यमुना फ्लडप्लेन मामले में आर्ट ऑफ लिविंग को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने एनजीटी का आदेश पलटा

Editorial Team31 अग॰. 2026
यमुना फ्लडप्लेन मामले में आर्ट ऑफ लिविंग को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने एनजीटी का आदेश पलटा

सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) द्वारा आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन पर लगाए गए 5 करोड़ रुपए के पर्यावरणीय मुआवजे का आदेश रद्द कर दिया है। कोर्ट ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को यह राशि संस्था को वापस करने का निर्देश दिया। यह मुआवजा 2016 में यमुना के बाढ़ क्षेत्र में आयोजित वर्ल्ड कल्चरल फेस्टिवल के दौरान पर्यावरणीय नुकसान के आरोपों के बाद जमा कराया गया था। 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एनजीटी का निष्कर्ष एक विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट पर आधारित था, जिसे आर्ट ऑफ लिविंग को अपना पक्ष और सबूत पेश करने का पर्याप्त अवसर दिए बिना तैयार किया गया था। कोर्ट ने यह भी कहा कि नुकसान का शुरुआती अनुमान 42.02 करोड़ और बाद में 13.29 करोड़ रुपए तय करना मनमाना था और फ्लडप्लेन के ‘पूरी तरह नष्ट’ होने का निर्णायक प्रमाण नहीं था। हालांकि, 2016 की विशेषज्ञ समिति ने करीब 170 हेक्टेयर फ्लडप्लेन के पारिस्थितिक रूप से प्रभावित होने और बड़े पैमाने पर बहाली की जरूरत बताई थी।

 

ओडिशा की सुकिंदा घाटी में क्रोमाइट प्रदूषण, सरकारी पैनल ने गंभीर खामियां गिनाईं

ओडिशा की सुकिंदा घाटी में क्रोमाइट खनन से जुड़े प्रदूषण को लेकर एक सरकारी समिति ने गंभीर खामियां सामने रखी हैं। समिति के मुताबिक, एक निजी फैरो एलोइज़ (Ferro Alloys) कंपनी के खनन क्षेत्र में ड्रेनेज व्यवस्था, ओवरबर्डन डंप की स्थिरता और हेक्सावेलेंट क्रोमियम युक्त अपशिष्ट के उपचार में गंभीर लापरवाही पाई गई। रिपोर्ट के अनुसार, ओवरबर्डन डंप से निकलने वाला बिना उपचारित पानी दमसाला नाला में जा रहा था। 

बारिश के पानी की निकासी के लिए व्यवस्थित ड्रेनेज नहीं होने से पानी खदान की सड़कों से होकर बहता है, जिससे मिट्टी का कटाव और खदान की ढलानों पर अस्थिरता बढ़ रही है। समिति ने कुछ ढलानों और बेंच के ढहने को खनन सुरक्षा मानकों का उल्लंघन बताया। हालांकि कंपनी का इफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) चालू था, डंप से आने वाले रनऑफ के लिए अलग नाले से पानी बिना उपचार के छोड़े जाने की बात सामने आई। मामला एनजीटी के समक्ष है और अगली सुनवाई 2 नवंबर को होगी।

 

हिमाचल में वन भूमि पर मटर की खेती में ग्लाइफोसेट इस्तेमाल का आरोप, एफआईआर दर्ज होगी

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में वन विभाग की भूमि पर अवैध रूप से की जा रही मटर की खेती में ग्लाइफोसेट के कथित इस्तेमाल को लेकर पर्यावरणविदों ने मिट्टी और जल स्रोतों के प्रदूषण की आशंका जताई है। मंडी के डीएफओ के मुताबिक, वन भूमि पर लगाई गई अवैध फसल नष्ट कर दी गई है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी। यह मामला थाची और धरघाट के बीच के कुछ इलाकों से सामने आया है। 

अधिकारियों के अनुसार, ग्लाइफोसेट के इस्तेमाल से जंगल की मिट्टी और आसपास के जल स्रोत प्रभावित हो सकते हैं। पेस्टिसाइड एक्शन नेटवर्क इंडिया के मुताबिक, भारत में ग्लाइफोसेट का पंजीकरण केवल चाय बागानों में खरपतवार नियंत्रण के लिए है और संगठन ने इसके इस्तेमाल पर कड़े प्रतिबंधों की मांग की है।

 

वैश्विक समुद्री सफाई अभियान में एक दिन में 13.9 मिलियन कचरे के टुकड़े जुटाए गए

पिछले साल (2025) के इंटरनेशनल कोस्टल क्लीन अप अभियान में दुनिया भर के करीब 6.3 लाख स्वयंसेवकों ने समुद्र तटों, नदियों और जलमार्गों से लगभग 13.9 मिलियन कचरे के टुकड़े हटाए। गार्डियन के मुताबिक, अभियान के दौरान 15,000 मील से अधिक तटरेखा और जलमार्गों की सफाई की गई। 

इनमें प्लास्टिक की बोतलें सबसे ज्यादा मिलने वाली वस्तु रहीं और एक ही दिन में 13 लाख से अधिक प्लास्टिक बोतलें एकत्र की गईं। स्वयंसेवकों ने 12 लाख से अधिक सिगरेट बट, 8.85 लाख प्लास्टिक बोतल के ढक्कन, 5.81 लाख प्लास्टिक शॉपिंग बैग और 10 लाख से अधिक अन्य प्लास्टिक बैग व खाद्य कंटेनर भी हटाए। आंकड़े वैश्विक स्तर पर समुद्री और तटीय प्रदूषण में सिंगल-यूज प्लास्टिक की बड़ी भूमिका को रेखांकित करते हैं।

 

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