दिल्ली की नई ईवी नीति को मंजूरी, टैक्स छूट और सब्सिडी का ऐलान
दिल्ली सरकार ने नई इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) नीति 2026-30 को मंजूरी दे दी है, जिसका उद्देश्य वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करना और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देना है। नीति के तहत 30 लाख रुपए तक की एक्स-शोरूम कीमत वाली शुद्ध इलेक्ट्रिक कारों पर रोड टैक्स और पंजीकरण शुल्क पूरी तरह माफ रहेगा।
इलेक्ट्रिक दोपहिया खरीदने पर पहले वर्ष 30,000 रुपए, दूसरे वर्ष 20,000 रुपए और तीसरे वर्ष 10,000 रुपए की सब्सिडी मिलेगी। ई-ऑटो समेत इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहनों के लिए भी 50,000 रुपए तक का प्रोत्साहन दिया जाएगा। बीएस-4 या उससे पुराने चारपहिया वाहन स्क्रैप कर ईवी खरीदने वालों को एक लाख रुपए की स्क्रैपिंग प्रोत्साहन राशि मिलेगी।
सरकार अगले चार वर्षों में 30,000 चार्जिंग प्वाइंट स्थापित करेगी और करीब 7,000 करोड़ रुपए खर्च करेगी। 1 जनवरी 2027 से केवल इलेक्ट्रिक ऑटो का पंजीकरण होगा, जबकि 1 अप्रैल 2028 से नए पेट्रोल और सीएनजी दोपहिया वाहनों का पंजीकरण बंद कर केवल इलेक्ट्रिक दोपहिया का पंजीकरण किया जाएगा। यह नीति 31 मार्च 2030 तक लागू रहेगी।
भारत में ईवी के पुर्ज़ों के लिए लोकल औद्योगिक यूनिट में तेज़ी, लेकिन चिप्स और रेयर-अर्थ मैग्नेट के आयात पर निर्भरता बनी चुनौती
एक नए अध्ययन के अनुसार, भारत में इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) विनिर्माण 2030 तक बैटरियों को छोड़कर कई उच्च-मूल्य वाले पुर्जों के उत्पादन में 90–100 प्रतिशत स्थानीयकरण हासिल कर सकता है। हालांकि, घरेलू स्तर पर अधिक मूल्य सृजन (वैल्यू क्रिएशन) के लिए देश को सेमीकंडक्टर, रेयर-अर्थ मैग्नेट और अन्य विशेष सामग्रियों के आयात पर निर्भरता कम करनी होगी। यह निष्कर्ष इंस्टीट्यूट फॉर एनर्जी इकोनॉमिक्स एंड फाइनेंशियल एनालिसिस (IEEFA) और जेएमके रिसर्च एंड एनालिटिक्स की संयुक्त रिपोर्ट में सामने आया है।
रिपोर्ट के अनुसार, सेमीकंडक्टर और रेयर-अर्थ मैग्नेट स्थानीयकरण की राह में सबसे बड़ी बाधाओं में शामिल हैं। इनका उपयोग इलेक्ट्रिक वाहनों की मोटर, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, चार्जिंग उपकरण और वाहन नियंत्रण प्रणालियों में होता है। लेकिन इनका वैश्विक उत्पादन मुख्य रूप से चीन और ताइवान में केंद्रित है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हाल के वर्षों में ईवी पुर्जों के निर्माण से जुड़ी लगभग 60 प्रतिशत नई घोषणाएं उन कंपनियों ने की हैं, जिन्हें प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) ऑटो योजना के तहत मंजूरी मिली है। इसके बावजूद, 2026 की शुरुआत तक इस योजना के तहत उपलब्ध 25,938 करोड़ रुपये (करीब 2.98 अरब अमेरिकी डॉलर) की राशि का 10 प्रतिशत से भी कम वितरित किया गया था।
जलवायु संकट से बढ़ा डेटा सेंटरों पर खतरा: रिपोर्ट
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते इस्तेमाल के बीच एक नई रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि दुनिया के करीब 80 प्रतिशत डेटा सेंटर जलवायु परिवर्तन से पैदा होने वाले खतरों की जद में हैं। डेटा सेंटर वे बड़े केंद्र हैं, जहां इंटरनेट, क्लाउड और डिजिटल सेवाओं का डेटा सुरक्षित रखा और संचालित किया जाता है।
रिपोर्ट के अनुसार, बाढ़, भीषण गर्मी, सूखा, तेज़ हवाएं और जंगल की आग जैसी घटनाएं डेटा सेंटरों के संचालन को प्रभावित कर सकती हैं। इससे सेवाएं बाधित होने के साथ मरम्मत और बीमा का खर्च भी बढ़ सकता है। अध्ययन में 97 वैश्विक डेटा सेंटर बाजारों का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं का कहना है कि भविष्य में डेटा सेंटर स्थापित करते समय जलवायु जोखिमों को प्राथमिकता देना जरूरी होगा, क्योंकि इन केंद्रों पर ही दुनिया की अधिकांश डिजिटल सेवाएं निर्भर हैं।