चक्रवात 'अर्णब' के बाद पूर्वी तट पर 'मुरासु' ने मचाई तबाही

Editorial Team2 नव॰. 2026
चक्रवात 'अर्णब' के बाद पूर्वी तट पर 'मुरासु' ने मचाई तबाही

चक्रवात अर्णब से हुई तबाही से उबरने की कोशिश कर रहे पूर्वी और दक्षिणी भारत के राज्यों के सामने अब चक्रवात मुरासु की चुनौती है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के मुताबिक, भीषण चक्रवाती तूफान मुरासु ने बुधवार तड़के आंध्र प्रदेश के प्रकाशम जिले में ओंगोल के पास तट पर लैंडफाल की प्रक्रिया शुरू कर दी। यह प्रक्रिया रात करीब एक बजे शुरू हुई। इस दौरान 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं, जबकि झोंकों की गति 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई।

आईएमडी के अनुसार, तड़के 1.30 बजे तूफान पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में आंध्र प्रदेश के तट के पास, ओंगोल से करीब 40 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में केंद्रित था। इसके प्रभाव से राज्य के कई इलाकों में भारी बारिश हुई। दक्षिण तटीय आंध्र प्रदेश में अगले 12 घंटों के दौरान भी भारी बारिश का अनुमान है। मौसम विभाग ने बुधवार सुबह तक समुद्र में उठे ज्वार से 1 से 1.5 मीटर ऊंची लहरों के कारण निचले इलाकों में जलभराव की आशंका जताई है। बापटला, कृष्णा और प्रकाशम जिले इसके सबसे अधिक प्रभाव की आशंका वाले क्षेत्रों में शामिल हैं।

इस बीच, चक्रवात अर्णब और उसके बाद आई बाढ़ से ओडिशा में छह लोगों की मौत हो चुकी है और 10 लोग अब भी लापता हैं। राज्य में 1.18 लाख लोग प्रभावित हुए हैं, जबकि करीब 75,388 हेक्टेयर फसल और 1,672 मकानों को नुकसान पहुंचा है। गंजाम और कंधमाल सबसे अधिक प्रभावित जिले हैं। गिडिपाबाली गांव में भूस्खलन के बाद करीब 177 बचावकर्मी लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं। मुरासु के प्रभाव को देखते हुए ओडिशा के दक्षिणी जिलों में भी सतर्कता बरती जा रही है। तमिलनाडु में अगले तीन दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश का पूर्वानुमान है।

 

नवंबर में सामान्य से अधिक तापमान रहने का अनुमान: आईएमडी

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने नवंबर में देश के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने का अनुमान जताया है। हालांकि, हिमालय की तलहटी से लगे कुछ क्षेत्रों में अधिकतम तापमान सामान्य से कम रह सकता है। विभाग के शनिवार को जारी मासिक पूर्वानुमान के मुताबिक, देश के अधिकांश हिस्सों में न्यूनतम तापमान भी सामान्य से अधिक रहने की संभावना है।

वहीं, मध्य और पूर्वी भारत के कई इलाकों में न्यूनतम तापमान सामान्य से कम रह सकता है। आईएमडी ने नवंबर में देशभर में सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान जताया है। देश में इस महीने दीर्घकालिक औसत (एलपीए) की करीब 77 प्रतिशत बारिश होने की संभावना है। विभाग के मुताबिक, भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में फिलहाल बेहद मजबूत एल नीनो परिस्थितियां बनी हुई हैं, जो नवंबर-दिसंबर में भी जारी रह सकती हैं। अक्टूबर में भी देश ने 1901 के बाद सबसे अधिक औसत अधिकतम तापमान दर्ज किया था।

 

