एल नीनो की घोषणा: क्या भारत में मॉनसून कमजोर होगा?
भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में अल नीनो की स्थिति बनने के कारण मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) भीषण गर्मी और कमजोर मॉनसून को लेकर अलर्ट पर है। अंग्रेज़ी अख़बार हिन्दुस्तान टाइम्स में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक इस साल एशिया के बड़े हिस्सों में गर्मी बढ़ने और मौसम के शुष्क रहने की संभावना है।
अल नीनो का संबंध मॉनसून में सामान्य से कम बारिश और गर्मियों के महीनों में तापमान बढ़ने से है। आईएमडी ने 29 मई को अपने मॉनसून पूर्वानुमान को कम करते हुए कहा था कि देश में बारिश सामान्य से कम, यानी लॉन्ग पीरियड एवरेज (एलपीए) का 90% रहने की संभावना है, जिसमें ±4% की मॉडल त्रुटि (एरर) मार्जिन हो सकती है। अप्रैल में जारी पिछले पूर्वानुमान में बारिश एलपीए का 92% रहने का अनुमान लगाया गया था।
मॉनसून का महत्व 'बहुत अधिक है' क्योंकि 'देश के कुल बोए गए क्षेत्र के लगभग आधे हिस्से में सिंचाई की सुविधा नहीं है, और यह सिस्टम 91 प्राकृतिक जलाशयों को फिर से भरता है जो बिजली उत्पादन और पीने का पानी उपलब्ध कराते हैं। यह हालात ऐसे समय में पैदा हुए हैं जब किसान पहले से ही पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण उर्वरक आपूर्ति में संभावित कमी का सामना कर रहे हैं।'
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने ईरान के खिलाफ अमेरिका और इज़राइल के युद्ध को वैश्विक आपातकाल करार दिया है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने 2 जून को कहा, "दुनिया को इसे जलवायु संबंधी एक जरूरी चेतावनी के तौर पर लेना चाहिए।"
मानसून 2026: आईएमडी ने केरल के दो ज़िलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया
द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, आईएमडी ने केरल के दो ज़िलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है और राज्य के कई हिस्सों में तेज़ हवाओं और मध्यम बारिश के साथ आंधी-तूफ़ान की भविष्यवाणी की है, जहाँ दक्षिण-पश्चिम मानसून अभी भी सक्रिय है।
इन दो ज़िलों के साथ-साथ राज्य के तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, पथानामथिट्टा, कोट्टायम, त्रिशूर, मलप्पुरम, कोझिकोड, कन्नूर और कासरगोड ज़िलों में भी मध्यम बारिश और 40-50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से चलने वाली ज़मीनी हवाओं के साथ आंधी-तूफ़ान की भविष्यवाणी की गई है।
इस बीच, बुधवार (10 जून, 2026) को केरल के पाँच ज़िलों -- कासरगोड, कन्नूर, वायनाड, कोझिकोड और मलप्पुरम - के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है, जहाँ कुछ जगहों पर भारी बारिश की संभावना है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने बुधवार (10 जून, 2026) को तेलंगाना के चार ज़िलों -- विकाराबाद, महबूबनगर, नारायणपेट और जोगुलम्बा गडवाल -- के लिए भी भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। केरल में मानसून 4 जून को पहुँचा, जो सामान्य समय (लगभग 1 जून) से तीन दिन की देरी थी।
भारत में भीषण गर्मी के एक दिन में 3,400 अतिरिक्त मौतें!
यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफ़ोर्निया, बर्कले के वैज्ञानिकों की एक स्टडी के मुताबिक भीषण गर्मी के एक दिन में अनुमानित 3,400 अतिरिक्त मौतें होती हैं, जबकि पांच दिनों की हीटवेव (लू) से भारत में लगभग 30,000 अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं। हिंदुस्तान टाइम्स में प्रकाशित रिपोर्ट बताती है कि शोधकर्ताओं ने भारत के 10 शहरों में गर्मी से होने वाली मौतों पर किये गये कई शहरों के अध्ययनों के नतीजों को पूरे ज़िलों पर लागू किया।
इंडिया टुडे ने कहा ने कहा कि ये आंकड़े इसलिए अहम हैं क्योंकि सरकारी गिनती बहुत कम है – “कभी-कभी खराब मौसम में सिर्फ़ कुछ सौ, क्योंकि गर्मी से होने वाली कई मौतों को उस श्रेणी में नहीं रखा जाता”।
द वायर ने कहा कि स्टडी में लगाए गए अनुमान शायद अभी भी 'कम करके आंके गए' (conservative) हैं। इस वेबसाइट के मुताबिक “गर्मी को लेकर सबूतों पर आधारित ऐसे अनुमान हमें गर्मी से निपटने में सक्षम इंफ्रास्ट्रक्चर, सिस्टम और प्रक्रियाओं में निवेश की वकालत करने में मदद कर सकते हैं”।
उधर बीबीसी न्यूज़ ने कहा कि नई स्टडी के अनुसार, पांच दिन की भीषण लू के दौरान अकेले उत्तर प्रदेश में 8,000 से ज़्यादा अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं।
दशकों बाद कूनो में दिखी दुर्लभ जंगली बिल्ली 'काराकल'
मध्य प्रदेश के श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क में दशकों बाद दुर्लभ जंगली बिल्ली प्रजाति काराकल की मौजूदगी दर्ज की गई है। हाल ही में किए गए कैमरा ट्रैप सर्वेक्षण के दौरान इस दुर्लभ वन्यजीव की तस्वीर कैद हुई, जिसे संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
काराकल को उसकी लंबी काली कान-झब्बों, फुर्तीले शरीर और बेहतरीन शिकार कौशल के लिए जाना जाता है। इसे अक्सर ‘घासभूमि का भूत’ (Ghost of the Grasslands) भी कहा जाता है क्योंकि यह बेहद दुर्लभ और कम दिखाई देने वाला शिकारी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि काराकल की वापसी कूनो के पारिस्थितिकी तंत्र में सुधार और जैव विविधता के संरक्षण का सकारात्मक संकेत है। कूनो राष्ट्रीय उद्यान पहले से ही चीता पुनर्स्थापन परियोजना के कारण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहा है।
कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघ के हमले में वनकर्मी की मौत
मध्य प्रदेश के मंडला जिले स्थित कान्हा टाइगर रिजर्व में गश्त के दौरान बाघ के हमले में एक वनकर्मी की मौत हो गई। अधिकारियों के अनुसार, 29 वर्षीय लखन सिंह रविवार सुबह वन सुरक्षा दल के साथ नियमित गश्त पर थे, तभी नकटी घाटी बीट के घने जंगल में वह अपने साथियों से कुछ पीछे रह गए। इसी दौरान एक बाघ ने उन पर हमला कर दिया। साथी कर्मचारियों को बचाव का मौका नहीं मिला और लखन सिंह की मौके पर ही मौत हो गई।