एथेनॉल आधारित वाहनों पर सरकार ने लगाया दांव, लेकिन कंपनियां और उपभोक्ता अब भी सतर्क

Editorial Team1 जुल॰. 2026
एथेनॉल आधारित वाहनों पर सरकार ने लगाया दांव, लेकिन कंपनियां और उपभोक्ता अब भी सतर्क

भारत सरकार जहां एथेनॉल को परिवहन क्षेत्र के प्रमुख ईंधन के रूप में बढ़ावा दे रही है, वहीं वाहन निर्माता कंपनियां, उपभोक्ता और विशेषज्ञ इस बदलाव को लेकर सतर्क नजर आ रहे हैं। देश में 85 प्रतिशत एथनॉल मिश्रित पेट्रोल को बेचने के लिए सरकार ने हरी झंडी दे दी है। उसके मुताबिक लक्ष्य आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता घटाना और किसानों की आय बढ़ाना है, लेकिन एथेनॉल आधारित परिवहन व्यवस्था को लेकर कई चुनौतियां बनी हुई हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, ऑटोमोबाइल कंपनियां फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों में निवेश से पहले मांग, ईंधन उपलब्धता और पूरे देश में बुनियादी ढांचे के विकास का इंतजार कर रही हैं। वहीं उपभोक्ताओं के मन में लागत, माइलेज और भविष्य की तकनीक को लेकर असमंजस है। विशेषज्ञों का कहना है कि एथेनॉल उत्पादन बढ़ाने के लिए गन्ने और मक्का जैसी फसलों की बढ़ती मांग जल संसाधनों, कृषि भूमि और खाद्य सुरक्षा पर दबाव डाल सकती है। उनका मानना है कि भारत को ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरणीय लक्ष्यों के बीच संतुलन बनाते हुए इलेक्ट्रिक वाहनों और जैव ईंधनों की मिश्रित रणनीति अपनानी होगी।

अमेरिका का रणनीतिक तेल भंडार 40 वर्षों के सबसे निचले स्तर पर, समझौते की बढ़ी जरूरत

ईरान युद्ध के कारण आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने से अमेरिका का स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) पिछले 40 वर्षों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिकी ऊर्जा विभाग के अनुसार, आपातकालीन तेल भंडार से लगातार तेल जारी किए जाने के कारण 12 जून तक SPR घटकर 340.3 मिलियन बैरल रह गया, जो 1983 की गर्मियों के बाद का सबसे निचला स्तर है। सिर्फ एक सप्ताह में भंडार में लगभग 90 लाख बैरल की कमी दर्ज की गई।

तेल उद्योग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि ईरान युद्ध के चलते वैश्विक तेल भंडार तेजी से घट रहे हैं। उनका मानना है कि अमेरिका-ईरान के बीच समझौता होने के बाद भी स्थिति तुरंत सामान्य नहीं होगी, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति पूरी तरह पटरी पर लौटने में कई सप्ताह या महीनों का समय लग सकता है।

एक्सॉन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष नील चैपमैन ने चेतावनी दी है कि वैश्विक तेल भंडार अभूतपूर्व रूप से कम होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे भंडार घटेगा और गर्मियों में ईंधन की मांग चरम पर पहुंचेगी, तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ेगा।

ऊर्जा परामर्श कंपनी रैपिडन एनर्जी के अध्यक्ष बॉब मैकनेली ने भी कहा कि तेल भंडार में गिरावट का सिलसिला अभी थमने वाला नहीं है। उनके अनुसार, भंडार पहले ही ऐतिहासिक रूप से बेहद निचले स्तर पर हैं और निकट भविष्य में तेल की कीमतों पर ऊपरी दबाव बने रहने की आशंका है।

यूरोप की भीषण गर्मी जीवाश्म ईंधन प्रदूषण की कीमत, अब भी नहीं चेते तो हालात होंगे और गंभीर: संयुक्त राष्ट्र

यूरोप में रिकॉर्डतोड़ हीटवेव के बीच संयुक्त राष्ट्र के जलवायु प्रमुख ने चेतावनी दी है कि यह संकट जीवाश्म ईंधनों से होने वाले प्रदूषण की भारी कीमत है। उन्होंने कहा कि कोयला, तेल और गैस के लगातार उपयोग ने जलवायु परिवर्तन को तेज किया है, जिसके कारण भीषण गर्मी जैसी चरम मौसमी घटनाएं अधिक तीव्र और बार-बार देखने को मिल रही हैं।

यूरोप के कई देशों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया है। भीषण गर्मी के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ है, स्कूल बंद करने पड़े हैं, अस्पतालों पर दबाव बढ़ा है और बाहरी कामकाज पर भी रोक लगाई गई है। वैज्ञानिकों का कहना है कि मानवजनित जलवायु परिवर्तन के बिना इतनी व्यापक और तीव्र हीटवेव की संभावना बेहद कम थी। संयुक्त राष्ट्र ने सरकारों से जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता घटाने, स्वच्छ ऊर्जा अपनाने और जलवायु अनुकूलन उपायों में तेजी लाने की अपील की है।

 

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