जलभराव के समय बेहतर साबित हो सकती हैं इलेक्ट्रिक कारें: रिपोर्ट

Editorial Team31 जुल॰. 2026
जलभराव के समय बेहतर साबित हो सकती हैं इलेक्ट्रिक कारें: रिपोर्ट

बरसात के मौसम में अक्सर माना जाता है कि इलेक्ट्रिक कारें पानी में जल्दी खराब हो सकती हैं। लेकिन एक नई रिपोर्ट में ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों के हवाले से कहा गया है कि कई मामलों में इलेक्ट्रिक कारें पेट्रोल और डीजल वाहनों की तुलना में जलभराव वाली सड़कों पर बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं

रिपोर्ट के अनुसार, आधुनिक इलेक्ट्रिक कारों की बैटरी और बिजली से जुड़े प्रमुख हिस्सों को इस तरह सील किया जाता है कि उनमें पानी आसानी से प्रवेश न कर सके। दूसरी ओर, पेट्रोल और डीजल वाहनों में इंजन के भीतर पानी घुसने का खतरा अधिक रहता है। इससे इंजन को गंभीर नुकसान हो सकता है।

हालांकि विशेषज्ञों ने साफ कहा है कि इसका मतलब यह नहीं है कि इलेक्ट्रिक कारों को गहरे पानी में चलाना सुरक्षित है। जलभराव वाली सड़कें सभी तरह के वाहनों के लिए जोखिम भरी होती हैं। तेज बहाव या अधिक गहरे पानी में वाहन फंस सकता है या चालक नियंत्रण खो सकता है। इसलिए संभव हो तो ऐसी सड़कों से बचना ही सबसे सुरक्षित विकल्प है।

 

बैटरी परिवहन अपनाने से 2050 तक देश में टल सकती हैं 17 लाख असामयिक मौतें: शोध

एक नए अध्ययन के अनुसार, यदि भारत 2050 तक सड़क परिवहन को पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहनों पर आधारित कर दे, तो लगभग 17 लाख असामयिक मौतों को रोका जा सकता है। इंटरनेशनल काउंसिल ऑन क्लीन ट्रांसपोर्टेशन (आईसीसीटी) की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2024 में सड़क परिवहन से होने वाले प्रदूषण के कारण देश में हर छह मिनट में एक असामयिक मौत और हर 34 मिनट में बच्चों में अस्थमा का एक नया मामला सामने आया

रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में है। भारी वाहन, जैसे ट्रक और बसें, संख्या में कम होने के बावजूद प्रदूषण का बड़ा हिस्सा फैलाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पुराने प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाने और इलेक्ट्रिक ट्रकों, बसों व अन्य शून्य-उत्सर्जन (जीरो-एमिशन) वाले वाहनों को तेजी से अपनाने से वायु प्रदूषण कम होगा और लोगों के स्वास्थ्य को बड़ा लाभ मिलेगा।

 

महंगे तेल के चलते दुनिया में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री 35% बढ़ी

पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के बाद दुनिया भर में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की मांग तेजी से बढ़ी है। एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार, 2026 की दूसरी तिमाही में 50 देशों में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री 35% बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के मुताबिक, होरमुज जलडमरूमध्य में बाधा आने के बाद कच्चे तेल की कीमत लगभग 60 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर करीब 120 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई। इसके बाद यूरोप और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों ने आयातित तेल पर निर्भरता कम करने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने वाली योजनाओं का विस्तार किया।

आईईए का अनुमान है कि 2026 में ईवी की बिक्री में आगे भी तेजी बनी रहेगी।

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