रूफटॉप सोलर से घरेलू बिजली बिल में औसतन 71% की कमी: सीईईडब्ल्यू
रूफटॉप सोलर भारतीय घरों और बिजली व्यवस्था के लिए तेजी से महत्वपूर्ण होता जा रहा है। दिल्ली स्थित संस्था सीईईडब्ल्यू के एक नए सर्वेक्षण के अनुसार, रूफटॉप सोलर अपनाने वाले परिवारों के मासिक बिजली बिल में औसतन 71% की कमी दर्ज की गई है।
अध्ययन में पाया गया कि रूफटॉप सोलर अपनाने के इच्छुक 81% परिवारों ने बिजली बिल कम होने को इसकी सबसे बड़ी वजह बताया। यह रिपोर्ट प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना (पीएमएसजीवाई) के दो वर्ष पूरे होने के अवसर पर जारी की गई।
सीईईडब्ल्यू का कहना है कि भारत में आवासीय रूफटॉप सोलर क्षेत्र की वृद्धि दर 2017-23 के दौरान 45% की वार्षिक चक्रवृद्धि वृद्धि दर (सीएजीआर) से बढ़कर 2024-26 के दौरान 85% सीएजीआर तक पहुंच गई है। यह अध्ययन 22 राज्यों के 308 जिलों में 17,000 से अधिक परिवारों पर आधारित है और यह समझने का प्रयास करता है कि परिवार रूफटॉप सोलर को कैसे देखते और अपनाते हैं।
ग्रिड पर दबाव न होने पर भी 2030 तक अक्षय ऊर्जा उत्पादन में कटौती की आशंका
एक नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत को 2030-31 तक ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है जहां बिजली ग्रिड पर कोई बड़ा बाधात्मक दबाव न होने के बावजूद अक्षय ऊर्जा उत्पादन में कटौती (रिन्यूएबल एनर्जी कर्टेलमेंट) करनी पड़े।
मेरकॉम की रिपोर्ट में कहा गया है कि कोयला आधारित बिजली संयंत्रों के न्यूनतम तकनीकी उत्पादन स्तर में बदलाव के कारण बिजली उत्पादन में 48 गीगावाट से 115 गीगावाट तक की अतिरिक्त क्षमता पैदा हो सकती है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) की राष्ट्रीय ट्रांसमिशन समिति ने इस बात पर चर्चा की है कि यदि ताप विद्युत संयंत्रों को 40% के बजाय कम से कम 55% क्षमता पर चलाना अनिवार्य किया जाता है, तो अतिरिक्त बिजली उत्पादन पर कितना प्रभाव पड़ेगा।
रिपोर्ट के अनुसार, सौर ऊर्जा के बढ़ते उत्पादन के कारण दिन में बिजली की अधिकता और शाम को मांग में तेज वृद्धि जैसी चुनौतियां सामने आ रही हैं। ऐसे में ग्रिड संतुलन बनाए रखने के लिए अक्षय ऊर्जा उत्पादन को सीमित करना पड़ सकता है।
पवन ऊर्जा: 2030 तक 100 गीगावाट का लक्ष्य, नया डिजिटल पोर्टल लॉन्च
केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने ग्लोबल विंड डे सम्मेलन में भारत का पहला पवन ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन डिजिटल पोर्टल 'WT-MARUT' लॉन्च किया। उन्होंने कहा कि यह पोर्टल पवन ऊर्जा उपकरणों की निर्माण इकाई से परियोजना स्थल तक निगरानी को आसान बनाएगा और घरेलू विनिर्माण को मजबूती देगा।
जोशी ने बताया कि भारत ने 2025-26 में रिकॉर्ड 6.1 गीगावाट नई पवन ऊर्जा क्षमता जोड़ी है और कुल स्थापित क्षमता 56 गीगावाट से अधिक हो गई है। उन्होंने कहा कि देश 2030 तक 100 गीगावाट और 2035 तक 155 गीगावाट पवन ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखता है। उनके अनुसार, पवन ऊर्जा से देश को करीब 2.3 लाख करोड़ रुपए की बचत भी हो सकती है।
2030 तक स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में पैदा होंगे 44 लाख से अधिक रोजगार: अध्ययन
एक नए अध्ययन के अनुसार, भारत में 2030 तक स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में 44 लाख से अधिक पूर्णकालिक नौकरियां पैदा हो सकती हैं। इनमें सबसे बड़ा योगदान रूफटॉप सोलर क्षेत्र का होगा, जिससे लगभग 43 प्रतिशत रोजगार मिलने की उम्मीद है। अध्ययन में कहा गया है कि भारत नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के मामले में दुनिया में तीसरे स्थान पर पहुंच चुका है। देश के 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता लक्ष्य और राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन से रोजगार के नए अवसर बनेंगे। हालांकि, रिपोर्ट में महिलाओं की कम भागीदारी पर चिंता जताते हुए कौशल विकास और लैंगिक समावेशन बढ़ाने की जरूरत बताई गई है।