पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, जागरूकता पर जोर
सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली पर पटाखे जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने से इनकार करते हुए धार्मिक भावनाओं और जनस्वास्थ्य के बीच संतुलन बनाने की जरूरत बताई। हालांकि, अलग-अलग पीठों ने इस मामले में अलग-अलग पहलुओं पर विचार किया।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने सोमवार को कहा कि लोगों को कम प्रदूषण वाले तरीकों से त्योहार मनाने के लिए खुद आगे आना चाहिए। पीठ ने कहा कि अदालत ऐसे प्रतिबंध लगाने में सावधानी बरतेगी, जिन्हें जमीन पर लागू करना मुश्किल हो।
पीठ ने पटाखों के नुकसान के बारे में जागरूकता फैलाने और कम प्रदूषण वाले विकल्पों को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उसने कहा कि लोगों को बताया जाना चाहिए कि कौन से पटाखे अधिक हानिकारक हैं।
वहीं, न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी बी वराले की पीठ ने कुछ पटाखों को तय समयसीमा में जलाने की अनुमति देने के संकेत दिए। उसने पटाखों की श्रेणियों पर फैसला लेने से पहले प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट मांगी।
सड़कों पर पटाखे जलाने पर सालभर रोक: हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि सार्वजनिक सड़कों, गलियों और फुटपाथों पर पटाखे जलाने पर रोक पूरे साल और सभी त्योहारों के दौरान लागू रहेगी। न्यायमूर्ति जी एस कुलकर्णी और न्यायमूर्ति नीला गोखले की पीठ ने गुरुवार को कहा कि पटाखों से होने वाला जहरीला प्रदूषण सभी को प्रभावित करता है, खासकर बच्चों और बुजुर्गों को।
अदालत ने कहा कि सरकार और संबंधित अधिकारी पटाखे जलाने पर नियंत्रण रखने में नाकाम दिख रहे हैं। पीठ ने कहा कि समस्या कानून का पालन नहीं होने की है और नागरिकों के अधिकार सर्वोपरि हैं। अदालत ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सार्वजनिक स्थानों पर पटाखे जलाने पर रोक के बारे में नोटिस जारी करने और लोगों को इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने का निर्देश दिया।
दिल्ली में हवा के कण रोक रहे सूरज की रोशनी, बढ़ा रहे प्रदूषण: अध्ययन
दिल्ली की हवा में मौजूद बेहद छोटे कण सूरज की रोशनी को जमीन तक पहुंचने से रोककर हवाओं को कमजोर कर सकते हैं। इससे प्रदूषक हवा में जमा रहते हैं और प्रदूषण से निपटना मुश्किल हो जाता है। एक नए अध्ययन में यह बात सामने आई है।
एटमॉस्फेरिक केमिस्ट्री एंड फिजिक्स में प्रकाशित इस अध्ययन इस के मुताबिक, हवा में मौजूद एरोसोल यानी ठोस कणों और तरल बूंदों का मिश्रण सूरज की रोशनी को सोख या बिखेर सकता है। इनमें धूल, धुआं, कालिख और अन्य कण शामिल हो सकते हैं। रोशनी कम पहुंचने से जमीन कम गर्म होती है। इससे हवा का ऊपर उठना और प्रदूषकों को फैलाने वाली हवाओं का बहाव कमजोर पड़ता है। नतीजतन, पीएम2.5 जैसे प्रदूषक जमीन के पास जमा होने लगते हैं।
दिल्ली में नवंबर 2023 के दौरान प्रदूषण फैलने की क्षमता 20 प्रतिशत तक घट गई थी। शोधकर्ताओं के मुताबिक, प्रदूषण के स्रोतों से उत्सर्जन घटाना जरूरी है।
प्रदूषण से स्त्री रोग संबंधी कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है: विशेषज्ञ
दिल्ली-एनसीआर में लंबे समय तक वायु प्रदूषण के संपर्क में रहने से महिलाओं में स्त्री रोग संबंधी कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों ने कहा है कि इस संबंध की पुष्टि के लिए और शोध की जरूरत है। फोर्टिस गुरुग्राम की डॉ रमा जोशी ने कहा कि पीएम2.5 के लंबे समय तक संपर्क में रहने से शरीर में सूजन और कोशिकाओं को नुकसान पहुंचने जैसी प्रक्रियाएं हो सकती हैं। ये कैंसर के विकास से जुड़ी हैं, लेकिन प्रदूषण को इन कैंसर का सीधा कारण नहीं माना जा सकता।
एक भारतीय अध्ययन में पीएम2.5 का स्तर 40 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से अधिक होने पर लड़कियों में माहवारी देर से शुरू होने की आशंका 24 प्रतिशत अधिक और महिलाओं में समय से पहले रजोनिवृत्ति का जोखिम 23 प्रतिशत अधिक पाया गया। विशेषज्ञों ने असामान्य रक्तस्राव, रजोनिवृत्ति के बाद रक्तस्राव और लगातार पेट दर्द होने पर चिकित्सकीय जांच कराने की सलाह दी।