'हम सब दम घुटने से मर जाएंगे': दिल्ली जिमखाना को खाली करने के नोटिस पर हाई कोर्ट का केंद्र से सवाल
दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार के उस कदम पर सवाल उठाए हैं जिसके तहत मशहूर दिल्ली जिमखाना क्लब, दिल्ली रेस क्लब और जयपुर पोलो ग्राउंड्स जैसी लगभग 200 साल पुरानी प्रॉपर्टीज़ को कथित तौर पर ‘जनहित’ (पब्लिक पर्पस) के लिए अपने कब्ज़े में लेने की कोशिश की जा रही है।
जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने कहा कि प्रदूषण से जूझ रहे दिल्ली शहर में ये हेरिटेज और खुली जगहें निवासियों के लिए 'सांस लेने की जगह' (ब्रीथर) का काम करती हैं। अगर इनकी जगह ऊंची इमारतें बना दी गईं, तो राजधानी का ‘दम घुटने’ लगेगा और आखिरकार यह रहने लायक नहीं रहेगी।
कोर्ट ने केंद्र सरकार के अधिवक्ता आशीष दीक्षित से कहा, "आप इन सभी हेरिटेज इमारतों का क्या करेंगे? जिमखाना भी एक हेरिटेज इमारत है। आप क्या करने वाले हैं? 20 मंज़िला इमारतें बनाएंगे? दिल्ली का दम घुटने लगेगा। आप जो चाहें करें। [वह इलाका] हमारे लिए थोड़ी राहत की जगह है। वह भी खत्म हो जाएगा। हम सबका दम घुट जाएगा और हम मर जाएंगे।"
कोर्ट ने सरकार के फ़ैसले के समय पर भी सवाल उठाए और पूछा कि ऐसी संपत्तियों को अपने कब्ज़े में लेने की ज़रूरत क्यों पड़ी, जो सदियों से बिना किसी दखल के मौजूद थीं। "ये 200 से ज़्यादा सालों से यहां पर हैं। सरकार को कभी इस ज़मीन की ज़रूरत महसूस नहीं हुई... किस तरह की डिफेंस ज़रूरत? यह सब सालों से चल रहा है। हमें नहीं पता कि आप दिल्ली को क्या बनाने जा रहे हैं।"
गैर-कानूनी रूप से काटे गए पेड़ों की भरपाई के लिए लगाए गए पौधों वाले इलाकों का नाम 'नमो ऑक्सीजन पार्क'
दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी (DDA) ने 2024 में दक्षिणी रिज इलाके में 1,100 से ज़्यादा पेड़ गैर-कानूनी तरीके से काटे थे। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने भरपाई के तौर पर नए पेड़ लगाने का आदेश दिया था। इन्हीं नए पार्कों का उद्घाटन 'नमो ऑक्सीजन पार्क' के तौर पर किया गया है। रिज़र्व इलाके में ये पेड़ दक्षिण दिल्ली में 'सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेस इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज' तक जाने वाली सड़क को चौड़ा करने के लिए काटे गए थे।
अखबारों ने बताया कि विश्व पर्यावरण दिवस पर केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और कीर्ति वर्धन सिंह, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने दिल्ली भर में 185.4 एकड़ में फैले 18 'नमो ऑक्सीजन पार्कों' का उद्घाटन किया। अधिकारियों ने बताया कि इन जगहों में उत्तरी दिल्ली में कराला, पंसाली, प्रहलादपुर बांगर, शाहपुर गढ़ी, अलीपुर और टिकरी खुर्द; दक्षिण दिल्ली में मैदानगढ़ी और सतबारी; और पश्चिमी दिल्ली में धूलसिरस शामिल हैं।
असम की खरखरी नदी में बड़ी संख्या में मछलियों की मौत के बाद इंडस्ट्रियल प्रदूषण के आरोप
असम के बोको इलाके में खरखरी नदी में हज़ारों मछलियाँ मरी हुई पाई गई हैं, जिससे "संभावित इंडस्ट्रियल प्रदूषण और स्थानीय लोगों की आजीविका व जलीय जैव-विविधता पर इसके असर को लेकर चिंता बढ़ गई है।"
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना नदी के शोला से त्रिलोचन वाले हिस्से में हुई, जहां स्थानीय लोगों ने बड़ी संख्या में मरी हुई मछलियों को पानी में तैरते और नदी के किनारों पर बिखरा हुआ देखा। जिन प्रजातियों पर असर पड़ा है, उनमें पुथी, खलिहना, डोरिकोना और बोराली शामिल हैं; ये सभी इस नदी के इकोसिस्टम में आम तौर पर पाई जाती हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि चायगांव इंडस्ट्रियल सेंटर से बिना ट्रीट किए छोड़े गए इंडस्ट्रियल कचरे (एफ्लुएंट्स) ने नदी के पानी को प्रदूषित किया हो सकता है। कम्युनिटी के लोगों ने खास तौर पर ब्रह्मपुत्र बायोकेम प्राइवेट लिमिटेड के कामकाज पर चिंता जताई है। उनका आरोप है कि इस फैक्ट्री से निकला गंदा पानी बिना सही ट्रीटमेंट के नदी में मिल गया है। मछलियों की बार-बार हो रही मौतों ने उन परिवारों की आजीविका पर असर डाला है जो मछली पकड़ने और नदी से मिलने वाले संसाधनों पर निर्भर हैं। स्थानीय मछुआरों ने मछलियों की घटती संख्या और अपनी आजीविका पर पड़ने वाले संभावित लंबे समय के असर को लेकर चिंता जताई है।
ग्रेट निकोबार परियोजना: प्रदूषण मॉनिटरिंग के लिए मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं की कमी
ग्रेट निकोबार परियोजना की समीक्षा बैठक में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में एनएबीएल-मान्यता प्राप्त (गुणवत्ता प्रमाणित) प्रयोगशालाओं की अनुपस्थिति पर चिंता जताई। सीपीसीबी ने कहा कि प्रदूषण-संबंधी विश्वसनीय आंकड़ों के लिए स्थानीय प्रयोगशाला सुविधाएं विकसित करना जरूरी है। परियोजना से जुड़ी एजेंसियों ने निर्माण और संचालन के दौरान मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं की सेवाएं लेने का आश्वासन दिया।
वहीं, जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने प्रवाल भित्तियों (कोरल) और विशाल सीपों के संरक्षण के लिए नए स्थान चिह्नित किए हैं। वन्यजीव संस्थानों ने कछुओं, मगरमच्छों और अन्य प्रजातियों की निगरानी के लिए सर्वेक्षण और संरक्षण कार्य जारी होने की जानकारी दी।