पश्चिम एशिया संकट के बीच जुलाई में भारत का कच्चे तेल का आयात बिल 41% बढ़ा
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच भारत का कच्चे तेल का आयात बिल जुलाई में सालाना आधार पर 41 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 13.7 अरब डॉलर का हो गया। पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (पीपीएसी) के प्रारंभिक आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई में कच्चे तेल का आयात 13.3 प्रतिशत बढ़कर 21.4 मिलियन मीट्रिक टन (एमएमटी) रहा, जबकि पिछले साल इसी महीने यह 18.9 एमएमटी था।
कीमतों में भी बड़ा अंतर रहा। भारत के क्रूड बास्केट की औसत कीमत जुलाई में 82.04 डॉलर प्रति बैरल रही, जो एक साल पहले 70.95 डॉलर थी। इस दौरान वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव जारी रहा।
भारत का एलएनजी आयात जुलाई में मामूली 1.5 प्रतिशत बढ़कर 2,915 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर (एमएमएससीएम) हो गया। पीपीएसी के अनुसार, देश अपनी कुल कच्चे तेल की खपत का 88.5 प्रतिशत आयात से पूरा करता है। इस बीच, पेट्रोलियम उत्पादों, कच्चे तेल और गैस के आयात तथा पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात के अंतर से निकला भारत का कुल शुद्ध तेल-गैस आयात बिल भी 19 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 11.2 अरब डॉलर हो गया।
हॉर्मुज़ संकट से भारत का जीवाश्म ईंधन आयात बिल 22.5 अरब डॉलर बढ़ा: रिपोर्ट
हॉर्मुज़ संकट के कारण मार्च से अगस्त 2026 के बीच भारत का जीवाश्म ईंधन आयात बिल 22.5 अरब डॉलर बढ़ गया, जिससे वह चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे प्रभावित आयातक देश रहा। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (क्रिया) की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन को 35.5 अरब डॉलर और अमेरिका को 16.5 अरब डॉलर का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ा।
संकट के दौरान वैश्विक शिपिंग में बाधा से तेल और गैस की कीमतें बढ़ीं। रिपोर्ट के अनुसार, छह महीनों में जीवाश्म ईंधन आयातकों पर 330 अरब डॉलर से अधिक का अतिरिक्त बोझ पड़ा। कच्चे तेल की कीमतें युद्ध-पूर्व अनुमान से औसतन 35 फीसदी अधिक रहीं। डीजल और गैसोइल की कीमतों में 59 फीसदी और पेट्रोल की कीमतों में 43 फीसदी तक वृद्धि हुई।
ईरान के तेल कारोबार पर अमेरिका की कार्रवाई, चार भारतीय कंपनियां और तीन नागरिक प्रतिबंधित
अमेरिका ने ईरान से पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के आयात को लेकर चार भारतीय कंपनियों और तीन भारतीय नागरिकों पर प्रतिबंध लगाए हैं। यह कार्रवाई ईरान पर अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंधों के नए अभियान 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' के तहत की गई है। द वायर के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों ने चारों भारतीय कंपनियों द्वारा ईरानी मूल के पेट्रोलियम उत्पादों के आयात को प्रतिबंधों का आधार बनाया है।
अमेरिकी दावे के अनुसार, सदाशिव ओवरसीज लिमिटेड ने फरवरी 2024 से जून 2025 के बीच करीब 69 मिलियन डॉलर के ईरानी मूल के पेट्रोलियम उत्पाद आयात किए। वहीं, पीपी सॉफ़्टटेक प्राइवेट लिमिटेड और प्रकृतीस इंफ़्रा इम्पेक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने करीब 25-25 मिलियन डॉलर के पेट्रोलियम और संबंधित उत्पाद ईरान से आयात किए। चारों कंपनियों से जुड़े प्रतिबंधित आयात का कुल मूल्य करीब 119 मिलियन डॉलर बताया गया है।
पीपी सॉफ़्टटेक के निदेशक बताए गए प्रशांत गर्ग को भी अमेरिकी प्रतिबंध सूची में शामिल किया गया है, जबकि कंपनी के साझेदार इंद्रिस्मिया अशरफमिया शेख और हरीश रामचंद्र रंगी पर अलग से प्रतिबंध लगाए गए हैं।
ईरान ने कहा है कि वह अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है। ईरानी अर्थव्यवस्था मंत्री अली मदनिजादेह ने प्रतिबंधों से निपटने के लिए दो साल की योजना की बात कही। अमेरिका की नई सूची में चीन और हांगकांग की करीब 20 कंपनियां और चीन स्थित चार व्यक्ति भी शामिल हैं।