सरकार ने माना E-20 से गिरता है माइलेज, एथेनॉल उत्पादन घरेलू मांग से अधिक
सरकार ने पहली बार स्वीकार किया है कि 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) के इस्तेमाल से कुछ वाहनों का माइलेज 3-5 प्रतिशत तक कम हो सकता है। साथ ही केंद्र ने यह भी माना कि E20 फिलहाल सामान्य पेट्रोल या 10 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E10) से सस्ता नहीं है। सरकार के अनुसार, किसानों को एथेनॉल का उचित मूल्य देने के कारण, खासकर जब अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल रहती है, तब E20 पेट्रोल का उत्पादन शुद्ध पेट्रोल की तुलना में महंगा पड़ता है।
E20 को लेकर उपभोक्ताओं और वाहन मालिकों की बढ़ती नाराजगी के बीच सरकार E25 पेट्रोल लागू करने की योजना को टाल सकती है। पहले E20 को वर्ष 2030 तक चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना थी, लेकिन अब यह देश में पेट्रोल का मानक मिश्रण बन चुका है।
इस बीच भारत में एथेनॉल उत्पादन घरेलू मांग से अधिक हो गया है। उद्योग जगत के अनुसार, सरकार अतिरिक्त एथेनॉल के निर्यात की संभावनाएं तलाश रही है। नेपाल, बांग्लादेश और इंडोनेशिया जैसे देशों को संभावित बाजार माना जा रहा है, जहां 10 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य तो है, लेकिन पर्याप्त कच्चे माल और डिस्टिलरी क्षमता का अभाव है।
विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू स्तर पर E20 के प्रति बढ़ते विरोध और अधिशेष उत्पादन के कारण सरकार अब एथेनॉल के लिए नए अंतरराष्ट्रीय बाजार विकसित करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है।
ईरान संकट से भारत की गैस आपूर्ति पर बड़ा खतरा, हर महीने 15 लाख टन LNG की कमी की आशंका
अमेरिका-ईरान संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव के चलते भारत को प्राकृतिक गैस आपूर्ति में अब तक की सबसे बड़ी कटौती का सामना करना पड़ सकता है। ऊर्जा परामर्श कंपनी वुड मैकेंज़ी के अनुसार, भारत में हर महीने करीब 15 लाख टन (1.5 मिलियन टन) एलएनजी (LNG) की कमी हो सकती है। कंपनी का कहना है कि 2025 में कतर और संयुक्त अरब अमीरात से एशिया आने वाली लगभग 90 प्रतिशत एलएनजी खेप होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरती है, जिससे आपूर्ति बाधित होने का खतरा बढ़ गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, बढ़ती स्पॉट गैस कीमतों के कारण भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों में गैस की मांग घट रही है। कई उद्योग महंगी गैस की जगह प्रोपेन, फ्यूल ऑयल और नैफ्था जैसे वैकल्पिक ईंधनों का इस्तेमाल शुरू कर रहे हैं। वहीं, कतर से एलएनजी आपूर्ति प्रभावित होने से यूरिया उत्पादन पर भी दबाव बढ़ने की आशंका है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि संकट लंबा खिंचता है तो उर्वरक संयंत्रों के उत्पादन में कमी और बिजली क्षेत्र में लोड शेडिंग जैसी स्थिति भी पैदा हो सकती है।
भारत अपनी 80–85 प्रतिशत एलपीजी (LPG) जरूरत होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आयात करता है। ऐसे में ईंधन बदलना भी पूरी तरह सुरक्षित विकल्प नहीं माना जा रहा। कतर से आने वाली करीब 46 प्रतिशत एलएनजी आपूर्ति प्रभावित होने के बाद भारत ने अमेरिका, ओमान, नाइजीरिया और अंगोला से अतिरिक्त एलएनजी खरीदकर आपूर्ति में विविधता लाने की कोशिश शुरू की है। वहीं, विश्लेषकों का मानना है कि 2027 के बाद यूरोप द्वारा रूसी एलएनजी आयात घटाने से भारत को रियायती दरों पर रूसी एलएनजी खरीदने का नया अवसर भी मिल सकता है।
अमेरिका में कच्चे तेल का भंडार लगातार घट रहा, 43 साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा रणनीतिक तेल भंडार
अमेरिका में कच्चे तेल का भंडार लगातार घटता जा रहा है। अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट (API) के अनुसार, 10 जुलाई को समाप्त सप्ताह में वाणिज्यिक कच्चे तेल का भंडार 5.64 लाख बैरल कम हुआ। इससे एक सप्ताह पहले भी इसमें 3.99 लाख बैरल की गिरावट दर्ज की गई थी। पिछले तीन महीनों में अमेरिका के वाणिज्यिक कच्चे तेल के भंडार में 6 करोड़ बैरल से अधिक की कमी आई है।
रिपोर्ट के अनुसार, स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) से भी लगातार तेल निकाला जा रहा है। 10 जुलाई को समाप्त सप्ताह में SPR से 29.9 लाख बैरल तेल निकाला गया, जिससे इसका कुल भंडार घटकर 31.65 करोड़ बैरल रह गया। यह 2023 के न्यूनतम स्तर से भी नीचे है और पिछले 43 वर्षों का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है। वर्तमान भंडार इसकी अधिकतम क्षमता से करीब 41.5 करोड़ बैरल कम है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका में कच्चे तेल के घटते भंडार से घरेलू आपूर्ति पर दबाव बढ़ रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और पेट्रोल की कीमतों में तेजी आ सकती है। इसका असर उपभोक्ताओं पर ईंधन और ऊर्जा लागत बढ़ने के रूप में पड़ सकता है। वहीं, ऊर्जा कंपनियों और रिफाइनरियों को ऊंचे मार्जिन के कारण अल्पकालिक लाभ मिलने की संभावना है।