हल्की ईवी बैटरी बढ़ा सकती है वाहनों की रेंज
दक्षिण कोरिया के वैज्ञानिकों ने ऐसी तकनीक विकसित की है, जिससे इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी छोटी और हल्की होने के साथ अधिक टिकाऊ भी हो सकती है। कोरिया एडवांस्ड इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (केएआईएसटी) के शोधकर्ताओं ने एनोड-रहित बैटरियों की एक बड़ी समस्या का समाधान खोजने का दावा किया है।
इन बैटरियों में ग्रेफाइट जैसे पारंपरिक एनोड की जगह चार्जिंग के दौरान तांबे की पतली परत पर सीधे लिथियम जमा होता है। इससे कम जगह में अधिक ऊर्जा संग्रहित करने की संभावना बनती है, लेकिन बार-बार चार्ज करने पर लिथियम की नुकीली संरचनाएं बैटरी को नुकसान पहुंचा सकती हैं। शोधकर्ताओं ने तांबे की सतह पर सूक्ष्म नलिकाएं और मैक्सीन की बेहद पतली परत बनाकर लिथियम के समान जमाव और स्थिरता को बेहतर किया।
एडवांस्ड फंक्शनल मैटेरियल्स में प्रकाशित यह अध्ययन भविष्य में ईवी की रेंज बढ़ाने में मददगार हो सकता है। हालांकि, व्यावसायिक इस्तेमाल से पहले और परीक्षण जरूरी होंगे।
भारत में ई-दोपहिया वाहनों की बिक्री रिकॉर्ड स्तर पर
भारत में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की खुदरा बिक्री अक्टूबर 2026 में रिकॉर्ड 2.23 लाख यूनिट पर पहुंच गई। वाहन पोर्टल के आंकड़ों के मुताबिक, यह अक्टूबर 2025 की तुलना में 48 प्रतिशत अधिक और सितंबर के मुकाबले करीब सात प्रतिशत की वृद्धि है। त्योहारी मांग ने बिक्री को गति दी।
टीवीएस मोटर कंपनी 60,429 इकाइयों की बिक्री के साथ पहले स्थान पर रही। कंपनी एक महीने में 60,000 से अधिक इलेक्ट्रिक दोपहिया बेचने वाली पहली भारतीय कंपनी बन गई। बजाज ऑटो 49,067 इकाइयों के साथ दूसरे और एथर एनर्जी 31,796 इकाइयों के साथ तीसरे स्थान पर रही। हीरो विडा ने 29,901 वाहन बेचे, जबकि ओला इलेक्ट्रिक की बिक्री 12,096 इकाई रही।
शीर्ष 10 कंपनियों में ओला एकमात्र कंपनी रही जिसकी बिक्री सालाना आधार पर 26 प्रतिशत घटी। जनवरी से अक्टूबर के बीच कुल बिक्री 17.9 लाख इकाई रही, जो पूरे 2025 के 13.4 लाख के आंकड़े से अधिक है।
वैश्विक ईवी बाजार में दबदबे के बीच चीन का घरेलू वाहन उद्योग दबाव में
इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) के वैश्विक बाजार में तेजी से विस्तार कर रहा चीन अपने घरेलू वाहन उद्योग में जरूरत से अधिक उत्पादन क्षमता और तीखी प्रतिस्पर्धा की समस्या से जूझ रहा है। कई कंपनियों ने बढ़ती मांग की उम्मीद में कारखानों और उत्पादन सुविधाओं पर भारी निवेश किया, लेकिन घरेलू बाजार में ग्राहकों की संख्या उस रफ्तार से नहीं बढ़ी। नतीजतन, वाहन निर्माता बिक्री बढ़ाने के लिए कीमतों में कटौती कर रहे हैं, जिससे उनके मुनाफे पर दबाव पड़ रहा है।
बीवाईडी, एनआईओ, शाओमी और जीली जैसी कंपनियां विदेशी बाजारों में विस्तार कर रही हैं, लेकिन वहां व्यापारिक बाधाओं, नियामकीय शर्तों और स्थापित कंपनियों से प्रतिस्पर्धा की चुनौती है। उद्योग के विसेषाज्ञों के अनुसार भारतीय कंपनियों के लिए चीन का अनुभव सबक है कि निवेश को वास्तविक मांग के अनुरूप रखा जाए और छूट के बजाय लागत दक्षता, ग्राहक भरोसे तथा बिक्री के बाद की सेवाओं पर ध्यान दिया जाए।