हरियाणा में 37 दिन बाद सफाई कर्मचारियों की हड़ताल खत्म, कई मांगों पर सरकार की सहमति

Editorial Team17 सित॰. 2026
हरियाणा में 37 दिन बाद सफाई कर्मचारियों की हड़ताल खत्म, कई मांगों पर सरकार की सहमति

हरियाणा में करीब 13,000 सफाई कर्मचारियों की 37 दिन लंबी हड़ताल मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ समझौते के बाद खत्म हो गई। कर्मचारी 6 अगस्त से नियमितीकरण, ठेका प्रथा खत्म करने, वेतन और सेवा सुरक्षा समेत 13-17 मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे थे। हड़ताल से राज्य के शहरी इलाकों में कचरा जमा होने से सफाई व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई।

समझौते के तहत नगरपालिका के पेरोल पर काम कर रहे कर्मचारियों को खाली पदों पर नियमित करने की प्रक्रिया शुरू होगी, जबकि ठेका कर्मचारियों को नियमित भर्ती में अनुभव के अंक और भर्ती प्रक्रिया के जरिए रोजगार का अवसर मिलेगा। मासिक 2,000 रुपए जोखिम भत्ता, 440 रुपए मासिक वर्दी भत्ता, एलटीसी और चिकित्सा सुविधाओं पर भी सहमति बनी है। पात्र कर्मचारियों को ‘समान काम, समान वेतन’ का बकाया भुगतान पहले ही किया जा चुका है।

सरकार ने नगरपालिका कर्मचारियों के वेतन में 2,100 रुपए मासिक बढ़ोत्तरी और न्यूनतम वेतन सुनिश्चित करने पर भी सैद्धांतिक सहमति दी है। हड़ताल के दौरान दर्ज मामलों को नियमों के तहत वापस लेने पर कार्रवाई होगी। कर्मचारियों ने अब काम पर लौटकर 10 दिनों में जमा कचरा हटाने का भरोसा दिया है।

गणेश उत्सव से पहले पुणे में ध्वनि प्रदूषण पर बहस तेज

गणेश उत्सव से पहले पुणे में तेज आवाज और ध्वनि प्रदूषण को लेकर नागरिकों और आयोजकों के बीच बहस तेज हो गई है।

नागरिक समूहों ने धार्मिक और अन्य सार्वजनिक आयोजनों में तेज आवाज वाले लाउडस्पीकर और डीजे पर रोक तथा ध्वनि प्रदूषण के नियमों का सख्ती से पालन कराने की मांग की है। हाल में एक कार्यकर्ता पर गणेशोत्सव आयोजक से जुड़े व्यक्ति द्वारा कथित हमले के बाद यह मुद्दा और गरमा गया। 

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी मांग किसी एक धर्म या त्योहार के खिलाफ नहीं, बल्कि सभी सार्वजनिक आयोजनों में तय ध्वनि सीमा और नियमों के पालन को लेकर है। उन्होंने पुलिस, नगर निकाय और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से आयोजनों से पहले साउंड सिस्टम की जांच और नियम तोड़ने वाले उपकरण जब्त करने की मांग की है।

प्रदूषण जांच केंद्रों पर कैमरे लगेंगे, वाहनों की जांच व्यवस्था होगी अपग्रेड

दिल्ली सरकार ने वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर निगरानी बढ़ाने के लिए प्रदूषण जांच केंद्रों को अपग्रेड करने और वहां कैमरे लगाने का फैसला किया है। सरकार की समीक्षा में सामने आया कि कुछ व्यावसायिक वाहनों को पुराने तकनीक वाले केंद्रों से फिटनेस प्रमाणपत्र और निजी वाहनों को पेट्रोल पंपों के बाहर बने बूथों से प्रदूषण प्रमाणपत्र जारी किए जा रहे थे। नए इंतजाम का उद्देश्य जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना और संभावित गड़बड़ियों पर रोक लगाना है।

तेखखंड और नंद नगरी में ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन पहले ही शुरू किए जा चुके हैं, जिनकी सालाना क्षमता करीब 72,000 वाहनों की है। हालांकि, इन कदमों का वास्तविक असर प्रदूषण नियंत्रण पर कितना पड़ेगा, यह जांच व्यवस्था के सख्त और नियमित अमल पर निर्भर करेगा।

भूजल प्रदूषण: नोएडा-ग्रेटर नोएडा की 46 अवैध जींस फैक्ट्रियां बंद होंगी

उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) नोएडा और ग्रेटर नोएडा में चल रही 46 अवैध जींस फैक्ट्रियों को बंद करने की तैयारी कर रहा है। निरीक्षण के दौरान नोएडा में 37 और ग्रेटर नोएडा में नौ इकाइयां ऐसी पाई गईं, जो जरूरी मंजूरी और भूजल तथा जमीन को प्रदूषण से बचाने के लिए निर्धारित उपायों के बिना संचालित हो रही थीं। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, इन इकाइयों को वायु और जल प्रदूषण नियंत्रण कानूनों के तहत कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। 

इनमें कई अत्यधिक प्रदूषणकारी औद्योगिक इकाइयां आवासीय क्षेत्रों में संचालित हो रही थीं। यह कार्रवाई नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के निर्देश के बाद की जा रही है। बोर्ड की चिंता मुख्य रूप से इन इकाइयों से निकलने वाले प्रदूषित अपशिष्ट के कारण भूजल और मिट्टी के दूषित होने को लेकर है।

हरियाणा में 40.6 करोड़ रुपए के प्रदूषण जुर्माने में सिर्फ 1.2 करोड़ रुपए की वसूली

हरियाणा में रेडी मिक्स कंक्रीट (आरएमसी) प्लांटों पर लगाए गए 40.6 करोड़ रुपए के पर्यावरणीय मुआवजे में से अब तक सिर्फ 1.2 करोड़ रुपए की वसूली हो सकी है। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) को बताया कि राज्य में 370 आरएमसी प्लांटों की पहचान की गई, जिनमें 186 बिना वैध अनुमति के चल रहे थे। 

बोर्ड ने 190 संयंत्रों के खिलाफ बंद करने की कार्रवाई शुरू की, जबकि 29 को ध्वस्त किया जा चुका है और 108 पर पर्यावरणीय मुआवजा लगाया गया है। कुल लंबित राशि में गुरुग्राम का हिस्सा 37.8 करोड़ रुपए है। एचएसपीसीबी के मई में एनजीटी को दिए गए विवरण के मुताबिक, पिछले एक साल में लगाए गए 40.6 करोड़ रुपए के मुआवजे में से केवल 1.2 करोड़ रुपए ही वसूल किए जा सके। राज्य सरकार वसूली की प्रक्रिया आसान बनाने के लिए अपने राजस्व कानून में संशोधन पर विचार कर रही है।

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