नेपाल में ग्लेशियर ढहने से तबाही, मृतकों की संख्या 900 के पार; 4,000 से अधिक लापता
फोटो: Wikimedia Commons
नेपाल और चीन में बचाव दल हिमालय में ग्लेशियर ढहने के बाद आई भीषण बाढ़ और मलबे में फंसे हजारों लोगों की तलाश में जुटे हैं।
पीटीआई के मुताबिक, अब तक 939 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि नेपाल-चीन सीमा के दोनों ओर 4,000 से अधिक लोग लापता हैं। बुधवार को बर्फ, चट्टान, मिट्टी और मलबे का तेज बहाव पहाड़ी घाटियों और नदियों में फैल गया, जिससे बड़े पैमाने पर तबाही हुई। नेपाल में अज्ञात शवों के सामूहिक अंतिम संस्कार के लिए देवघाट के जंगल में सैकड़ों कब्रें खोदी गई हैं और भविष्य में डीएनए के जरिए पहचान में मदद के लिए विस्तृत रिकॉर्ड तैयार किए जा रहे हैं।
लापता लोगों में भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और कनाडा के नागरिक भी शामिल हैं। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) ने स्पष्ट किया कि शुरुआती रिपोर्ट में जिस 5.2 तीव्रता के भूकंप का उल्लेख था, वह वास्तव में ग्लेशियर से बर्फ और चट्टानों के ढहने तथा मलबे के बहाव से पैदा हुआ भूकंपीय झटका था – वहां कोई भूकंप नहीं आया था। संयुक्त राष्ट्र के जलवायु प्रमुख साइमन स्टील ने कहा कि इंसानी गतिविधियों से बढ़ रहा तापमान ऐसी आपदाओं को अधिक संभावित, लगातार और गंभीर बना रहा है।
मध्य प्रदेश में करीब 1,000 लोगों का रेस्क्यू, 12 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट
मध्य प्रदेश के चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के उफान के बाद करीब 1,000 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। लगातार बारिश के कारण नदी खतरे के निशान से करीब 13 मीटर ऊपर पहुंच गई, जिससे मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमा के दोनों ओर घरों, होटलों, मंदिरों और धर्मशालाओं में पानी भर गया। मौसम विभाग के पूर्वानुमानों के बीच देश के 12 से अधिक राज्यों में भारी बारिश, गरज और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की गई है।
पूर्वी मध्य प्रदेश के अनूपपुर, छतरपुर, दमोह, डिंडोरी, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, सागर, सीधी, सिंगरौली और उमरिया जैसे जिलों में अचानक बाढ़ और जलभराव का खतरा है। लोगों को तेज बहाव वाले पानी में जाने और बाढ़ग्रस्त सड़कों, पुलों या नालों को पार करने से बचने की सलाह दी गई है। दक्षिणी, पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्यों में तेज हवाओं, आंधी और बिजली गिरने का भी खतरा है। किसानों को जल निकासी सुनिश्चित करने, तैयार फसलों और पशुओं की सुरक्षा करने तथा आंधी-बिजली के दौरान खेतों में काम न करने की सलाह दी गई है।
बढ़ती गर्मी और उमस से लखनऊ में 2050 तक हर साल 4,000 मौतों का खतरा: अध्ययन
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बढ़ती गर्मी के साथ उमस भी स्वास्थ्य जोखिम को बढ़ा रही है। काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर (सीईईडब्ल्यू) के विश्लेषण के मुताबिक, अगर उमस भरी गर्मी का मौजूदा रुझान जारी रहा, तो 2050 तक लखनऊ में गर्मी से जुड़ी वजहों से हर साल करीब 4,000 लोगों की अतिरिक्त मौत हो सकती है। अध्ययन में 2015 से 2024 के दैनिक मौसम आंकड़ों का विश्लेषण किया गया।
इस अवधि में लखनऊ में 289 दिन ऐसे रहे, जब अधिकतम तापमान कम से कम 35°C और आर्द्रता 60% या उससे अधिक थी। ऐसे गर्म और बेहद उमस वाले दिनों की संख्या हाल के वर्षों में तेजी से बढ़ी है। 2015-19 के दौरान 123 ऐसे दिन दर्ज हुए, जबकि 2020-24 में यह संख्या बढ़कर 166 हो गई। यानी औसतन सालाना संख्या 24.6 से बढ़कर 33.2 दिन हो गई। 2020 में सबसे अधिक 45 उमस भरे गर्म दिन दर्ज किए गए।
पूर्व आईएमडी महानिदेशक केजे रमेश के अनुसार, ग्लोबल वार्मिंग से तापमान के साथ-साथ नमी भी बढ़ रही है। गंगा के मैदानी क्षेत्र में स्थित लखनऊ की कम ऊंचाई और बेसिन जैसी भौगोलिक स्थिति हवा को अपेक्षाकृत स्थिर रखती है, जिससे नमी बनी रहती है और गर्मी का स्वास्थ्य पर असर और गंभीर हो सकता है।
फिर सक्रिय हुआ मानसून, कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट
दक्षिण-पश्चिम मानसून के फिर सक्रिय होने से देश के कई राज्यों में बारिश का दौर तेज होने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना कम दबाव का क्षेत्र अगले 24 घंटे में उत्तर ओडिशा और गंगीय पश्चिम बंगाल की ओर बढ़ सकता है। ओडिशा और छत्तीसगढ़ में भारी से बेहद भारी बारिश को लेकर रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।
बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पूर्वोत्तर राज्यों और उत्तराखंड में भी भारी बारिश का अनुमान है। उत्तराखंड के चमोली और पिथौरागढ़ में 70 से अधिक सड़कें प्रभावित हैं। जम्मू-कश्मीर और हिमाचल में भी बारिश की चेतावनी है। दिल्ली में गर्मी-उमस बनी रहेगी। मौसम विभाग ने लोगों को भूस्खलन, अचानक बाढ़ और बिजली गिरने वाले क्षेत्रों से सावधान रहने की सलाह दी है।
दक्षिण-पश्चिम मानसून के फिर सक्रिय होने से देश के कई राज्यों में बारिश का दौर तेज होने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना कम दबाव का क्षेत्र अगले 24 घंटे में उत्तर ओडिशा और गंगीय पश्चिम बंगाल की ओर बढ़ सकता है।
ओडिशा और छत्तीसगढ़ में भारी से बेहद भारी बारिश को लेकर रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पूर्वोत्तर राज्यों और उत्तराखंड में भी भारी बारिश का अनुमान है। उत्तराखंड के चमोली और पिथौरागढ़ में 70 से अधिक सड़कें प्रभावित हैं।
जम्मू-कश्मीर और हिमाचल में भी बारिश की चेतावनी है। दिल्ली में गर्मी-उमस बनी रहेगी। मौसम विभाग ने लोगों को भूस्खलन, अचानक बाढ़ और बिजली गिरने वाले क्षेत्रों से सावधान रहने की सलाह दी है।