यमुना की गाद अमोनिया बढ़ने की एक वजह, सीपीसीबी के अध्ययन में संकेत

Editorial Team17 अग॰. 2026
यमुना की गाद अमोनिया बढ़ने की एक वजह, सीपीसीबी के अध्ययन में संकेत

वजीराबाद में यमुना नदी की तलहटी में जमा गाद दिल्ली के कच्चे पानी में अमोनिया का स्तर बढ़ने की एक वजह हो सकती है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के प्रारंभिक अध्ययन में यह संकेत मिला है। अध्ययन के लिए अमोनिया का स्तर बढ़ने के दौरान वजीराबाद पोंडेज क्षेत्र से पानी और गाद के नमूने लिए गए थे। यह अध्ययन अपर यमुना रिवर बोर्ड के कहने पर किया जा रहा है, जो अमोनिया बढ़ने और इससे दिल्ली की जलापूर्ति पर पड़ने वाले असर की वजहों की जांच कर रहा है।

दिल्ली जल बोर्ड के अनुसार, एक पीपीएम तक अमोनिया का उपचार किया जा सकता है, लेकिन इससे अधिक स्तर पर वजीराबाद और चंद्रावल जलशोधन संयंत्रों का संचालन प्रभावित होता है। इस बीच पोंडेज क्षेत्र से करीब 3.87 लाख घन मीटर गाद हटाने की योजना है, जिसका काम मानसून के बाद सितंबर के मध्य से शुरू होने की उम्मीद है। हालांकि, अधिकारियों के मुताबिक केवल एक बार गाद हटाने से स्थायी समाधान नहीं मिलेगा। नालों के जरिए यमुना में पहुंच रहे नाइट्रोजन की मात्रा कम करना जरूरी होगा।दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति की 4 अगस्त की रिपोर्ट में वजीराबाद पर पानी की गुणवत्ता में गिरावट भी सामने आई है।

 

17 राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों में मेडिकल वेस्ट के 'डीप बरीअल' में नियमों का उल्लंघन

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में बायोमेडिकल कचरे के ‘डीप बरीअल’ यानी गहरे गड्ढों में दफन करने की प्रक्रिया में नियमों के उल्लंघन की जानकारी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) को दी है। एनजीटी के मुताबिक, डीप बरीअल करने वाली 9,178 स्वास्थ्य सुविधाओं में केवल 5,715 निर्धारित मानकों के अनुरूप पाई गईं। 477 संस्थानों में कचरे के गड्ढे और भूजल स्तर के बीच अनिवार्य छह मीटर की दूरी नहीं थी, जबकि 341 के पास जरूरी अनुमति नहीं थी। उत्तर प्रदेश में सभी 111 और राजस्थान में सभी 33 संस्थान नियमों का उल्लंघन करते पाए गए। सीपीसीबी ने आठ सप्ताह में अनुपालन नहीं होने पर पर्यावरण संरक्षण कानून के तहत कार्रवाई की चेतावनी दी है।

 

पीएम2.5 प्रदूषण से रूमेटाइड आर्थराइटिस बढ़ने और फ्लेयर-अप का खतरा: अध्ययन

प्रदूषण के महीन कणों (पीएम 2.5)  कारण रूमेटाइड आर्थराइटिस (यानी जोड़ों में सूजन और क्षति से जुड़ा एक ऑटोइम्यून रोग) के मरीजों में बीमारी की सक्रियता और फ्लेयर-अप का खतरा बढ़ सकता है। एनल्स ऑफ़ द रूमेटिक डिज़ीज़ेस में प्रकाशित अध्ययन में दक्षिण कोरिया में 2021 से 2024 के बीच 1,000 से अधिक मरीजों और 12,583 ओपीडी विजिट यानी डॉक्टरी जांच का विश्लेषण किया गया।

छह प्रमुख वायु प्रदूषकों में पीएम 2.5 का बीमारी की सक्रियता और फ्लेयर-अप के जोखिम से सबसे मजबूत संबंध पाया गया। महिलाओं और धूम्रपान न करने वालों में यह संबंध अधिक स्पष्ट था। दो सप्ताह से अधिक समय तक पीएम2.5 के संपर्क में रहने से फ्लेयर-अप का खतरा भी बढ़ा। शोधकर्ताओं ने आरए मरीजों को खराब वायु गुणवत्ता, खासकर पीएम2.5 के उच्च स्तर, के लंबे संपर्क से बचने की सलाह दी।

 

जम्मू-कश्मीर के पहाड़ों में बढ़ रहा वायु प्रदूषण, परिवहन क्षेत्र जिम्मेदार

जम्मू-कश्मीर में बढ़ता वायु प्रदूषण अब गंभीर चिंता का विषय बन रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक क्षेत्र में वायु प्रदूषण का करीब 40-50 प्रतिशत हिस्सा परिवहन से आता है। जम्मू-कश्मीर प्रदूषण नियंत्रण समिति के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2025 से जुलाई 2026 तक किसी भी महीने हवा की गुणवत्ता 'अच्छी' श्रेणी में नहीं रही। श्रीनगर के खोनमोह में नवंबर और दिसंबर 2025 में वायु गुणवत्ता सूचकांक क्रमशः 279 और 246 रहा।

इस दौरान वाहनों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। परिवहन विभाग के अनुसार, 2026 में अब तक 1.4 लाख से अधिक वाहन पंजीकृत हुए हैं, जिनमें 10,396 इलेक्ट्रिक वाहन हैं। विशेषज्ञों ने बढ़ते प्रदूषण को सांस संबंधी बीमारियों में वृद्धि से भी जोड़ा है। सीडी अस्पताल में 2017-18 से 2023-24 के बीच बहिरंग विभाग (ओपीडी) के मरीजों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई।

Share

LinkedInXFacebook

लेखक के बारे में

Editorial Team

Editorial Team

A team of handpicked and dedicated writers committed to fact check each climate-related statement. They go to the roots and intent of each policy implemented, internationally and at home, to help you understand climate better.
लेखक के और लेख देखें