ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर हमले के बाद सऊदी अरब ने इसे बंद किया

Editorial Team17 सित॰. 2026
ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर हमले के बाद सऊदी अरब ने इसे बंद किया

सऊदी अरब ने गुरुवार को हुए हमले के बाद अपनी 'महत्वपूर्ण' ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को बंद कर दिया है। द फाइनेंशियल टाइम्स के अनुसार, इससे खाड़ी क्षेत्र से कच्चे तेल के निर्यात के लिए उपलब्ध एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक मार्ग प्रभावित हुआ है और तेल की कीमतों पर और दबाव बढ़ने की आशंका है।

अखबार के मुताबिक, पाइपलाइन का संचालन 'एहतियाती कदम' के तौर पर रोक दिया गया है और इसे दोबारा कब शुरू किया जाएगा, इसकी कोई समयसीमा नहीं बताई गई है।

लगभग 1,200 किलोमीटर लंबी यह पाइपलाइन सऊदी अरब को हर दिन लाखों बैरल कच्चा तेल निर्यात करने में मदद करती रही है, जबकि ईरान की पाबंदियों के कारण होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले टैंकरों पर असर पड़ा है। द न्यूयॉर्क टाइम्स ने इस पाइपलाइन को सऊदी अरब के लिए 'जीवनरेखा' बताया है।

रॉयटर्स के मुताबिक, पाइपलाइन का संचालन रुकने से दुनिया की करीब 4% तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। द गार्जियन ने बताया कि अगर पाइपलाइन जल्द बहाल नहीं होती है, तो सऊदी अरब के पास निर्यात के लिए उपलब्ध तेल का भंडार कुछ ही दिनों में खत्म हो सकता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ड्रोन हमले के पीछे 'संभवतः' ईरान का हाथ था। वहीं, एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार, इराक ने कहा है कि हमला उसके क्षेत्र से किया गया था।

शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) ने कहा कि अब उसे इस साल होर्मुज़ जलडमरूमध्य के जहाजों के लिए दोबारा खुलने की उम्मीद नहीं है। एजेंसी ने यह भी चेतावनी दी कि 2026 और 2027 वैश्विक तेल मांग में वृद्धि के लिहाज से “खोया हुआ दौर” साबित हो सकते हैं।

 

ब्रिक्स में ऊर्जा सुरक्षा पर जोर, जीवाश्म ईंधनों की भूमिका जारी रखने पर सहमति

ब्रिक्स देशों ने नई दिल्ली घोषणा में ऊर्जा सुरक्षा को आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा की बुनियादी जरूरत बताते हुए आपूर्ति के विविध स्रोतों, मजबूत बुनियादी ढांचे और स्थिर ऊर्जा बाजारों पर जोर दिया है। समूह ने माना कि खासकर उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए वैश्विक ऊर्जा मिश्रण में जीवाश्म ईंधनों की भूमिका फिलहाल बनी रहेगी।

साथ ही, ब्रिक्स ने न्यायसंगत, व्यवस्थित और समावेशी ऊर्जा संक्रमण की प्रतिबद्धता दोहराई। घोषणा में नवीकरणीय ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा, हाइड्रोजन, ऊर्जा दक्षता और अन्य कम-कार्बन तकनीकों को बढ़ावा देने के साथ तकनीकी तटस्थता का समर्थन किया गया है।

यह रुख ऐसे समय आया है जब कई विकासशील देश बढ़ती ऊर्जा मांग, औद्योगिकीकरण और आपूर्ति की अस्थिरता के बीच तेज ऊर्जा संक्रमण की चुनौती का सामना कर रहे हैं। ब्रिक्स का संदेश फिलहाल जीवाश्म ईंधनों को अचानक हटाने के बजाय ऊर्जा सुरक्षा और क्रमिक संक्रमण के बीच संतुलन बनाने का है।

 

महंगे तेल और कम आपूर्ति से वैश्विक तेल मांग में 25 लाख बैरल प्रतिदिन की गिरावट: आईईए

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) ने कहा है कि उसे अब इस साल तेल परिवहन के लिए हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के फिर से खुलने की उम्मीद नहीं है। एजेंसी ने चेतावनी दी है कि 2026 और 2027 में वैश्विक तेल मांग की वृद्धि के लिहाज से स्थिति ‘खोया हुआ दौर’ साबित हो सकती है। फाइनेंशियल टाइम्स के अनुसार, आईईए ने इस साल वैश्विक तेल मांग में रोजाना 25 लाख बैरल की गिरावट का अनुमान लगाया है, जो उसके पिछले अनुमान की तुलना में काफी बड़ी गिरावट है।

रिपोर्ट के मुताबिक, ईंधन की ऊंची कीमतों के कारण तेल की मांग कमजोर हो रही है, लेकिन तेल की आपूर्ति उससे भी तेज गति से घट रही है। रायटर्स के अनुसार, इसका असर वैश्विक तेल भंडार पर पड़ रहा है और इन्वेंट्री रिकॉर्ड तेजी से कम हो रही है। आईईए ने यूक्रेन के ड्रोन हमलों के चलते रूस के तेल उत्पादन का अनुमान भी फिर घटाया है। इन हमलों में रूस के ऊर्जा बुनियादी ढांचे और तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाया गया है।

इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को यूक्रेन से रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमले रोकने की अपील की। ट्रंप ने ईंधन, खासकर डीजल की बढ़ती कीमतों के लिए ईरान के खिलाफ अमेरिकी युद्ध को जिम्मेदार मानने से इनकार किया। हालांकि, एक वरिष्ठ यूरोपीय अधिकारी ने आरोप लगाया कि ट्रंप इसके लिए यूक्रेन को बलि का बकरा बना रहे हैं।

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