तांबा महंगा होने से ईवी की लागत बढ़ने का खतरा

Editorial Team17 सित॰. 2026
तांबा महंगा होने से ईवी की लागत बढ़ने का खतरा

तांबे (कॉपर) की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी से इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग पर लागत का दबाव बढ़ने की आशंका है। लंदन मेटल एक्सचेंज (एलएमई) में कॉपर का वायदा भाव 8 सितंबर को रिकॉर्ड 14,779 डॉलर प्रति टन पहुंच गया था। भारत अपनी कॉपर जरूरतों का करीब 85 फीसदी आयात करता है, जिससे घरेलू उद्योगों पर असर और बढ़ सकता है।

इलेक्ट्रिक व्हीकल इंडस्ट्री अलायंस के महानिदेशक एवं सीईओ अजय शर्मा के अनुसार, पारंपरिक ईंधन वाली कारों की तुलना में ईवी में करीब 3-4 फीसदी अधिक कॉपर इस्तेमाल होता है। कॉपर का उपयोग मुख्य रूप से इलेक्ट्रिकल सिस्टम और वायरिंग में होता है।

उद्योग लागत घटाने के लिए एल्युमीनियम के अधिक इस्तेमाल पर विचार कर रहा है, लेकिन इसे कॉपर का पूर्ण विकल्प नहीं माना जा रहा। शर्मा के मुताबिक, एल्युमीनियम की विद्युत चालकता कॉपर की करीब 61 फीसदी है, इसलिए समान विद्युत भार के लिए अधिक मोटे कंडक्टर की जरूरत पड़ती है।

 

अमेरिका में ईवी निवेश की रफ्तार पड़ी धीमी

अमेरिका में इलेक्ट्रिक वाहन और बैटरी निर्माण में निवेश की रफ्तार कमजोर पड़ रही है। रॉयटर्स की जांच के मुताबिक, 2025 में करीब 20 अरब डॉलर की ईवी परियोजनाएं रद्द हुईं, जबकि नए निवेश की घोषणाएं घटकर करीब 6.5 अरब डॉलर रह गईं। 2023 में यह आंकड़ा करीब 55 अरब डॉलर था।

रद्द हुई परियोजनाओं से करीब 27,000 संभावित नौकरियां जुड़ी थीं। ओहायो के लॉर्ड्सटाउन में 2.3 अरब डॉलर के बैटरी संयंत्र ने जनवरी में उत्पादन रोक दिया, जिससे करीब 480 कर्मचारियों को अनिश्चितकाल के लिए छुट्टी पर भेजा गया।

कमजोर ईवी मांग के साथ अमेरिकी नीति में बदलाव भी निवेश पर असर डाल रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 7,500 डॉलर के संघीय ईवी टैक्स क्रेडिट को समाप्त किया है। इसके अलावा, बैटरी सामग्री पर टैरिफ और विशेषज्ञ कर्मचारियों की उपलब्धता से जुड़ी चुनौतियां भी कंपनियों के लिए अनिश्चितता बढ़ा रही हैं। फोर्ड ने अपनी कुछ प्रस्तावित EV उत्पादन क्षमता को पेट्रोल वाहनों के लिए इस्तेमाल करने की योजना बनाई है।

 

ईवी में बढ़त डंपिंग नहीं, बाजार की मांग का नतीजा: चीन

यूरोपीय बाजार में चीन से ईवी निर्यात को लेकर चल रही बहस के बीच चीनी विशेषज्ञों ने इसे 'डंपिंग' मानने से इनकार किया है। चाइना डेली में लिखे लेख में यूनिवर्सिटी ऑफ इंटरनेशनल बिजनेस एंड इकोनॉमिक्स के प्रोफेसर जॉन गोंग ने कहा कि चीन की बढ़ती ईवी बिक्री बेहतर उत्पादों, तेज तकनीकी नवाचार और ऑटो उद्योग के तेजी से इलेक्ट्रिफिकेशन का परिणाम है।

उनके अनुसार, यूरोपीय उपभोक्ता अब उन्नत इंफोटेनमेंट और ऑटोनॉमस ड्राइविंग जैसी सुविधाओं वाले वाहनों की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा 'अतिरिक्त क्षमता' को वैश्विक ऑटो उद्योग में बदलाव के संदर्भ में देखना चाहिए। उनके मुताबिक, असली अतिरिक्त क्षमता उन पुराने और कम दक्ष उत्पादन संयंत्रों में है जो ऐसे अंतर्दहन इंजन (आईसीई) वाहन बनाते हैं जिनकी मांग घट रही है।

ग्लोबल टाइम्स के एक संपादकीय में भी कहा गया कि यूरोप की बढ़ती ऊर्जा लागत के बीच चीन की औद्योगिक क्षमता यूरोपीय उद्योगों पर ऊर्जा कीमतों के दबाव को कम करने में मदद कर सकती है।

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