भूटान में ग्लेशियल झील फटने के बाद बंगाल, असम में अलर्ट

भूटान में ग्लेशियल झील के फटने (ग्लोफ) के बाद पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार जिले में संकोश नदी का जलस्तर बढ़ने से प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले करीब 12 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। अधिकारियों के मुताबिक, गुरुवार शाम भूटान के गासा क्षेत्र में शिंताफू झील के तटबंध टूटने से करीब 74 लाख घन मीटर पानी, मिट्टी और मलबे के साथ निचले इलाकों की ओर बह निकला। इसके कारण भारत में संकोश नदी का जलस्तर करीब दो फुट बढ़ गया। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की टीमें प्रभावित इलाकों में तैनात की गई हैं।

असम के धुबरी और कोकराझार जिलों में भी संभावित बाढ़ को देखते हुए सतर्कता बढ़ा दी गई है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने लोगों से सतर्क रहने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की है। हालांकि, अधिकारियों के अनुसार, असम के दोनों जिलों में फिलहाल जलस्तर स्थिर है।

 

भारत में शिशुओं और बुजुर्गों पर लू का सबसे अधिक असर: रिपोर्ट

भारत उन देशों में शामिल है जहां शिशुओं और बुजुर्गों को लू का सबसे अधिक सामना करना पड़ रहा है। 'लांसेट काउंटडाउन ऑन हेल्थ एंड क्लाइमेट चेंज' की दसवीं संकेतक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन, अमेरिका और रूस भी इस सूची में शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में दुनियाभर में बुजुर्गों को कुल 10.8 अरब मानव-दिवस (पर्सन-डेज़) और शिशुओं को 1.1 अरब मानव-दिवस (पर्सन-डेज़) तक लू का सामना करना पड़ा। आबादी के अनुपात में प्रत्येक बुजुर्ग औसतन 12.8 दिन और प्रत्येक शिशु 8.7 दिन लू की चपेट में रहा।

रिपोर्ट में कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन से स्वास्थ्य संबंधी खतरे तेजी से बढ़ रहे हैं, जबकि उनसे निपटने के वैश्विक प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। इसमें जलवायु परिवर्तन को औपचारिक रूप से वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित करने और जलवायु संबंधी नीतियों में स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की मांग की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2016 से 2023 के बीच गर्मी के कारण करीब 30 लाख लोगों की मौत हुई।

 

उत्तर भारत 70 वर्षों में अधिक गर्म और शुष्क हुआ, प्रायद्वीपीय भारत में बढ़ी नमी: अध्ययन

भारत के बड़े हिस्से में पिछले 70 वर्षों के दौरान जलवायु में महत्वपूर्ण बदलाव आया है। एक नए अध्ययन के मुताबिक, उत्तर भारत के बड़े इलाके पहले की तुलना में अधिक गर्म और शुष्क हुए हैं, जबकि प्रायद्वीपीय भारत के अधिकांश हिस्सों में नमी बढ़ी है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) की शोध पत्रिका मौसम में प्रकाशित अध्ययन में 1951-1980 और 1991-2020 के जलवायु आंकड़ों की तुलना की गई। इसके मुताबिक, उत्तर-पश्चिम भारत में गर्म अर्ध-शुष्क जलवायु वाला क्षेत्र कुल भूभाग के करीब 25 प्रतिशत से बढ़कर 33 प्रतिशत हो गया। शुष्क क्षेत्र, जो पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक सीमित था, अब राज्य के पूर्वी हिस्सों तक फैल गया है। इसके उलट, प्रायद्वीपीय भारत में गर्म अर्ध-शुष्क क्षेत्र का विस्तार घटकर 30 प्रतिशत से 16 प्रतिशत रह गया।

अध्ययन की प्रमुख लेखिका और आईएमडी पुणे की वैज्ञानिक अनन्या करमाकर ने कहा कि उत्तर भारत में जलवायु क्षेत्र के पूर्व की ओर विस्तार को देखते हुए कृषि प्रधान इलाकों में बुवाई और कटाई के समय पर विशेष नजर रखने की जरूरत है।

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