वन अधिकार अधिनियम की संवैधानिक वैधता पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, आदिवासी समूहों ने जताई चिंता
सुप्रीम कोर्ट में 2 अप्रैल, 2025 को एक याचिका पर सुनवाई होनी है जिसमें वन
सुप्रीम कोर्ट में 2 अप्रैल, 2025 को एक याचिका पर सुनवाई होनी है जिसमें वन
सरकार की नई रिपोर्ट में फॉरेस्ट और ट्री कवर बढ़ा है लेकिन जैव विविधता को लेकर जानकारों की चिन्ता बरकरार है क्योंकि वह स्वस्थ और विविधतापूर्ण जंगल और पारिस्थितिकी का सूचक है।
वन क्षेत्रों में हाइड्रोपावर परियोजनाओं के प्रोजेक्ट सर्वे के लिए ड्रिलिंग और 100 पेड़ों तक
उत्तराखंड में अनियंत्रित जंगलों की आग के लिए अक्सर चीड़ को जिम्मेदार ठहराया जाता है। लेकिन फायर लाइनों का अभाव, वन कर्मचारियों और आग से लड़ने के लिए संसाधनों की कमी, और क्लाइमेट चेंज के कारण बढ़ता तापमान और शुष्क मौसम भी इसके लिए जिम्मेदार है। इस समस्या के स्थाई समाधान के लिए यह स्वीकार करना जरूरी है।
मध्य भारत के छत्तीसगढ़ में हसदेव अरण्य के जंगलों को बचाने के लिये चल रहे
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क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने घोषणा की है कि लद्दाख को राज्य का दर्जा देने
सुप्रीम कोर्ट ने 2023 में सरकार द्वारा वन संरक्षण अधिनियम (एफसीए) में किए गए संशोधनों
जानकारों का कहना है कि ‘वन’ के शाब्दिक अर्थ को इसकी परिभाषा बना देने के बावजूद, बहुत सी वन भूमियां इससे बाहर रह सकती हैं।
जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र के फ्रेमवर्क कन्वेंशन यानी (यूएनएफसीसीसी) के मुताबिक सदी के अंत