है।
इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक वैज्ञानिक रिसर्च ये बता रही हैं कि यूरोप की हीटवेव के पीछे क्लाइमेट चेंज स्पष्ट कारण है। यूरोप में जो हीटवेव हुई उसके लिए ओमेगा ब्लॉक फैक्टर को ज़िम्मेदार बताया जा रहा है जिसे हीट डोम इफेक्ट भी कहते हैं।
वेनेजुएला में भीषण भूकंप, 1,943 लोगों की मौत
वेनेजुएला में 24 जून को आए दो शक्तिशाली भूकंपों में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,943 हो गई है, जबकि घायलों की संख्या लगभग दोगुनी होकर 10,571 पहुंच गई है। अधिकारियों के अनुसार, शुरुआती दो दिनों में 5,380 लोगों को जीवित बचाया गया था, लेकिन पिछले तीन दिनों में राहत अभियान काफी धीमा पड़ गया है।
मंगलवार तक केवल एक छोटे बच्चे को मलबे से जीवित निकाला जा सका। इस बीच, संयुक्त राष्ट्र और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चेतावनी दी है कि देश की पहले से कमजोर स्वास्थ्य व्यवस्था पर भारी दबाव है। भूकंप में 38 अस्पताल क्षतिग्रस्त हुए हैं और हजारों विस्थापित लोग खुले में या अस्थायी शिविरों में रहने को मजबूर हैं। राहत एजेंसियों ने भोजन, स्वच्छता और संक्रामक बीमारियों के बढ़ते खतरे पर चिंता जताई है। यूनिसेफ के अनुसार, देशभर में करीब 6.8 लाख बच्चों को मानवीय सहायता की तत्काल जरूरत है।