वैकल्पिक ईंधन में ईवी की हिस्सेदारी बढ़ी, लेकिन कारों में सीएनजी आगे
भारत में पेट्रोल-डीजल वाहनों से वैकल्पिक ईंधन की ओर बदलाव तेज हो रहा है, लेकिन इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की तस्वीर अलग-अलग श्रेणियों में अलग है। फाडा के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2026 में पहली बार यात्री वाहनों में वैकल्पिक ईंधन वाले वाहनों की हिस्सेदारी 41.95% रही, जो पेट्रोल वाहनों की 40.85% हिस्सेदारी से अधिक थी। हालांकि, वैकल्पिक ईंधन में सीएनजी, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहन सभी शामिल हैं।
जनवरी-अगस्त 2026 में कुल वाहन पंजीकरण में ईवी की हिस्सेदारी 10.6% रही। दोपहिया वाहनों में ईवी की हिस्सेदारी 2025 के 6.4% से बढ़कर 2026 में 9.1% हो गई। तिपहिया वाहनों में बदलाव सबसे तेज रहा और अगस्त तक 60.5% वाहन इलेक्ट्रिक थे।
इसके विपरीत, कारों में वैकल्पिक ईंधन का बढ़ता हिस्सा मुख्यतः सीएनजी/एलपीजी और हाइब्रिड वाहनों से आया है। विशेषज्ञों के अनुसार, चार्जिंग ढांचे के विस्तार से कारों में ईवी अपनाने की गति बढ़ सकती है।
पुरानी ईवी बैटरियों में 1 लाख करोड़ रुपए के खनिज का भंडार
भारत में इस्तेमाल के बाद बेकार होने वाली इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) बैटरियों में वित्त वर्ष 2040-41 तक करीब 1.01 लाख करोड़ रुपए मूल्य के खनिज मिल सकते हैं। सेंटर फॉर सोशल एंड इकोनॉमिक प्रोग्रेस (सीएसईपी) की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2026-27 से 2040-41 के बीच ईवी बैटरियों से करीब 573 किलो टन खनिज निकाले जा सकते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 2025-26 तक करीब 80 लाख ईवी जुड़ चुके हैं। 2030-31 तक हर साल ईवी की बिक्री 91 लाख और 2037-38 तक करीब 5 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। इनमें सबसे बड़ी संख्या इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की होगी।
रिपोर्ट के अनुसार, बरामद होने वाले खनिजों में मात्रा के लिहाज से तांबा सबसे आगे होगा, जबकि मूल्य के लिहाज से लिथियम की हिस्सेदारी सबसे अधिक होगी। भारत को लिथियम, निकेल और कोबाल्ट के लिए फिलहाल पूरी तरह आयात पर निर्भर रहना पड़ता है। रिपोर्ट ने बैटरी रीसाइक्लिंग क्षमता बढ़ाने के लिए 2040-41 तक करीब 55,057 करोड़ रुपए के निवेश की जरूरत बताई है।
ईवी का प्रयोग बढ़ने के साथ चार्जिंग ढांचे की चुनौती
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है और इसका असर ऑटोमोबाइल पत्रकारिता पर भी पड़ा है। अब वाहनों की तकनीक समझने के साथ बैटरी, बिजली ग्रिड, चार्जिंग ढांचे और ऊर्जा भंडारण की जानकारी भी जरूरी हो गई है। भारत में नए वाहनों की बिक्री में ईवी की हिस्सेदारी करीब 10% पहुंच गई है। यूरोप में अगस्त में नए वाहनों में बैटरी ईवी की हिस्सेदारी 27.7% रही। इलेक्ट्रिक वाहनों की परिचालन लागत भी पारंपरिक वाहनों की तुलना में करीब एक-तिहाई कम हो सकती है।
हालांकि, चार्जिंग ढांचा बड़ी चुनौती बना हुआ है। खासकर अपार्टमेंट परिसरों में चार्जर लगाने को लेकर समस्याएं हैं। बिजली ग्रिड और ट्रांसफॉर्मर की सीमित क्षमता भी परेशानी बढ़ाती है। लेख के अनुसार, ईवी को बड़े पैमाने पर अपनाने के लिए बेहतर चार्जिंग ढांचे, मजबूत बिजली वितरण व्यवस्था, नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण में निवेश जरूरी है।