दिल्ली-एनसीआर: एफजीडी से छूट प्राप्त संयंत्र हैं सबसे बड़े प्रदूषक

Editorial Team16 जुल॰. 2026
दिल्ली-एनसीआर: एफजीडी से छूट प्राप्त संयंत्र हैं सबसे बड़े प्रदूषक

फिनलैंड स्थित गैर-लाभकारी संस्था सेंटर फ़ॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) की एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दिल्ली-एनसीआर के आसपास 300 किलोमीटर के दायरे में स्थित 37 कोयला-आधारित बिजली संयंत्रों की जांच में 20 इकाइयां तय सीमा से अधिक सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) उत्सर्जित कर रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इन संयंत्रों से होने वाले कुल SO₂ उत्सर्जन का करीब 90% उन इकाइयों से आता है, जहां फ्ल्यू गैस डीसल्फराइजेशन (एफजीडी) प्रणाली नहीं लगी है। 

अध्ययन में कहा गया है कि सबसे अधिक प्रदूषण उन संयंत्रों से हो रहा है, जिन्हें केंद्र सरकार ने एफजीडी लगाने से छूट दे रखी है। शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी कि यह स्थिति वायु प्रदूषण और स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकती है। रिपोर्ट में सभी कोयला बिजली संयंत्रों में एफजीडी प्रणाली अनिवार्य करने और उत्सर्जन के रियल-टाइम आंकड़े सार्वजनिक करने की सिफारिश की गई है।

 

वायु प्रदूषण के कारण भारत में कोविड से हुईं अधिक मौतें: शोध

भारत के 640 जिलों पर किए गए एक नए अध्ययन में दावा किया गया है कि लंबे समय तक वायु प्रदूषण के संपर्क में रहने से कोविड-19 के संक्रमण और मौतों का खतरा बढ़ा। यह शोध एप्लाइड स्पाशियल एनालिसिस एंड पॉलिसी पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं ने अप्रैल 2020 से नवंबर 2022 तक के कोविड आंकड़ों का विश्लेषण कर उन्हें पीएम2.5, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO2), तापमान, वर्षा और हरित क्षेत्र के आंकड़ों से जोड़ा।

अध्ययन में पाया गया कि जिन जिलों में पीएम2.5 और NO2 का स्तर अधिक था, वहां कोविड के मामले और मृत्यु दर भी ज्यादा रही। वहीं, अधिक हरित क्षेत्र वाले जिलों में मृत्यु दर अपेक्षाकृत कम दर्ज की गई।

शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि यह अध्ययन केवल संबंध दर्शाता है, कारण साबित नहीं करता, क्योंकि टीकाकरण, स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और व्यक्तिगत व्यवहार जैसे कई अन्य कारकों को इसमें शामिल नहीं किया गया।

उन्होंने कहा कि स्वच्छ हवा और अधिक हरित क्षेत्र भविष्य की महामारी से निपटने में मददगार हो सकते हैं।

 

दिल्ली में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए ₹8,300 करोड़ की योजना, विश्व बैंक देगा 65% फंड

दिल्ली सरकार ने राजधानी में वायु प्रदूषण पर काबू पाने के लिए 'क्लीन एयर, हेल्दी दिल्ली' नाम से सात वर्षीय महत्वाकांक्षी परियोजना शुरू करने की घोषणा की है। करीब ₹8,300 करोड़ की इस योजना को सितंबर 2026 से अगस्त 2033 तक लागू किया जाएगा। परियोजना की 65 प्रतिशत लागत विश्व बैंक वहन करेगा, जबकि शेष 35 प्रतिशत राशि दिल्ली सरकार देगी। 

योजना का उद्देश्य परिवहन, सड़क की धूल, निर्माण एवं विध्वंस (सीएंडडी) कचरा, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, औद्योगिक उत्सर्जन और हरित क्षेत्रों से जुड़े प्रदूषण को कम करना है। इसके लिए वायु गुणवत्ता निगरानी प्रणाली को आधुनिक बनाया जाएगा, एक समर्पित प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (PMU) गठित होगी और इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) आधारित निगरानी व्यवस्था विकसित की जाएगी। 

परियोजना के तहत पुराने और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाने, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने, सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने तथा वाहन प्रदूषण जांच (PUC) प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया जाएगा। इसके अलावा दिल्ली और इंडो-गंगा के मैदानी राज्यों के बीच समन्वय बढ़ाने, जन-जागरूकता अभियान चलाने और नई तकनीकों को अपनाने की भी योजना है। दिल्ली लंबे समय से दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानियों में गिनी जाती रही है। सरकार का दावा है कि यह परियोजना केवल प्रदूषण नियंत्रण तक सीमित नहीं होगी, बल्कि स्वच्छ हवा, बेहतर सार्वजनिक स्वास्थ्य और टिकाऊ शहरी विकास की दिशा में दीर्घकालिक निवेश साबित होगी।

एनजीटी ने पेड़ों की कटाई पर बीएचयू पर लगाया 2.65 करोड़ रुपए का मुआवजा

राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) को बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) पर 33 पेड़ों की अवैध कटाई के मामले में 2.65 करोड़ रुपए का पर्यावरण मुआवजा लगाने की प्रक्रिया तीन महीने में पूरी करने का निर्देश दिया है। काटे गए पेड़ों में सात चंदन के पेड़ भी थे।  एनजीटी ने कहा कि पहले दिए गए आदेश के बावजूद बोर्ड समय पर कार्रवाई नहीं कर सका। अदालत को बताया गया कि मुआवजे की गणना पूरी हो चुकी है। बीएचयू ने 978 पौधे लगाए, जिनमें से 859 सुरक्षित और जीवित पाए गए हैं।

 

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