अमेरिका-ईरान के बीच संधि से कच्चे तेल के कीमतों में गिरावट
रविवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ईरान के साथ ‘तुरंत प्रभाव से लागू और स्थाई शांति समझौते’ की घोषणा के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ी से गिरावट देखी गई है। ट्रम्प ने अपने बयान में कहा कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ में बिना टैक्स आवाजाही के लिए रास्ता खुल गया है। उन्होंने इस समुद्री मार्ग पर अमेरिकी नेवी की नाकाबंदी हटाने की भी घोषणा की।
अमेरिकी कच्चा तेल (यूएस क्रूड) 4.8 प्रतिशत गिरकर 80.75 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ, जबकि अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 4.7 प्रतिशत गिरकर 83.17 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। यह कीमतें मार्च की शुरुआत के बाद सबसे निचले स्तर पर हैं।
पिछले सप्ताह भी तेल की कीमतों में 6 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई थी। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार को अब भी चिंता है कि तेल आपूर्ति को युद्ध-पूर्व स्तर तक पहुंचने में लंबा समय लग सकता है, इसलिए 2027 तक की ब्रेंट क्रूड वायदा कीमतें अभी भी करीब 80 डॉलर प्रति बैरल बनी हुई हैं।
कच्चे तेल के आयात को घटाने की कोशिश, गडकरी ने 100% इथेनॉल ईंधन को दी मंज़ूरी
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 100% इथेनॉल फ्यूल के इस्तेमाल को कानूनी मान्यता देने वाले नियमों को मंज़ूरी दी है। इस कदम का मकसद कच्चे तेल के आयात पर भारत की निर्भरता को कम करना है। उन्होंने बताया कि देश अभी आयात पर ₹ 22 लाख करोड़ खर्च करता है। गडकरी ने कहा कि कई बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियां आने वाले हफ़्तों में इथेनॉल-कम्पैटिबल गाड़ियां लाने की तैयारी कर रही हैं: उन्होंने कहा, "टोयोटा, सुज़ुकी, MG और हुंडई जैसी कंपनियां अगले डेढ़ महीने के अंदर 100% इथेनॉल-कम्पैटिबल गाड़ियां लॉन्च करेंगी।"
मई में भारत रूसी तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार रहा
यूरोपीय थिंक टैंक 'सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर' (CREA) की एक रिपोर्ट के अनुसार, मई में भारत रूसी फॉसिल फ्यूल (जीवाश्म ईंधन) का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बना रहा। इस दौरान भारत ने अनुमानित 5.8 अरब यूरो (6.7 अरब अमेरिकी डॉलर) मूल्य के रूसी हाइड्रोकार्बन का आयात किया, क्योंकि रिफाइनरियों ने मॉस्को से कच्चे तेल की खरीद बढ़ा दी थी।
मई में रूस से भारत के कुल आयात में कच्चे तेल की हिस्सेदारी लगभग 83 प्रतिशत थी, जिसका मूल्य 4.8 अरब यूरो था; वहीं तेल उत्पादों और कोयले का आयात क्रमशः 550 मिलियन यूरो और 429 मिलियन यूरो रहा।
CREA के बयान में कहा गया है: "मई में भारत के कुल कच्चे तेल के आयात की मात्रा में महीने-दर-महीने 8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इसकी एक वजह रूस से होने वाले आयात में महीने-दर-महीने 21 प्रतिशत की वृद्धि है।"
ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि भारत के कच्चे तेल के आयात में रूसी तेल की हिस्सेदारी अभी भी काफी बड़ी है, भले ही देश मध्य पूर्व, अफ्रीका और अमेरिका से भी आपूर्ति के स्रोत बढ़ा रहा है।